पहला पन्ना: पाँच अख़बारों की सेकेंड लीड पर भारी मूर्ख दिवस पर वित्त मंत्री का ट्वीट!


यह कम दिलचस्प नहीं है कि वित्त मंत्री ने 31 मार्च को जारी आदेश को बदलने का फैसला एक अप्रैल को सुबह-सुबह लिया जो मूर्ख दिवस भी माना जाता है। दुनिया भर में आज के दिन को फूल्स डे कहा जाता है। ऐसे दिन मतदान और उसे प्रभावित कर सकने वाला यह आदेश अपने आप में अनूठा है। मुझे नहीं पता ट्वीट की खबर देने वाले चैनल ये सब सवाल उठा रहे हैं कि नहीं कि इतनी बड़ी गलती कैसे हुई। पूरे दिन क्यों नहीं सुधारा गया और सुधारने का आदेश आएगा यह ट्वीट मूर्ख दिवस को सुबह-सुबह (कार्यालय समय शुरू होने से पहले) क्यों जारी किया गया। क्या यह हेडलाइन मैनेजमेंट नहीं है?


संजय कुमार सिंह संजय कुमार सिंह
काॅलम Published On :


आज सभी अखबारों में सेकेंड लीड है, छोटी बचत पर ब्याज दर में कमी। यह खबर ही ऐसी है कि सभी अखबारों में प्रमुखता मिली है पर सरकार ने अपनी चाल या कार्यशैली से इरादतन या वैसे ही, अखबारों की साख को मिट्टी में मिलाने का काम किया है। ट्वीटर पर वित्त मंत्री ने कहा है कि संबंधित आदेश (जिसपर आज के अखबारों की सेकेंड लीड है) गलती से (अंग्रेजी में ओवरसाइट) जारी हो गया है और इसे वापस ले लिया जाएगा। 31 मार्च को इस आशय का आदेश जारी होना, दिन भर सोशल मीडिया पर उसकी चर्चा होना और सभी अखबारों में खबर छप जाना सामान्य नहीं है। निश्चित रूप से यह एक बड़ी घटना है और आदेश कितना महत्वपूर्ण था इसका पता इस बात से चलता है कि सभी अखबारों में सेकेंड लीड है।

यह अलग बात है कि वित्त मंत्री ने सुबह-सुबह एक ट्वीट करके इस पूरी खबर को खारिज कर दिया है। वित्त मंत्री का ट्वीट और यह कहना कि आदेश वापस ले लिया जाएगा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि चुनाव वाले राज्यों में आज मतदान है। ऐसे में सुबह 7:54 पर ट्वीट किया जाना मतलब रखता है। और निश्चित रूप से इसका मकसद मतदान को प्रभावित करना भी हो सकता है। देश भर के प्रचारक टेलीविजन चैनल सेवा में लग भी गए होंगे। कायदे से कल के गलत आदेश का खंडन आज दफ्तर खुलने के बाद होता और आम आदमी तक जानकारी पहुंचने में शाम हो जाती। मतदान पूरा हो जाता। पर यह हेडलाइन मैनेजमेंट का हिस्सा लगता है।

वित्त मंत्रालय ने 31 मार्च को एक आदेश जारी किया जिसपर लिखा है कि इसे सक्षम अधिकारियों की मंजूरी है और उसकी प्रति वित्त सचिव से लेकर सरकार के भिन्न विभागों के सचिवों के साथ डाक विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक, राज्यों के मुख्य सचिवों और राष्ट्रीय बचत योजना के संयुक्त निदेशक को बाकायदा भेजी गयी उसके बारे में 24 घंटे से भी कम समय में वित्त मंत्री ने ट्वीट करके कह दिया कि आदेश गलती से जारी हो गया है। यह आदेश वित्त मंत्री के निजी ट्वीटर हैंडल @nsitharaman से जारी हुआ है और वित्त मंत्री @FinMinIndia के साथ @PIB_India को भी टैग किया गया है।  आप समझ सकते हैं कि इस व्यवस्था में सरकारी आदेश कैसे जारी होते हैं और कैसे रद्द होते हैं।

