‘मैं नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान खोल रहा हूं’ – राहुल गांधी

मयंक सक्सेना मयंक सक्सेना
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अलवर की रैली में राहुल गांधी


भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान के अंतिम चरण में, राहुल गांधी ने 19 दिसंबर को अलवर की रैली में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, ‘मैं इस यात्रा में क्या करने निकला हूं? मैं नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत बेचने निकला हूं।’

क्या कहा राहुल गांधी ने इस सभा में?

इस सभा में राहुल गांधी, राजस्थान के यात्रा के चरण की अंतिम बड़ी सभा कर रहे थे। अलवर से भारत जोड़ो यात्रा अब हरियाणा होते हुए, उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी। इस जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने ज़िक्र किया कि कई बार यात्रा के मार्ग में दूर खड़े या छतों पर खड़े भाजपा के कार्यकर्ता भी उनको देखते हैं। उन्होंने कहा,

‘मुझे रास्ते पर अपने दूसरे प्यारे मित्र भी मिल जाते हैं..आम तौर वे भाजपा कार्यालयों के ऊपर खड़े होते हैं। मैं निकलता हूं, वे हाथ बांधे खड़े रहते हैं। पहले मैं उनको हाथ हिलाता हूं लेकिन वे ऐसे ही हाथ रखते हैं क्योंकि राहुल गांधी को वे हाथ नहीं हिला सकते।वे करना चाहते हैं लेकिन उनको इसकी इजाज़त नहीं है।”

ये कहते हुए राहुल गांधी ने उनकी यात्रा को छतों से देख रहे स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं की भाव भंगिमा बताई और कहा कि वे भी उनको हाथ हिलाना चाहते हैं लेकिन वे ऐसा कर नहीं सकते हैं। आगे वे बोले कि वे फिर भी उनको प्यार देते हैं क्योंकि वे किसी से नफ़रत नहीं करते।

‘फिर मैं उनको और हाथ हिलाता हूं तो उनमें से एक-दो हाथ हिला देते हैं। फिर मैं उनको वो ही इशारा करता हूं, जो आप मुझे करते हैं..मैं उनकी ओर चुंबन उछाल देता हूं। मैं नफ़रत नहीं करता उनसे, उनकी विचारधारा के ख़िलाफ़ लड़ता हूं पर वे मुझे अच्छे लगते हैं। मैं किसी जीव से नफ़रत नहीं करता। फिर वे मुझसे इशारे से पूछते हैं क्योंकि वे मुझसे बात नहीं कर सकते कि मैं क्या कर रहा हूं? मैं क्या करने निकला हूं…’

और फिर राहुल ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि वे आख़िर क्या करने निकले हैं। उन्होंने कहा,

‘मैं सोच रहा था कि मैं क्या कर रहा हूं। पैदल चल रहा हूं, लोगों से गले मिल रहा हूं..मैं क्या कर रहा हूं। मुझे उनके कार्यकर्ताओं का जवाब मिल गया है। मैं नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान खोल रहा हूं। आप मुझसे नफ़रत करो, मुझे गाली दो..ये आपके दिल की बात है..मेरे दिल की बात मोहब्बत है..’