सरकार कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक रोकने को तैयार, किसान 22 को देंगे जवाब!

मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के 56वें दिन सरकार का रुख थोड़ा नरम दिखा। किसानों के साथ 10वें दौर की बातचीत में  केंद्र सरकार ने किसानों के सामने प्रस्ताव रखा कि वह एक विशेष समिति गठित करने को तैयार है जो तीनों नए कानूनों के साथ-साथ किसानों की अन्य मांगों पर विचार करेगी। सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा कि जब तक समिति समीक्षा पूरा नहीं कर लेती, सरकार तीनों नए कानूनों को  साल-डेढ़ साल तक स्थगित रख सकती है। सरकार के इस प्रस्ताव पर किसान संगठन ने कहा कि वो अपनी बैठक करने के बाद इस पर फैसला करेंगे।

‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने सरकार से वार्ता के बाद बयान जारी कर कहा है कि आज सरकार के साथ मीटिंग में अहम वार्ता हुई। सरकार ने किसानों के समक्ष एक प्रपोजल रखा कि एक साल या ज्यादा समय के लिए कृषि कानूनों को सस्पेंड कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दे दिया जाएगा। किसानों ने रिपील की मांग पर ज़ोर दिया और अगली बैठक तक विचार विमर्श कर निर्णय लेने की बात कही। MSP के मुद्दे पर सरकार ने कमेटी की पेशकश की परंतु किसानों ने इसे अस्वीकार किया। इस पर 22 जनवरी की अगली मीटिंग में विस्तारपूर्वक चर्चा होगी।

आज की मीटिंग में सरकार द्वारा NIA जांच और गिरफ्तारियों पर भी चर्चा हुई और सरकार ने NIA को नाजायज केस न करने के निर्देश देने का भरोसा दिया।

‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि आज दशमेश गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश गुरपुरब है। आज दुनियाभर में 11 बजे से 1 बजे तक “देह सिवा बरु मोहे” शब्द उच्चारण करते हुए इस आंदोलन की कामयाबी का प्रण लिया गया।

26 जनवरी की किसान परेड से संबधी दिल्ली, हरियाणा और उत्तरप्रदेश पुलिस से बैठक हुई जिसमें किसान ने आउटर रिंग रोड पर परेड करने की मांग पर अडिग रहे वहीं पुलिस ने दूसरे रास्ते देने का और परेड ना करने का आह्वान किया। इसके बारे में कल भी एक बैठक होगी।

‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि इस राष्ट्रव्यापी और जनांदोलन में देशभर से किसान दिल्ली बोर्डर्स पर पहुंच रहे है। उत्तराखंड के लखीमपुर और बिजनौर से हज़ारों की संख्या में ट्रैक्टर दिल्ली पहुंचने वाले है।

मध्यप्रदेश के रीवा, ग्वालियर, मुलताई समेत कई जगहों पर किसानों के पक्के मोर्चे लगे हुए है। अलग अलग जगह पर प्रशासन को ज्ञापन दिए जा रहे है। महिला किसान दिवस भी पूरी ऊर्जा और उत्साह से मनाया गया। अब किसान गाँव गाँव जाकर जागरूक कर रहे है और आगामी कार्यक्रमो की रूपरेखा तैयार कर रहे है। मध्यप्रदेश के ही बिलवानी में एक विशाल ट्रैक्टर मार्च निकाला गया।

नवनिर्माण संगठन की ओडिशा से दिल्ली की यात्रा में लोगो के मिल रहे समर्थन को देखकर उतर प्रदेश सरकार ने परेशान किया और रुट भी बदला गया। इसके विरोध में यात्रा के सयोंजक 26 जनवरी तक उपवास रखेंगे।

पंजाब व हरियाणा में जनांदोलन व्यापक रूप ले रहा है। न सिर्फ किसान-मजदूर बल्कि समाज के हर वर्ग से लोग इस आंदोलन में भागीदारी दिखा रहे है। उत्तरी राजस्थान मे रोजाना ट्रैक्टर मार्च, बाइक रैली और धरना प्रदर्शन कर किसान दिल्ली बोर्डर्स पर आने की तैयारी कर रहे है।

‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि इस आंदोलन में अब तक 138 किसान शहीद हो चुके है। ‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ की समूची लीडरशिप इन शहीदों को श्रंद्धाजलि अर्पित करती है। हम सभी भरोसा देते है कि इन किसानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। हम शहीदों के परिवारों को उचित क्षतिपूर्ति की मांग करते है।

NAPM के नेतृत्व में किसान ज्योति यात्रा उदयपुर पर कर चुकी है। महाराष्ट्र के यवतमाल से विधवा किसान या आत्महत्या कर चुके किसान के परिवार के सदस्य दिल्ली के किसान आंदोलन में अपनी भागीदारी देने के लिए आ रहे है। कोलकाता में अन्नदातार साथे बांग्ला के नाम से चल रहे पक्के मोर्चे में आज एक विशाल रैली आयोजित की गई।

बिहार में लगातार किसान आंदोलन कर रहे है। सरकार जिस तरह से इस आंदोलन को एक खास तबके से जोड़ कर पेश कर रही है, बिहार के किसानो ने इस तर्क का जवाब भी अपने संघर्ष से दिया है। बिहार में एक तरफ किसान गावों और जिला हेडक्वॉर्टर पर प्रदर्शन हो रहे है वहीं पटना में AIPF ने विरोध प्रदर्शन किया।


‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ की ओर से डॉ दर्शन पाल द्वारा जारी

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