मोदी राज में लगातार बढ़ा ईसाई समुदाय पर अत्याचार- IAMC

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विविधता की भूमि के रूप में सम्मानित भारत आज धार्मिक असहिष्णुता के साये में साँस ले रहा है। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) की हालिया रिपोर्टटारगेटेड वायलेंस अगेंस्ट क्रिश्चियंस इन इंडिया ड्यूरिंग क्रिसमस 2025″ ने इस कड़वी सच्चाई को उजागर किया है। वाशिंगटन डीसी से 26 फरवरी 2025 को जारी इस रिपोर्ट में क्रिसमस 2025 के दौरान ईसाई समुदाय पर हुए संगठित हमलों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नीतियों के कारण हिंदू बहुसंख्यकवाद का माहौल बनने से ईसाईयों के खिलाफ नफरत सामान्य हो गई है। यह रिपोर्ट न केवल क्रिसमस की घटनाओं पर केंद्रित है, बल्कि यह एक लंबे सिलसिले का हिस्सा है, जहां ईसाई समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 का क्रिसमस सीजन भारत के कई राज्यों में ईसाईयों के लिए डरावना साबित हुआ। दिसंबर 2025 से ठीक पहले के हफ्तों में दर्जनों घटनाएँ सामने आईं, जिनमें ईसाई समुदाय के उत्सवों और प्रार्थनाओं को बाधित किया गया। हमलावरों ने हिंदू धर्मांतरण के झूठे आरोप लगाकर हिंसा को जायज ठहराया, जबकि कोई ठोस सबूत नहीं था। एक चौंकाने वाली घटना दिल्ली के एक मॉल की थी, जहां क्रिसमस की सजावट को देखकर हिंदू उग्रवादियों का एक समूह घुस आया। उन्होंने तोड़फोड़ की, लोगों को धमकाया और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाया।  इसी तरह, उत्तर प्रदेश में एक नेत्रहीन ईसाई महिला पर स्थानीय BJP अधिकारी ने हमला किया, क्योंकि वह प्रार्थना सभा में हिस्सा ले रही थी। महिला को पीटा गया और उसके कपड़े फाड़ दिए गए। कई चर्चों पर भी हमले हुएझारखंड में एक प्रार्थना सभा के दौरान भीड़ ने पादरी को घेर लिया और उन्हेंराष्ट्रविरोधीकहकर पीटा। इन घटनाओं से ईसाई समुदाय में भय का माहौल बन गया, जहां साधारण धार्मिक अभ्यास को भी खतरा लगने लगा।

रिपोर्ट में इन हमलों को संगठित बताते हुए कहा गया है कि ये धार्मिक पूजा में हस्तक्षेप, सार्वजनिक स्थानों पर ईसाई दृश्यता का अपराधीकरण और भीड़ हिंसा के रूप में सामने आए। राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया बेहद नाकाम रहीपुलिस ने निष्क्रियता दिखाई, जबकि प्रशासन ने शिकायतों को दबाया। यह ट्रेंड हिंदू बहुसंख्यकवाद की बढ़ती लहर, एंटीकन्वर्जन कानूनों के दुरुपयोग और चरमपंथी समूहों जैसे विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल की सक्रियता से जुड़ा है। IAMC के अध्यक्ष मोहम्मद जावेद ने कहा, “ईसाई समुदाय पर मोदी सरकार के तहत वर्षों से हिंसा हो रही है, लेकिन दिसंबर 2025 में यह चरम पर पहुंच गई। क्रिसमस जैसे पवित्र अवसर पर यह हिंसा असहिष्णुता और बेअदबी का प्रतीक है।

क्रिसमस की घटनाएं अकेली नहीं हैं। भारत में ईसाई समुदाय पर अत्याचारों का सिलसिला लंबा है, जो 2023 से 2025 तक तेजी से बढ़ा। यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम (UCF) के अनुसार, 2023 में 598 हमले दर्ज हुए, जो 2024 में 745-834 तक पहुंच गये।  2025 में जनवरी से अक्टूबर तक ही 600 से अधिक घटनाएँ हुईं, जो औसतन दो हमलों प्रतिदिन के बराबर है।  इनमें चर्चों में आगजनी, पादरियों पर हमले, महिलाओं और बच्चों पर यौन हिंसा शामिल हैं। ओपन डोर्स की वर्ल्ड वॉच लिस्ट 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, ईसाई महिलाओं पर यौन हिंसा 69% बढ़ी, जिसमें 13 मामले दर्ज हुए। 

