पहला पन्ना: ‘सख्त और ईमानदार’ सरकार की पूरी ‘कोशिश’ के बाद भी हेरोइन का धंधा जारी!

आज टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने पर छपी एक खबर के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली में 354 किलो हेरोइन बरामद हुई है। यह खबर इतनी प्रमुखता से किसी और अखबार में नहीं है। वैसे तो टाइम्स में यह राजशेखर झा की बाईलाइन वाली खबर है और टॉप पर छपी है लेकिन आजकल जो हालत है उसमें यह खबर पुलिस ने अखबार वालों को बांटी नहीं होगी और यह एक्सक्लूसिव खबर ही है तो भी मामला सोचने वाला है। पुलिस अपनी इतनी बड़ी कामयाबी का प्रचार क्यों नहीं कर रही है और अगर कर रही है तो बाकी अखबारों ने पहले पन्ने पर क्यों नहीं छापा? मुझे लगता है कि भ्रष्टाचार दूर करने और आतंकवाद खत्म करने जैसे वायदों और हवा-हवाई दावों के बीच नोटबंदी जैसे क्रांतिकारी उपाय के बावजूद हेरोइन की इतनी बड़ी खेप मिलना तमाम उपलब्धियों की पोल खोलता है और कानून व्यवस्था की हालत का सच तो है ही। इसलिए पुलिस ने यह खबर नहीं दी या अखबारों ने नहीं छापी बात एक ही है। मुद्दा यह है कि राजधानी में इतना बड़ा स्टॉक किस भरोसे है या कितने समय में कैसे इकट्ठा किया गया होगा। कहने को तो पुलिस इसे अपनी कामयाबी भी बता सकती है पर इतनी बड़ी खेप की मौजूदगी का मतलब है कि काफी समय से धंधा ठीक चल रहा होगा तभी इतनी बड़ी खेप आई या इकट्ठी हुई या कहीं भेजी जा रही थी। कहने का मतलब है कि 2500 करोड़ रुपए का माल भेजने का जोखिम कोई यूं ही नहीं लेगा। उसे भी कुछ भरोसा होगा, आश्वासन होगा। वह कैसे है, क्यों है? और है तो सरकारी दावों का क्या कहा जाए

 

2019 में भी पकड़ी गई थी हेरोइन 

abplive.com की खबर के अनुसार स्पेशल सेल के सीपी नीरज ठाकुर ने बताया कि 2019 में सेल ने एक बड़ा ऑपरेशन किया था उस समय 330 किलो हेरोइन बरामद की गई थी। पुलिस ने कहा है कि दो साल बाद इसी ऑपरेशन को आगे बढ़ाते हुए ये लीड मिली। लेकिन मुद्दा यह है कि दो साल पुलिस क्या कर रही थी और क्या यह मान लिया जाए कि दो साल सब ठीक था अब अचानक शुरू हुआ है। अगर ऐसा है तो इसका कोई कारण होगा। उसकी भी जांच-पड़ताल होनी चाहिए। और अगर धंधा चल रहा था तो क्या कहा जाए। पर चल रहा था इसे कौन स्वीकार करेगा और अभी अचानक शुरू हुआ होगा इसे क्यों मान लिया जाए। दिलचस्प यह है कि इस मामले में पंजाब के गुरप्रीत सिंह और गुरजोत सिंह का नाम आया। दोनों डबल इंजन वाले राज्य हरियाणा के फरीदाबाद में किराए के मकान से ड्रग रैकेट चला रहे थे। पंजाब का मामला तो सबको पता ही है। फरीदाबाद के सेक्टर-65 में गुरप्रीत सिंह और गुरजोत सिंह के ठिकानों पर छापेमारी कर माल बरामद किया गया। अब इसमें सवाल यह है कि पंजाब में नशे का खेल सबको पता है, तार वहां से भी जुड़े हो सकते हैं। फिर सवाल है कि 2019 से 2021 तक पंजाब में शांति रही या राष्ट्रीय स्तर पर सबकुछ चलता रहा। कहने की जरूरत नहीं है कि यह बरामदगी सबसे बड़ी है। पुलिस को शक है कि इस ड्रग सिंडिकेट के तार पाकिस्तान से भी जुड़े हो सकते है। सवाल है कि पुलिस की सख्ती के बावजूद यह सब कैसे संभव है

 