अखबारों में जो खबर आज छपी है उससे सरकार के प्रति लोगों की नाराजगी का अंदाजा हर कोई लगा सकता है। देश की आर्थिक स्थिति का अंदाजा भी इस बात से चलता है कि ब्याज दर 46 साल में सबसे कम करने की घोषणा कर दी गई थी। अब सोशल मीडिया ने सरकार का काम आसान कर दिया है और निश्चित रूप से यह सरकार द्वारा सोशल मीडिया का दुरुपयोग है। सरकार शायद इसीलिए सोशल मीडिया को नियंत्रित करना चाहती है और नए आदेश को इस आलोक में देखिए तो मकसद साफ लगता है। लेकिन मीडिया में आलोचनात्मक विवरण नहीं के बराबर है। हालांकि वह अलग मुद्दा है।

यह कम दिलचस्प नहीं है कि वित्त मंत्री ने 31 मार्च को जारी आदेश को बदलने का फैसला एक अप्रैल को सुबह-सुबह लिया जो मूर्ख दिवस भी माना जाता है। दुनिया भर में आज के दिन को फूल्स डे कहा जाता है। ऐसे दिन मतदान और उसे प्रभावित कर सकने वाला यह आदेश अपने आप में अनूठा है। मुझे नहीं पता ट्वीट की खबर देने वाले चैनल ये सब सवाल उठा रहे हैं कि नहीं कि इतनी बड़ी गलती कैसे हुई। पूरे दिन क्यों नहीं सुधारा गया और सुधारने का आदेश आएगा यह ट्वीट मूर्ख दिवस को सुबह-सुबह (कार्यालय समय शुरू होने से पहले) क्यों जारी किया गया। क्या यह हेडलाइन मैनेजमेंट नहीं है? आप जानते हैं कि ऐसे दिन जब झूठ बोलने का रिवाज है तो यह आदेश जारी होगा इसका पता तभी चलेगा जब आदेश जारी हो जाएगा। इस बीच टेलीविजन पर आज सिर्फ सरकार और उसकी कार्रवाई रहेगी। एक ऐसी कार्रवाई जो गलती से हुई। क्या इतना भारी प्रचार पाने वाली कार्रवाई गलती से हो सकती है?

अखबारों में संबंधित खबर के शीर्षक इस प्रकार हैं:

 

1. हिन्दुस्तान टाइम्स

केंद्र ने छोटी बचत योजनाओं की दर कम की (दो कॉलम)

 

2. टाइम्स ऑफ इंडिया

सरकार ने छोटी बचत योजनाओं की दर 110 बेसिस प्वाइंट्स तक कम की (दो कॉलम)

 

3. इंडियन एक्सप्रेस

छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर में भारी कटौती : पीपीएफ पर 604%, एनएससी पर 5.9% (ब्याज) मिलेगा  (चार कॉलम)

 

4. द हिन्दू

सरकार ने छोटी बचत योजनाओं की दर में भारी कटौती की (चार कॉलम)

अखबार में यह खबर अंदर के पन्ने पर जारी है। इसके अलावा दो संबंधित खबर अंदर होने की सूचना है। पहली मुद्रास्फीति का लक्ष्य और दूसरी कोर सेक्टर का आउटपुट 4.6 प्रतिशत कम हुआ।

 

5. द टेलीग्राफ

छोटी बचत की दर घटाकर 46 साल में सबसे कम की गई  (दो कॉलम)

 

आज की इस खबर और इसे वापस लिए जाने के बाद कल की एक खबर मालूम है। देखता हूं, बेवकूफ बनाए जाने के इस मामले में अखबारों की कल की प्रतिक्रिया क्या होती है। इसे पहले पन्ने पर छापते हैं या नहीं और छापते हैं तो कैसे। ऐसी घटनाओं से लगता है कि सरकार अखबारों को गंभीरता से तो नहीं ही लेती है, वे खुद भी अपनी गंभीरता को लेकर लापरवाह हैं। इसलिए आज इतना ही। इस माहौल में मूर्ख दिवस पर ज्ञान की बात करना भी मूर्खता ही है।

 

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध अनुवादक हैं।

 

 


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