भारत क्रांतियों का नहीं संक्रांतियों का देश है।क्रांति अक्सर प्रतिक्रांति का शिकार हो जाती है जबकि संक्रांतियाँ महान विचारक रूसों का ‘सोशल कॉन्ट्रैक्ट’ बन जाती हैं। रूसो लोकइच्छा को सार्वभौम बताता है (जनरल…
उमर ख़ालिद ने ऐसा ही एक भाषण फरवरी 2020 में महाराष्ट्र में दिया गया था, जिसमें उमर ने लोगों से हिंसा का जवाब हिंसा से या नफरत का जवाब नफरत से न देने…
स्टालिन को हिटलर के साथ, जिसका रिकार्ड परम नालायकी और व्यर्थता का है, एक पाँत में नहीं रखा जा सकता। हिटलर एक बंजर प्रति-क्रांति का नेता था; स्टालिन एक त्रासद, विरोधाभासपूर्ण, तथापि सर्जनात्मक…
राहुल गाँधी को कोसने के चक्कर में अमित मालवीय यहाँ तक कह गये कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘एंटी फ़ासिस्ट लेफ़्ट गठबंधन’ चुनी हुई सरकारों को उखाड़ फेंकना चाहता है जिससे राहुल गाँधी जुड़े…
बीते लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ने ख़ुद जिस तरह अपने सांप्रदायिक भाषणों से देश के माहौल को विषाक्त किया, उसे देखते हुए पचास साल पहले लगी इमरजेंसी पर बहस कराना एक शातिर…
बड़ा सत्य यह है कि जब संविधान सभा के लिए हुए चुनाव में डॉ.आंबेडकर का क्षेत्र पाकिस्तान में चला गया था तो कांग्रेस पार्टी ने बंबई से अपने सदस्य एम.आर.जयकर को इस्तीफ़ा दिलवाया…
दिवंगत व्यक्ति अपने दोस्तों-रिश्तेदारों की यादों का हिस्सा होता है. लेकिन, किसी संपादक को उसका पाठक सदियों तक क्यों याद करता है? एक पत्रकार या संपादक अपने पाठकों की वजह से कालजयी होता…
इंदिरा और फ़ीरोज़ गाँधी की शादी के लिए महात्मा गांधी ने एक ऐसी संहिता तैयार की थी जिसमें हिंदू और पारसी धर्म के धार्मिक मंत्रों को शामिल किया गया था।पं.नेहरू का सपना था…
(क्या सांप्रदायिक विष से बुझा कोई व्यक्ति लेखक के रूप में प्रतिष्ठित किया जा सकता है? क्या अलग-अलग समाज की नैतिकताएँ अलग होती हैं। मुद्दा तो सुशोभित नाम के एक लेखक की सांप्रदायिक…
कुल मिलाकर भगवा-वेश में सत्ता-हरण की कोशिशों की पोल खुल गयी है। जागृत हिंदू को याद आ गया है कि रावण ने भी भगवा पहन कर सीताहरण किया था और हनुमान को भटकाने…
11 सितंबर 1893 को शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद ने 'गर्व से कहो मैं हिंदू हूँ’ का घोष नहीं किया था जैसा कि उनकी तस्वीर के साथ दर्ज करके…
[वाजपेयी सरकार ने संविधान को बदलने की कोशिश की थी, लेकिन 2004 के चुनाव में हार गई। हमें सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि हिंदुत्व वर्चस्ववादी ताकतों द्वारा फिर से इसी तरह का राग अलापा…
1977 के लोकसभा चुनाव के बाद एक शख़्स इंदिरा गाँधी को लेकर बहुत चिंतित था।यह वही शख़्स था जिसने केंद्र में कांग्रेस के तीस साल के अनवरत शासन के अंत की पटकथा लिखी…
गुजरात में 2002 में मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हुई बर्बर हिंसा के दौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को राजधर्म की सलाह देते हुए कहा था, “ राजा…
किस तरह एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय को डॉ अम्बेडकर को अपमाानित करने दिया जा रहा है और चौतरफा खामोशी का षड्यंत्र बरकरार है! ‘एक अहमक का दिमाग दर्शन को मूर्खता में, विज्ञान को…
भविष्य के सैन्य अधिकारियों को हिन्दुत्व वर्चस्ववाद का प्रशिक्षण? आखिर किस तरह सैनिक स्कूलों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का मॉडल सभी संवैधानिक सिद्धांतों और मूल्यों के खिलाफ है ( एक बेहद विवादास्पद निर्णय…
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके तमाम आनुषंगिक संगठनों की तमाम कोशिशों के बावजूद भारत के लगभग 80 फ़ीसदी लोग मानते हैं कि देश सबका है, न कि सिर्फ़ हिंदुओं का। यानी हिंदुत्व के…





























