आँखें खोलने वाली रपटों के लिए चर्चित नेहा दीक्षित को चमेली देवी जैन सम्मान !

चर्चित युवा पत्रकार नेहा दीक्षित को वर्ष 2016 के ‘चमेली देवी जैन सम्मान’ के लिए चुना गया है। स्वतंत्रता सेनानी चमेली देवी जैन की स्मृति में स्थापित यह  अपनी तरह का शायद अकेला सम्मान है जो पिछले 37 सालों से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाली महिला पत्रकारों को प्रदान किया जा रहा है।

नेहा दीक्षित प्रिंट और टीवी में काम करने के बाद लंबे समय से स्वतंत्र पत्रकारिता कर रही हैं। उनकी रपटें आउटलुक, कारवाँ, हिमाल, अल जज़ीरा, न्यूयॉर्क टाइम्स और तहलका जैसी पत्र-पत्रिकाओं में छपती और चर्चित होती रही हैं। ऐसे समय जब ख़बरो के नाम पर सनसनी फैलाना, मुख्यधारा पत्रकारिता की पहचान बनती जा रही है, नेहा बहुत सोच-समझकर, तथ्यों की गहरी पड़ताल के साथ सामने आती हैं। उनकी रपटें पढ़कर अंदाज़ा लग जाता  कि उन्हें तैयार करने में कितनी ऊर्जा और वक़्त लगा होगा।

नेहा के नाम की संस्त़ुति करने वाली ज्यूरी में चैतन्य कालबाग, सीमा चिश्ती और विनोद दुआ जैसे नामी पत्रकार शामिल थे। उन्होंने नेहा की प्रशंसा करते हुए कहा है कि ‘ज्यूरी इस बात से प्रभावित है कि उनकी रपटों में उनकी मेहनत झलकती है। वे घूम-घूमकर दस्तावेज़ इकट्ठा करती हैं और तथ्यों की कठोरता से जाँच करती हैं ताकि रिपोर्ट प्रामाणिक बन सके। साथ ही उनकी रिपोर्ट में एक मानवीय स्पर्श भी होता है।’

नेहा दीक्षित राजनीति के अलावा सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता के प्रश्नों पर ख़ासतौर से लिखते हुए भारतीय लोकतंत्र की ज़मीनी हक़ीक़त से हमें वाक़िफ़ कराती हैं।

नेहा दीक्षित को ‘चमेली देवी जैन सम्मान ’ 1 मार्च को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित समारोह में दिया जाएगा। इस अवसर पर बी.जी.वर्गीज़ स्मृति व्याख्यानमाला के तहत ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च’ के अध्यक्ष प्रतापभानु मेहता “ट्रुथ एंड पॉलिटिक्स ऑफ़ अवर टाइम्स” विषय पर व्याख्यान देंगे। इसके बाद एक पैनल परिचर्चा होगी जिसमें योगेंद्र यादव, अशोक मलिक, आरती जेरथ और नेहा दीक्षित भाग लेंगे।

नेहा दीक्षित ने इस सम्मान के लिए चुने जाने पर ख़ुशी जताते हुए इसे उन तमाम अनाम पत्रकारों को समर्पित किया है जो देश के विभिन्न इलाक़ों में दबाव और ख़तरों का मुक़ाबला करते हुए सच्चाई सामने लाने का ज़रूरी काम कर रहे हैं। नेहा  2016 में आई “कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स” का हवाला देते हुए बताती हैं कि 1992 से अब तक देश में 27 पत्रकारों की हत्या हुई है और पिछले 10 सालों में केवल एक मामले में सज़ा हुई है। मारे गए ज़्यादातर पत्रकार छोटे शहरों या क़स्बों में काम करते थे। यह सम्मान उन्हीं को समर्पित है।

पिछले दिनों नेहा की रिपोर्ट “ऑपरेशन बेबी लिफ़्ट” की वजह से सड़क से संसद तक हंगामा हुआ था। आउटलुक में छपी इस रिपोर्ट में उत्तर पूर्व की आदिवासी बच्चियों को पढ़ाने के नाम पर देश के दूसरे इलाकों में भेजने की, आरएसएस से जुड़े संगठनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा नेहा के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त अभियान भी चलाया गया था।

नेहा को मीडिया विजिल की बधाई और शुभकामनाएँ।

 

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