विनोद राय फिर माफी मांगेंगे या ट्रोल होते रहेंगे?

5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पूरी हुई और खबरों के मुताबिक इसके लिए सरकार को 1.5 लाख करोड़ रुपए मिले हैं। 2014 से पहले 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी हुई थी और उस समय के सीएजी विनोद राय ने बताया था किइसमें सरकार को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। यह खबर अखबारों में भी खूब छपी थी। और कांग्रेस सरकार को भ्रष्ट साबित करने में इस रिपोर्ट का महत्वपूर्ण योगदान था। इस मामले में मुकदमा हुआ और तबके मंत्री जेल भी गए। बेशक अभी मैं विस्तार में नहीं जा रहा हूं और जरूरी नहीं है कि जेल जाने का कारण यह घोटाला ही हो, या बरी हो जाने का कारण घोटाला नहीं होना ही हो। दोनों मामलों में कारण
तकनीकी हो सकता है। जिसका प्रचार नहीं किया गया हो या जो किन्हीं कारणों से प्रचार पाने से रह गया हो।

लेकिन अब जब 5जी की नीलामी में सरकार को 1.50 लाख करोड़ रुपए ही मिले हैं तो मामला समझ में नहीं आ रहा है। वर्षों पहले जब तकनीक नई थी बाजार नया था ग्राहक नहीं थे या बनने थे तब नीलामी के बाद घोटाला एक लाख 76 हजार करोड़ का था और अब कुल प्राप्ति ही डेढ़ लाख हजार करोड़ है। यानी उस समय
के मुकाबले 26 हजार करोड़ रुपए तो सीधे कम हैं। फिर भी कोई चर्चा नहीं, कोई खबर नहीं, कोई सीएजी नहीं। मैंने संबंधित खबर या स्पष्टीकरण ढूंढ़ने की बहुत कोशिश की। सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चा है लेकिन कोई आधिकारिक बयान, खबर या स्पष्टीकरण मुझे नहीं मिला। आखिर क्यों? मुझे लगता है कि एक आश्वासन तो होना चाहिए था तब कुछ और मामला था अब कुछ और है। दोनों तुलना करने योग्य नहीं हैं या जो हुआ
सब ठीक है।

सरकार या सीएजी देश को आश्वस्त करते कि कुछ गड़बड़ नहीं हुआ है या तब भी नहीं हुआ था। आप जानते ही हैं कि सभी अभियुक्त अदालत से बरी हो गए थे। कुल मिलाकर, मैं देख रहा हूं कि 2जी घोटाला एक लाख 76 हजार करोड़ का था और 5जी नीलामी डेढ़ लाख करोड़ में ही पूरी हो गई पर घोटाले या गड़बड़ी की कोई चर्चा नहीं है। हालांकि, यह नीलामी बिल्कुल ठीक है इसका कोई आश्वासन भी नहीं है। ऐसे में मुझे तब और अब की चर्चा जरूरी लगती है। उस समय 2जी नीलामी को घोटाला बताने वाले सीएजी विनोद राय को 2016 में पद्म भूषण मिला था। 74 साल के रिटायर आईएएस विनोद राय इस समय वाह्य अंकेक्षकों के यूएन पैनल के चैयरमैन हैं और रेलवे कायाकल्प कौंसिल के सदस्य। केंद्र में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने उन्हें बैंकिंग रीक्रूटमेंट बोर्ड का चेयरमैन बनाया था। उन्हें नए बनाए गए बैंक्स बोर्ड ब्यूरो का चैयरमैन भी बनाया गया था

विनोद राय की एक किताब भी आई थी, नॉट जस्ट एन अकाउंटैंट – द डायरी ऑफ नेशंस कंसाइंस कीपर (सिर्फ मुनीम नहीं – देश के अंतःकरण के रक्षक)। इस पुस्तक को उन्होंने अपने अभिभावकों को समर्पित किया है और लिखा है कि मां ने जमीन पर मजबूती से बने रहने के लिए हमें जड़ें दीं तो पिता ने उड़ना सिखाया। हमारी शिक्षा उनकी (मां की) एकमात्र सांसारिक संपदा थी और वे (पिता) मेरे पहले और अकेले हीरो थे। किताब में और वैसे टेलीविजन पर लगाए गए एक आरोप के लिए कांग्रेस सांसद ने उनपर मानहानि का दावा किया था और इसके लिए उन्होंने संजय निरुपम से माफी मांगी थी। खबरों के अनुसार राय ने संजय निरुपम को उनसांसदों में एक बताया था जिन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर कैग की रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का नाम न देने के लिए राय पर दबाव बनाया था।

निरुपम ने इसपर कहा था कि राय को 2जी और कोल ब्लॉक आवंटन से संबंधित अपनी सभी फर्जी रिपोर्ट के लिए देश से भी माफी मांगनी चाहिए। अदालत में दायर एक हलफनामे में राय ने कहा था कि उन्होंने अनजाने में और गलत तरीके से निरुपम के नाम का उल्लेख किया था। पूर्व सीएजी ने यह भी कहा है कि निरुपम के
खिलाफ मैंने जो बयान दिए, जो कि टेलीविजन पर आए और प्रकाशित हुए, वह “तथ्यात्मक रूप से गलत” हैं। मुझे उम्मीद है कि संजय निरुपम मेरी इस बिना शर्त माफी पर विचार करेंगे, इसे स्वीकार करेंगे और अब इस मामले को बंद करेंगे। माफी नामे के बाद मामला बंद हो गया पर किताब तो मेरे पास पड़ी है और लोगों को
याद भी है। पप्पू यादव ने ट्वीट कर कहा था कि विनोद राय को फांसी होनी चाहिए।

कहने की जरूरत नहीं है कि भारत के पूर्व नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) रहे विनोद राय 5जी स्प्रेक्ट्र्म की नीलामी के बाद फिर चर्चा में हैं। आईएएस ऑफिसर रहे विनोद राय कैग के अलावा बीसीसीआई और कई दूसरी संस्थाओं में रहे हैं। 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के बाद विपक्ष विनोद राय का नाम लेकर मोदी सरकार पर हमलावर है। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के बारे में बाद में कहा गया था, ‘कुछ लोगों ने इस मामले में कुछ चुनिंदा तथ्‍य उठाए और अपने हिसाब से इसे घोटाला बता दे दिया।’ कुछ दिन पहले खबर थी कि विनोद राय को भारत की सबसे बड़ी जेवर कंपनियों में से एक, कल्याण जुएलर्स इंडिया लिमिटेड ने चेयरमैन और
स्वतंत्र गैर-कार्यकारी निदेशक बनाने की घोषणा की है।

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

 

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