झारखंडः सीआरपीएफ़ कैम्प के लिए ज़मीन नहीं देने पर अड़े आदिवासी

‘गांव में सीआरपीएफ कैम्प बनने से गांव के लोगों व आदिवासी धर्म-संस्कृति की शांति भंग होती है, इसलिए हम गांव में सीआरपीएफ कैम्प नहीं बनने देंगे।’- यह कहना है झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिला के नोवामुंडी प्रखंड के जेटेया थानान्तर्गत पोखरपी पंचायत के जोजो कुबीर गांव के ग्रामीण आदिवासियों का, जो 25 अगस्त को अपने गांव के मुंडा लक्ष्मण लागुरी की अध्यक्षता में आयोजित ग्रामसभा में जुटे थे। ग्रामसभा स्थल पर बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरूष जमा हुए थे। ये लोग प्रस्तावित सीआरपीएफ कैम्प के विरोध में नारेबाजी करते हुए ग्रामसभा स्थल तक पहुंचे थे।

दरअसल, जोजो कुबीर गांव के मुंडा (परंपरागत ग्राम प्रधान) लक्ष्मण लागुरी को नोवामुंडी अंचल अधिकारी का एक पत्र आदेशस्वरूप प्राप्त हुआ था, जिसमें 27 अगस्त को दिन के 11 बजे उत्क्रमित मध्य विद्यालय जोजो कुबीर में ग्रामसभा कराने का आदेश था। अंचल अधिकारी द्वारा ग्रामसभा कराने की सूचना के बाद मुंडा लक्ष्मण लागुरी ने 25 अगस्त को ही अपने गांव के साथ-साथ आसपास के कई गांवों के आदिवासियों को बुलाकर ग्रामसभा किया।

इस ग्राम सभा में जाजो कुबीर गांव के मुंडा ने बताया कि जोजो कुबीर गांव के निकट झारखंड सरकार के अनाबाद (आबादी विहीन क्षेत्र) जमीन के खाता संख्या-2, प्लॉट संख्या-108/276 की कुल रकबा 5 एकड़ जमीन पर सीआरपीएफ कैम्प भवन निर्माण का प्रस्ताव है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर 27 अगस्त को ग्रामसभा के लिए समय निर्धारित की गयी है।

इस पर आपत्ति जताते हुए ग्रामीणों ने एक स्वर में प्रस्तावित सीआपीएफ कैम्प का विरोध किया। ग्रामीणों का कहना था कि इस पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर गरीब आदिवासी हैं। उनके पास खेती करने लायक इतने जमीन भी नहीं हैं कि वह सालभर गुजारा कर सके। झारखंड सरकार के ऐसे अनाबाद परती जमीन को गरीबों के बीच बांटने का प्रावधान है। मुंडा जरूरतमंद लोगों को परती जमीन उपलब्ध करा सकता है।

अंततः 25 अगस्त के ग्रामसभा में ग्रामीणों की सहमति बनी कि यहां सीआरपीएफ कैम्प नहीं बनने दिया जाएगा। ग्रामसभा में डाकुआ उमेश लागुरी ने कहा कि 27 अगस्त को होनेवाले प्रशासनिक ग्रामसभा का ग्रामीण बहिष्कार करेंगे और किसी भी कीमत पर सीआरपीएफ कैम्प लगने नहीं दिया जाएगा। 25 अगस्त की ग्रामसभा ने निर्णय लिया कि कल फिर ग्रामसभा करेंगे।

26 अगस्त को फिर ग्रामसभा हुई, जिसमें सीआपीएफ कैम्प के लिए जमीन लेने के लिए 27 अगस्त को प्रस्तावित प्रशासनिक ग्रामसभा को स्थगित करने की मांग से संबंधित एक आवेदन बनाकर सभी का हस्ताक्षर करवाया गया और उस आवेदन को पश्चिमी सिंहभूम जिला के डीसी को सौंपने का निर्णय लिया गया। साथ ही उस आवेदन की प्रतिलिपि चाईबासा अधीक्षक, जगन्नाथपुर एसडीओ, जेटेया थाना प्रभारी व नोवामुंडी अंचलाधिकारी को भी सौंपने का निर्णय लिया गया। इसके साथ-साथ ग्रामीणों से 27 अगस्त के प्रशासनिक ग्रामसभा का बहिष्कार करने की अपील की गई।

प्रस्तावित सीआरपीएफ कैम्प के खिलाफ ग्रामीण मुंडा की सक्रियता और आदिवासियों की एकजुटता का परिणाम 27 अगस्त को स्पष्ट तौर पर दिखायी दिया। 27 अगस्त को जब नोवामुंडी अंचल कार्यालय से अधिकारी-कर्मचारी सीआरपीएफ कैम्प निर्माण की प्रस्तावित जमीन को लेकर लोगों से सहमति लेने के लिए ग्रामसभा करने जाजो कुबीर पहुंचे, तो ग्रामीणों ने एकजुट होकर ग्रामसभा का बहिष्कार कर दिया। फलस्वरूप, पहले तो अधिकारियों ने ग्रामीण मुंडा और ग्रामीणों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वे असफल रहे और उन्हें बिना ग्रामसभा किये गांव से लौटना पड़ा।

आदिवासियों की एकजुटता ने सीआरपीएफ कैम्प के लिए जमीन लेने के लिए आयोजित ग्रामसभा को तो नहीं होने दिया, लेकिन देखना होगा कि वे सीआरपीएफ कैम्प के निर्माण को कब तक रोक पाएंगे!

 

लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।

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