मई 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान ईसाई चर्चों को निशाना बनाया गया। कूकी और मेइतेई समुदायों के बीच झड़पों में 80 से अधिक ईसाई मारे गए, और हजारों बेघर हो गए।  उग्रवादियों ने चर्चों को जलाया और ईसाई परिवारों को निशाना बनाया। छत्तीसगढ़ में 2024 में उग्र हिंदुत्ववादियों ने कई गांवों में ईसाईयों कोजातिविरोधीबता कर हमला किया। जेनोसाइड वॉच ने फरवरी 2025 में चेतावनी जारी की कि एक हिंदू नेता ने ईसाई महिलाओं के बलात्कार और हत्या की धमकी दी, जो नरसंहार की ओर बढ़ते क़दम की ओर इशारा करती है।  उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में एंटीकन्वर्जन कानूनों के तहत 2024 में दर्जनों पादरी गिरफ्तार हुए। एक मामले में, एक घरेलू प्रार्थना सभा कोगुप्त धर्मांतरणबताकर पुलिस ने छापा मारा, जिसमें महिलाओं और बच्चों को पीटा गया।

ये घटनाएँ केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं। वे सामाजिक बहिष्कार, आर्थिक बहिष्कार और मनोवैज्ञानिक दबाव का रूप ले लेती हैं। 2025 में अल जजीरा की रिपोर्ट ने बताया कि मोदी सरकार के दस वर्षों में मुसलमानों के बाद ईसाई चरमपंथियों का निशाना बने।  ईसाई समुदाय, जो भारत की आबादी का मात्र 2.3% है, अब डर के साये में जी रहा है। कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि वे ईसाईयों पर हमलों की सार्वजनिक निंदा करें।  लेकिन सरकार की चुप्पी ने बेअदबी को बढ़ावा दिया।

रिपोर्ट अमेरिकी विदेश मंत्री से अपील करती है कि यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) की सलाह मानते हुए भारत कोकंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न” (CPC) घोषित करें। साथ ही, अमेरिकी सरकार से चरमपंथी संगठनों और हिंसा भड़काने वालों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की मांग है। भारत सरकार से भी अपेक्षा है कि एंटीकन्वर्जन कानूनों का दुरुपयोग रोके और पुलिस को संवेदनशील बनाए। ये सिफारिशें न केवल ईसाई समुदाय की रक्षा करेंगी, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक छवि को भी मजबूत करेंगी।

ईसाई समुदाय पर ये अत्याचार भारत की संवैधानिक मूल्योंसमानता, स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षतापर सीधा हमला हैं। संविधान के अनुच्छेद 25 में धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी है, लेकिन हकीकत में यह खोखली साबित हो रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ रही है। यूरोपीय संसद में दिसंबर 2025 में विशेषज्ञों ने भारतपाकिस्तान में ईसाई उत्पीड़न पर चर्चा की।

क्रिसमस 2025 की ये घटनाएं एक चेतावनी हैं। IAMC अध्यक्ष के शब्दों में, “यह हिंसा क्रिसमस जैसे आनंद के समय में चरम पर पहुंची, जो भारत की सत्ताधारी व्यवस्था द्वारा पोषित असहिष्णुता का प्रमाण है।भारत को अपनी विविधता को ताकत बनाना चाहिए, न कि विभाजन का हथियार। ईसाई समुदाय, जो सदियों से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा में योगदान दे रहा है, को सुरक्षा का आश्वासन चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दबाव और आंतरिक जागरूकता ही इस अंधेरे को रोशन कर सकती है। यदि हम अब नहीं जागे, तो धार्मिक सद्भाव की यह धरोहर हमेशा के लिए खो सकती है। समय है एकजुट होने कासभी धर्मों के लिए न्याय और शांति का।


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