सामंती हमले के पीड़ितों से मिलने प्रतापगढ़ पहुंचीं अनुप्रिया, कहा- एसपी को हटाओ !

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यूपी के प्रतापगढ़ के गोविंदपुर-परसठ गांव में वंचित-पिछड़े समाज के किसानों पर हुए सामंती हमले को लेकर राजनीति तेज हो गई है। एनडीए गठबंधन में शामिल अपना दल (एस) ने इस मसले पर अपने तेवर कड़े कर लिये हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व मिर्जापुर सांसद अनुप्रिया पटेल ने यूपी सरकार से प्रतापगढ़ के एसपी को तत्काल हटाने व दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होने कहा कि थाना प्रभारी पट्टी और थाना प्रभारी आसपुर देवसरा के विरूद्ध तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाए।

गोविंदपुर-परसठ गांव के पीड़ितों से मिलने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अबतक इस मसले पर एक पक्षीय कार्रवाई हुई है, सिर्फ एक पक्ष के 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अपना दल पुलिस की एकपक्षीय कार्रवाई बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस की लापरवाही के कारण ही यहां के हालात खराब हुए हैं। प्रतापगढ़ के एसपी को अपरिपक्व और अनुभवहीन बताते हुए कहा कि इनके रहते हुए निष्पक्ष कार्रवाई संभव नहीं है।

 

अनुप्रिया पटेल ने प्रयागराज मंडलायुक्त और पुलिस की ओर से अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा नियुक्त अधिकारी की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और पीड़ितों को तत्काल मुआवजा देने की भी मांग की।

अनुप्रिया पटेल शुक्रवार को प्रतापगढ़ के पट्टी क्षेत्र स्थित गोविंदपुर-परसठ गाँव पहुंची थी, जहां उन्होंने 22 मई को दबंगों के अत्याचार की शिकार पीड़ित महिलाओं से मुलाकात की और उनका भी दु:ख-दर्द सुना। उन्होंने पीड़ित परिवारों के जलाए गए घरों व मवेशियों को भी देखा और उन्हें हर हाल में न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।

अनुप्रिया पटेल जब पीड़ित महिलाओं से बात कर रही थीं, महिलाओं ने जिले के मंत्री व पट्टी के विधायक मोती सिंह और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। गांव की महिलाएं मंत्री मोती सिंह और पुलिस के खिलाफ लिखे नारों की तख्तियां लेकर बैठीं थीं। बता दें कि आरोपियों की गिरफ्तारी, मुआवजा, जेल भेजे गए 11 लोगों को रिहा किए जाने की मांग लेकर महिलाएं गांव में ही कई दिनों से धरने पर बैठी हुई हैं।

इस दौरान मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए अनुप्रिया पटेल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस गंभीर मामले को लेकर सात मांगे की है-

1- प्रतापगढ़ जैसे संवेदनशील जिला के लिए वर्तमान पुलिस अधीक्षक अनुभवहीन अधिकारी हैं। फलस्वरूप इनके इस पद पर रहते हुए इस प्रकरण में निष्पक्ष कार्यवाही संभव ही नहीं है। इसलिए इन्हें तत्काल हटाया जाए।

2- घटना के दोषी सभी पुलिस कर्मियों के विरूद्ध कार्यवाही हो। विशेष रूप से थाना प्रभारी पट्टी और थाना प्रभारी आसपुर देवसरा के विरूद्ध निलंबन की कार्यवाही हो।

3- पुलिस महानिदेशक प्रयागराज के निर्देश पर युवा और ईमानदार ट्रेनी आईपीएस (सीओ सोरांव, प्रयागराज) द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और उसके आधार पर इस प्रकरण के मुकदमे में धाराओं को लगाने की कार्यवाही हो।

4- मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा निर्देश दिए जाने पर प्रयागराज मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

5- गिरफ्तार किये गये निर्दोषों को छोड़ा जाए।

6- अभी तक इस प्रकरण में सिर्फ एक पक्षीय कार्यवाही हुई है। सभी पक्षों के दोषियों की गिरफ्तारी हो।

7- घटना में आगजनी तथा सामान के नुकसान का पीड़ितों को मुआवजा मिले।

 

अनुप्रिया पटेल के साथ उत्तर प्रदेश के कारागार राज्यमंत्री जयकुमार सिंह जैकी, प्रतापगढ़ सदर से अपना दल (एस) विधायक राजकुमार पाल, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रेखा पटेल, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रामलखन पटेल, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राजेंद्र पाल, उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद के सदस्य अजय प्रताप सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेश पटेल भी गोविंदपुर-परसठ गांव पहुंचे थे।

बता दें कि गोविंदपुर-परसठ गांव में 22 मई को पुलिस के सामने दबंगों ने पिछड़ी जाति के किसानों के घरों को जला दिया था। पीड़ित किसानों की महिलाओं से दबंगों ने दुर्व्यवहार किया, उन्हें मारापीटा और उनके मवेशियों को भी जला दिया था। पीड़ितों के घरेलू सामान कुंए में फेंक दिया था। इस घटना के बाद अनुप्रिया पटेल ने अपना दल (एस) का एक प्रतिनिधि मंडल विधानमंडल दल के नेता नील रतन पटेल ‘नीलू’ और प्रदेश अध्यक्ष जमुना प्रसाद सरोज के नेतृत्व में गोविंदपुर-परसठ गांव भेजा था और पार्टी की तरफ़ से पीड़ितों को एक लाख रुपये की आर्थिक मदद भी की गई थी। इस बीच कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई राजनीतिक पार्टियों और संगठनों के नेताओं ने भी गांव का दौरा किया था।

प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट के आधार अनुप्रिया पटेल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उच्चस्तरीय मजिस्ट्रेट जाँच की मांग की थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले में प्रयागराज मंडलायुक्त को 15 दिन के अंदर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया था।


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