चुनाव चर्चा: ‘क़ातिल’ चुनाव आयोग पर मद्रास हाईकोर्ट की सख़्ती के मायने

“निर्वाचन आयोग के अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए क्योंकि कोरोना कोविड की दूसरी मारक लहर के लिए वही जिम्मेदार हैं”- यह बात मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को जब कही तब बंगाल विधानसभा चुनाव के लिये कुल आठ में से सातवें चक्र की वोटिग चल रही थी. सम्भव है, निर्वाचन आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार भी मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की शरण ले.

आयोग ने काउंटिंग के दिन कोविड 19 सुरक्षा मानक का पालन सुनिश्चित करने के लिए समुचित ब्ल्यूप्रिंट उपलब्ध नहीं कराया तो अदालत मतगणना पर रोक लगा देगी. कोर्ट ने मामले की अपनी अगली सुनवाई 30 अप्रैल को तय करते हुए निर्देश दिया कि तब तक अदालत में ब्ल्यूप्रिंट दाखिल कर दिया जाये।

मद्रास हाई कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को कड़ी फटकार लगा कर कहा कि भारत में कोविड-19 की दूसरी जानलेवा लहर के लिये जिम्मेवार संस्था एकमात्र रूप से निर्वाचन आयोग है. आयोग ने पाँच विधान सभाओं के चुनाव में रैलियो के आयोजन की अनुमति ऐसे दे दी, जैसे स्थिति सामान्य हो. इनमें कोविड 19 सुरक्षा मानक का पालन नही किया गया. याचिका तमिलनाडु के परिवहन मंत्री विजय भास्कर ने दाखिल की है जो करूर से चुनाव प्रत्याशी हैं. उस सीट पर 77 उम्मीदवार हैं.

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस सेंथीकुमार राममूर्ति की पीठ ने करूर विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में वोटिंग के दिन कोविड-19 सुरक्षा मानक का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश देने के लिये दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिये. हाईकोर्ट के अनुसार इन रैलियो के आयोजन में अदालत के आदेशो का उल्लंघन करने वाली सियासी पार्टियो के खिलाफ आयोग ने कोई कार्र्वाई नहीं की. कोर्ट ने बहुत ही तल्ख़ लहजे में कहा : “निर्वाचन आयोग पर शायद हत्या का अभियोग लगाया जाना चाहिये.”

जब हाईकोर्ट में आयोग के स्थायी वकील निरंजन राज गोपालन ने कहा कि काउंटिंग के दौरान कोविड-19 सुरक्षा मानक का पालन सुनिश्चित करने के उपाय किये गए तो चीफ जस्टिस ने कहा : “क्या आप दूसरे उपग्रह पर थे जब सियासी रैलियाँ की जा रही थीं?”

कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि सियासत हो या नहीं हो, महामारी का और अधिक प्रसार काउंटिंग से किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जा सकता है. चाहे वो कई चरण में की जाये या फिर टाल ही क्यो न दी जाये.सार्वजनिक स्वास्थ्य सर्वोपरि है. तकलीफ की बात है कि इसका ध्यान सांविधानिक अधिकरियों को दिलाना पडता है. नागरिक बचेंगे तभी वे इस लोकतांत्रिक गणराज्य से मिले दूसरे अधिकारो का उपयोग कर सकेंगे. मौजूदा स्थिति अभी बचने के उपाय की है. यह जरुरत और तमाम बातो पर भारी है.

खबर है केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि कोविड 19 की दूसरी लहर के कारण चुनाव नहीं हैं. मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के अगले दिन यानि आज निर्वाचन आयोग ने काउंटिंग और उस के बाद भी निर्वाचित घोषित प्रत्यशियों के विजय जूलूस पर प्रतिबंध लगा दिया. इन चुनावो के लिये वोटिंग 27 मार्च को शुरु हुई थी और 29 अप्रैल को खत्म होगी.

निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के अनुसार बंगाल में 7 वे चरण में 34 सीटों के 11376 बूथो पर वोटिंग में 26 अप्रैल को शांति से 75.06 फीसद मतदान हुआ. सोमवार तक के सिर्फ़ छह दिन में भारत में कोविड के 3 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए और 2771 लोगो की मौत हो गई. कुल संक्रमित लोग 1.76 करोड़ हैं और मरने वालो की तादाद 1,97,894 हो गई.

