संविधान से धर्मनिरपेक्ष वा समाजवाद शब्द हटाने की कोशिश को रोकने के लिए अल्पसंख्यक कांग्रेस ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन!

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अल्पसंख्यक कांग्रेस ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के हर ज़िले से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा है। जिसमे संविधान से धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद शब्द हटाने के प्रयासों पर रोक लगाने और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने एक बयान जारी कर कहा है कि कांग्रेस बीजेपी की इस साज़िश को कामयाब नहीं होने देगी।

उपसभापति ने संविधान विरोधी आचरण दिखाया..

संविधान की प्रस्तावना को बदलने की कोशिशों को लेकर शाहनवाज़ आलम ने बयान जारी किया। जिसमे उन्होंने कहा हैं कि “8 दिसंबर को बीजेपी सांसद केजे अल्फोंस ने राज्यसभा में प्राइवेट मेंबर बिल लाकर संविधान की प्रस्तावना से सेक्युलर शब्द को हटाने का प्रस्ताव पेश किया। जिनके खिलाफ “No” बोलने वालों की आवाजें ज्यादा थीं, लेकिन राज्यसभा के उपसभापति ने संविधान विरोधी आचरण दिखाते हुए इसे रिजर्व में रखा।

संसद भी संविधान की प्रस्तावना में कोई बदलाव नहीं कर सकता..

उन्होंने आगे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि ” इसी तरह पिछले साल 20 जून को बीजेपी के राज्यसभा सदस्य राकेश सिन्हा ने संविधान की प्रस्तावना से समाजवाद शब्द को हटाने की मांग की थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि संसद भी संविधान की प्रस्तावना में कोई बदलाव नहीं कर सकता है। लेकिन इसके बावजूद राज्यसभा के उपसभापति हरि हरिवंश के खिलाफ कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई।” अपने बयान में आगे शाहनवाज़ आलम ने कहा कि “इसी तरह 8 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर के मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्तल ने भी कहा था कि संविधान से धर्मनिरपेक्ष शब्द को हटा दिया जाना चाहिए। इस बयान पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि सुप्रीम कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी।”

गरीब और अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाना चाहती है बीजेपी..

शाहनवाज़ आलम ने संविधान से हटाने का प्रयास करने वाले शब्द के इतिहास का ज़िक्र करते हुए कहा कि “संविधान की प्रस्तावना में इंदिरा गांधी ने 42वां संशोधन कर समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़कर गरीब और अल्पसंख्यक वर्ग को सशक्त बनाया था। बीजेपी इन शब्दों को निकाल कर गरीब और अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बीजेपी की इस साज़िश को कामयाब नहीं होने देगी। इस मुद्दे पर सपा और बसपा की चुप्पी साबित करती है कि उनकी भाजपा से मिलीभगत है। शाहनवाज़ ने कहा कि राष्ट्रपति संविधान के संरक्षक है, इसलिए उन्हें ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।”


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