मेहुल चोकसी का मामला 

आज की एक और दिलचस्प खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में अधपन्ने पर है। इसके अनुसार मेहुल चोकसी, पिछले दिनों उसका मामला चर्चा में था और भगोड़े को वापस लाने के लिए जेट भेजा गया था और इसका यहां खूब प्रचार हुआ था, ने डोमिनिका हाईकोर्ट में शपथपूर्वक कहा है कि डोमिनिका और भारत ने मिलकर उसके खिलाफ कार्रवाई की। आपको याद होगा कि चोकसी को एंटिगुआ की नागरिकता मिल गई है और उस समय वह वहां से गायब हो गया था। अब उसने बताया है कि 25 मई को सीबीआई ने डोमिनिका के अधिकारियों को पत्र लिखकर उसके प्रत्यर्पण की मांग की। चोकसी ने कहा है कि उसके डोमिनिका में होने की जानकारी भारत को जिस तेजी से मिली उससे लगता है कि दोनों सरकारों में कुछ मिलीभगत थी। हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि इस संबंध में सीबीआई के संबंधित अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई पर उन्होंने जबाव नहीं दिया। वैसे भी, ऐसे मामले में भारत सरकार को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। इतनी जल्दी और फुर्ती दिखाने की क्या जरूरत है और अगर है तो उसका मकसद कौन नहीं समझता है। फिर भी, जो अखबार जेट भेजे जाने का प्रचार कर रहे थे। क्या उन्हें यह खबर प्रमुखता से नहीं छापना चाहिए? आज यह खबर टाइम्स ऑफ इंडिया और इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर नहीं है।  

 

मुख्यमंत्री ने घोषित किए चुनाव परिणाम 

द टेलीग्राफ की आज की लीड है, राज्य चुनाव आयोग ने नहीं, योगी ने चुनाव परिणाम घोषित किए। इस खबर के अनुसार हिंसा से भरे चुनाव में भाजपा ने सूपड़ा साफ कर दिया। करीब दो घंटे बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इस जीत पर योगी को बधाई ट्वीट कर दी लेकिन राज्य चुनाव आयोग ने नतीजे तब भी घोषित नहीं किए थे। खबर के अनुसार राज्य के चुनाव आयुक्त मनोज कुमार ने कहा कि 825 ब्लॉक प्रमुख की सीटों में से सिर्फ 476 के लिए चुनाव हुए और बाकी के 349 या 42 प्रतिशत पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए। आदित्यनाथ ने कहा कि इन 349 विजेताओं में से 334 उनकी पार्टी के हैं। इस दावे के साथ चुनाव में हिंसा और विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन नहीं करने देने की भी खबरें हैं। इनमें महिला उम्मदीवार भी हैं और उनकी साड़ी खींचने, फाड़ने और चूड़ियां तोड़ने की भी खबरें भी। यह सब चुनाव अधिकारियों और पुलिस के समक्ष हुआ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे भाजपा का नंगा नाच कहा है और कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने डर जताया है कि यह आगामी विधानसभा चुनावों का ट्रेलर है जिसे जीतने के लिए भाजपा परेशान है। उन्होंने कहा, अपहरण, धमकी, ब्लैकमेल, हिंसा, महिलाओं पर हमला …. पिस्तौल और बम के साथ गुंडो की मनमानी — भाजपा अगर स्थानीय चुनावों में इस हद तक जा सकती है तो विधानसभा चुनाव में क्या करेगी

अखबार ने लिखा है, आदित्यनाथ ने 6.24 मिनट पर प्रेस कांफ्रेंस कर जीत की घोषणा की और यह कहने में कोई संकोच नहीं किया कि यह लोकतंत्र की जीत है। लोगों ने जातिवाद, सांप्रदायिकता और पेशेवर अपराधियों के खिलाफ वोट दिया है। अब सत्य चाहे जो हो, इतनी बड़ी खबर उत्तर प्रदेश से लगे दिल्ली के अखबारों में उतनी प्रमुखता से नहीं है। प्रधानमंत्री के शब्दों में कहें तो उत्तर प्रदेश में तीन इंजन की सरकार बन गई है उसकी खुशी भी अखबारों में नहीं दिखती है। शनिवार, 10 जुलाई को मैंने यह कॉलम नहीं लिखा था पर द टेलीग्राफ में एक खबर पहले पन्ने पर थी जो दिल्ली में नहीं थी। शीर्षक है, “ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में साड़ी खींचने के आरोप में भाजपा के लखीमपुरखीरी जिला प्रमुख यश वर्मा को गिरफ्तार किया गया है।” सत्तारूढ़ पार्टी के जिलध्यक्ष अगर ऐसे आरोप में गिरफ्तार हो गए हैं तो न आरोप को कम करके आंका जा सकता है और न जिलाध्यक्ष की कार्रवाई को। फिर भी इस खबर को उतनी प्रमुखता नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए। इंडियन एक्सप्रेस में चुनावी हिंसा से संबंधित खबरें पहले पन्ने पर तो हैं ही शीर्षक में यह भी बताया गया है कि इटावा के एएसपी ने कहा कि भाजपा नेता ने उन्हें थप्पड़ मारा और बम लेकर आए थे। पुलिस ने कहा कि वह इस की जांच कर रही है।