चुनाव चर्चा के 20 अप्रैल 2021 के पिछले ही अंक में हमने ‘कोविड महामारी से मौत के बीच चुनावों की बहार के मायने’ शीर्षक आलेख में इंगित किया था कि भारत में बरस भर से इसका कहर हरिद्वार कुम्भ मेला में अनुमानित करीब एक करोड़ लोगो के गंगा स्नान के धार्मिक पुण्य से ही नहीं चुनावी रैलियों से पूरे देश में बेतहाशा बढ गया है. निर्वाचन आयोग इससे बेखबर नहीं था और इसलिये उसने बंगाल चुनाव के अंतिम तीन दौर की वोटिंग के पहले सभी सियासी दलो की बैठक बुलाई. लेकिन उसने शेष तीनो चरण की वोटिंग एक ही साथ कराने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद मोदी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भाजपा के सिवा लगभग सभी दलो का साझा सुझाव को नामंजूर कर दिया. आयोग ने भाजपा के सुर में सुर मिलाकर असम, केरल , तमिलनाडु और पुडीचेरी के साथ ही बंगाल के जारी चुनाव का पूर्व घोषित कार्यक्रम ही यथावत रखने का निर्णय किया.

निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने इस पद से रिटायर होने के पहले आंध्र प्रदेश की तिरुपति (अनुसूचित जाति) और कर्नाटक के बेलगाम की रिक्त दो लोकसभा सीट और विभिन्न राज्यो की 14 विधान सभा सीटों पर उपचुनाव कराने का कार्यक्रम 16 मार्च को ही घोषित कर दिया था. तेरह अप्रैल को रिटायर हुए अरोड़ा जी के गोवा के गवर्नर नियुक्त किये जाने के कयास हैं. उनके रिटायर हो जाने के बाद इन सभी सीटो पर वोटिंग 17 अपैल को हो चुकी है. काउंटिंग पांच विधान सभा के चुनाव के लिये पहले से घोषित तारीख दो मई को ही होगी.

असम की 126 सीट की मौजूदा विधान सभा का कार्यकाल 31 मई को ख़त्म होगा. अन्य विधानसभाओं में से 294 सीट के बंगाल का 30 मई को, 140 सीट के केरल का एक जून को, 234 सीट के तमिलनाडु का 24 मई को समाप्त होगा. केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की नौ जून 2016 को निर्वाचित 30 सीट की पिछली विधान सभा का कर्यकाल इस बरस 8 जून तक था. उसे पहले ही भंग कर पुडुचेरी में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा चुका है.

 

उपचुनाव

विधानसभा उपचुनाव में गुजरात की मोर्वा हदफ (अनुसूचित जनजाति ), झारखंड की मधुपुर, कर्नाटक की बस्वा कल्याण और मस्की सीट (अनुसूचित जनजाति), मध्य प्रदेश की दमोह, महाराष्ट्र की पंढरपुर, मिजोरम की सरछिप, नगालैंड की नोकसेन,उड़ीसा की पिपली, उत्तराखंड की सैत, तेलंगाना की नागार्जुन सागर तथा राजस्थान की सहारा, सुजानगढ (अनुसूचित जाति) और राजसमंद की तीन सीटे भी शामिल हैं.

मद्रास हाईकोर्ट ने निरंकुश हो चुके निर्वाचन आयोग पर कुछ अंकुश तो लगाया है. पर देखना है कि आयोग इस आदेश की पूरी तरह तामील करता है या फिर उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शरण लेता है. अव्वल सवाल है कि चुनाव के लगभग आखिर में निर्वाचन आयोग पर लगे अंकुश से महामारी का क़हर कैसे कितना जल्द कम होता है.

 

*मीडिया हल्कों में सीपी के नाम से मशहूर चंद्र प्रकाश झा 40 बरस से पत्रकारिता में हैं और 12 राज्यों से चुनावी खबरें, रिपोर्ट, विश्लेषण के साथ-साथ महत्वपूर्ण तस्वीरें भी जनता के सामने लाने का अनुभव रखते हैं। 

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