भारत को सशस्त्र ड्रोन बेचने के इरादे पर अमेरिकी मानवाधिकार संगठनों को ऐतराज

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मानवाधिकार और नागरिक अधिकारों के दमन को मुद्दा बनाते हुए अमेरिका में भारत को घातक हथियारबंद ड्रोन बेचने के फ़ैसले का विरोध शुरु हो गया है। – कैपिटल हिल पर “भारत को अमेरिकी हथियारों की बिक्री: अमेरिकी कांग्रेस की भूमिका” शीर्षक से आयोजित कांग्रेस की ब्रीफिंग में ह्यूमन राइट्स वॉच के एशिया एडवोकेसी निदेशक जॉन सिफ्टन ने ” ख़राब दृष्टिकोण” की कड़ी आलोचना की। दरअसल, जो बिडेन प्रशासन का इरादा भारत सरकार को हथियारों के साथ 31 सशस्त्र एमक्यू-9 रीपर ड्रोन बेचने का है, जिनका इस्तेमाल अक्सर नागरिकों को निशाना बनाकर उनकी हत्या करने के लिए किया जाता है। जबकि अमेरिका ने कुछ महीने पहले ही भारत सरकार पर न्यूयार्क में एक सिख अमेरिकी नागरिक की हत्या की साजिश में शामिल होने का संदेह जताया था।

जॉन सिफ्टन ने कहा कि इस ख़ास हथियार को बेचने के पीछे एक ग़लत दृष्टिकोण है जो लक्षित हत्याओं के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने “उसी समय सौदे की बातचीत का एक प्रस्ताव तैयार किया जब कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियां अमेरिकी धरती पर भारत सरकार के एक एजेंट द्वारा हत्या के बारे में जानकारी दे रही थीं, जिसे हम बहुत चिंताजनक पाते हैं।”

सिफ्टन ने कहा, “इन चीजों का भारत में लोगों के व्यवहार पर असर पड़ता है, जिसमें खुद प्रधानमंत्री भी शामिल हैं। चाहे बिडेन प्रशासन इसे पसंद करे या नहीं, संदेश यह है कि हमें वास्तव में इस तथ्य की उतनी परवाह नहीं है कि भारत की मानवाधिकार स्थिति बिगड़ रही है।”

ब्रीफिंग में एमनेस्टी इंटरनेशनल (यूएसए) की एशिया एडवोकेसी निदेशक कैरोलिन नैश ने कहा कि प्रस्तावित हथियार सौदे पर मोदी सरकार की अंतरराष्ट्रीय दमन में संलिप्तता के मद्देनजर भी विचार किया जाना चाहिए, जिसमें न्यूयार्क में रहने वाले एक अमेरिकी सिख की हत्या का हालिया प्रयास भी शामिल है।

नैश ने कहा, “वह मामला हवा में नहीं घटित हुआ। यह घरेलू मुद्दों से उभरा; कानूनों के दुरुपयोग से, विशेष रूप से कथित आतंकवाद विरोधी और वित्तीय कानूनों से; जातीय और धार्मिक हिंसा और लक्ष्यीकरण के लंबे इतिहास से; और निगरानी प्रणालियों के दुरुपयोग से जिसने ऐसा होने की अनुमति दी।”

हिंदूज़ फ़ॉर ह्यूमन राइट्स की नीति निदेशक रिया चक्रवर्ती ने कहा कि “भारत में हिंसा के बारे में ऐसे सोचें जैसे कि आप दक्षिण अमेरिकी राज्यों में अश्वेतों से कानूनी भेदभाव के जिम क्रो मामले की बात कर रहे हों।” उन्होंने कहा, “सांप्रदायिक हिंसा, सरकार और स्थानीय अधिकारियों के दुरुपयोग में राज्य की सक्रिय भागीदारी का सिरा संघीय स्तर तक जाता है।”

चक्रवर्ती ने कहा, “यह सारी हिंसा, मानवाधिकारों पर ये सभी हमले बुनियादी रूप से भारत को एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य से एक हिंदू राष्ट्र में बदलने के बारे में हैं। भाजपा का चुनावी संदेश यह है कि मोदी ने…इस हिंदू राज्य को विश्व मंच पर पहुंचा दिया है। और यह हथियार सौदा इस बात का अच्छा उदाहरण है कि उन्होंने ऐसा कैसे किया है।”

सिक्योरिटी असिस्टेंस मॉनिटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी के डायरेक्टर अरी टोलनी ने कहा, “राष्ट्रपति क्लिंटन ने एक बार भारत पाकिस्तान सीमा को पृथ्वी पर सबसे खतरनाक जगह के रूप में संदर्भित किया था, क्योंकि यह एकमात्र जगह है जहाँ तीन परमाणु हथियार सम्पन्न देश हैं, जो पहले एक दूसरे से लड़ चुके हैं और अब एक दूसरे की सीमा पर हैं। उन्होंने कहा “उस चिंता को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के लिए ज़रूरी है कि वह भारत को हथियारों की बिक्री पर नजर रखे।”

ब्रीफिंग का सह-आयोजन इंडियन अमेरिकन मुस्लिम कांग्रेस, हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स, दलित सॉलिडेरिटी फोरम, न्यूयॉर्क स्टेट काउंसिल ऑफ चर्च, वर्ल्ड विदाउट जेनोसाइड, जस्टिस फॉर ऑल, फेडरेशन ऑफ इंडियन अमेरिकन क्रिश्चियन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका, इंडिया सिविल वॉच इंटरनेशनल, सेंटर फॉर प्लूरलिज़्म, अंतरराष्ट्रीय दलित अधिकार आयोग, अमेरिकी मुस्लिम संस्थान, इंटरनेशनल सोसायटी फार पीस एंड जस्टिस, नॉर्थ अमेरिकन मणिपुर ट्राइबल एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ इंडियन मुस्लिम्स ऑफ अमेरिका, पेरियार अंबेडकर थॉट्स सर्कल ऑस्ट्रेलिया, और अलायंस अगेंस्ट इस्लामोफोबिया द्वारा किया गया था।


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