 

सुप्रीम कोर्ट के जज का वेतन 

टाइम्स ऑफ इंडिया में आज एक खबर है, जो बताती है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज को दो घंटों के लिए इतना पैसा दिया जा सकता है जितना नौकरी के दौरान एक महीने में मिलता है। सिर्फ सलाह देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज को 5-10 लाख मिलते हैं जबकि रिटायर मुख्य न्यायाधीश को 10 से 20 लाख रुपए मिलते हैं। यह सलाह की स्थिति है अगर आप मुकदमा दायर करना चाहें तो वरिष्ठ वकील को मामले में बहस के लिए एक से 5 लाख रुपए मिलते हैं जबकि मध्यस्थ के रूप में काम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज को दो घंटे काम करने के दो से पांच लाख मिलते हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट में न्याय पाना आम लोगों के बूते का नहीं रह गया है और इसपर खबरें तो नहीं के बराबर होती हैं। आम आदमी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की बात करूं तो टाइम्स ऑफ इंडिया में ही खबर है कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आगरा जेल में बंद 13 कैदियों को रिहा किया जाए क्योंकि अपराध के समय वे बच्चे थे। फिर भी उन्हें 14 से 20 साल तक जेल में रहना पड़ा जबकि बच्चों के मामले में अधिकतम सजा इससे बहुत कम है। बच्चों को कोई मुआवजा मिलना तो छोड़िए आदेश के 48 घंटे बाद भी उन्हें जेल से छोड़ा नहीं गया है।

 

कुछ अन्य प्रमुख खबरें जो दूसरे अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं दिखीं 

 

द हिन्दू 

  1. इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च पहली तिमाही में काफी कम हुआ। 
  2. उत्तर प्रदेश पैनल बच्चों के नियम से संबंधित योजना तैयार कर रहा है 
  3. देश भर के फूल वाले पौधों में 27 प्रतिशत सिक्किम के हैं 
  4. असम के गौ संरक्षण विधेयक पर मेघालय ने चिन्ता जताई 

 

इंडियन एक्सप्रेस 

  1. पर्यटन स्थलों पर भीड़ के मद्देनजर शुरुआती चेतावनी : कोविड के मामलों में कमी के मामले कम हुए। इस खबर में एक आर मूल्य की चर्चा है जो इस खबर के अनुसार बढ़ रहा है। मोटे तौर पर इसका मतलब है कि संक्रमण कम होने की सूरत में पिछली बार अगर 100 संक्रमित लोग 78 लोगों को संक्रमित कर रहे थे तो वह अभी 88 है। इसका मतलब संक्रमण कम हो गया है यह मानना गलत है। 
  2. केंद्र ने आठ पर्यटक राज्यों को सतर्क किया। वैसे तो यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में भी है और बड़ी भी है। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस में उसका कारण बताया गया है जबकि हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर से लग रहा है कि पर्यटक स्थलों पर भीड़भाड़ कम रखने की सामान्य सलाह है। 

 

टाइम्स ऑफ इंडिया 

  1. असम में देसी आस्था और संस्कृति का एक नया विभाग 
  2. कांवड़ यात्रा पर निर्णय दूसरे राज्यों से बात करने के बाद 
  3. कई बार गच्चा खाने के बाद मौसम विभाग ने कहा मानसून आज आएगा। यह खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में लीड है और तेज धूप से लगता नहीं है कि मानसून तो छोड़िए बादल भी घिरेंगे। 

 

द टेलीग्राफ 

  1. उमर खालिद की गिरफ्तारी के तीन सौ दिन पूरे होने पर हैशटैग उमर खालिद को रिहा करो। इसके मुकाबले रामभक्त गोपाल पर कार्रवाई नहीं होने और उसकी हाल की उसकी धमकियों की चर्चा की गई है। 
  2. कुत्तों के प्रति क्रूरता के कारण मेनका गांधी ने अपना सेंटर बंद किया। इसमें केरल में एक हथनी की मौत पर शुरू किए गए मेनका गांधी के हंगामे को भी याद किया गया है।   
  3. एलगार परिषद-भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार सभी लोगों को रिहा करने की प्रार्थना करने की अपील। यह अपील इस शर्त के साथ है कि सरकार निर्णायक तौर पर अपराध साबित करे या अभियुक्तों को तत्काल रिहा करे।   

  

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध अनुवादक हैं।

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