राहुल गांधी के ख़िलाफ़ विदेशमंत्री के बयान को प्रमुखता देने वाला TOI ने कांग्रेस का पक्ष नहीं छापा!

टेलीग्राफ़ में संजय के झा की बाईलाइन वाली खबर इस प्रकार है, कांग्रेस ने मंगलवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर से पूछा, 2020 में चीनी सैनिकों से लड़ते हुए गलवान में जान गंवाने वाले 20 भारतीय सैनिकों के बलिदान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कहना कि चीन ने किसी भी तरह की घुसपैठ नहीं की है, उनके सर्वोच्च बलिदान का "आदर और सम्मान" करना है? 

 

आइए, आज ‘पिटाई’ को भी समझ लें और विदेश मंत्री चाहें तो इसे गलत बताएं 

अखबारों ने कांग्रेस के पक्ष को महत्व नहीं देकर बता दिया है कि उन्हें आलोचना की परवाह नहीं है

अखबारों की खबरों के अनुसार अरुणाचल प्रदेश में 9 दिसंबर को भारतीय सेना और चीन के पीपुलस लिब्रेशन आर्मी के बीच झड़प के संदर्भ में राहुल गांधी ने जवानों की पिटाई का जिक्र किया था। इस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारतीय जवानों की प्रत्यक्ष या परोक्ष आलोचना नहीं की जानी चाहिए। अब मुद्दा यह है कि अगर दो पक्षों के बीच झड़प हुई तो दो ही संभावना हैया तो एक ने दूसरे की पिटाई की होगी, दूसरा पिटा होगा या दूसरे ने भी कुछ हाथपांव मारे होंगे। लेकिन एक दूसरे से पर्याप्त दूरी पर रहने वाले दो पक्ष अगर बीच में आकर लड़ते हैं तो उसे झड़प कहा जा सकता है। दोनों के करीब हुए बिना झड़प संभव ही नहीं है उसे गालीबाजी, पत्थरबाजी, गोलीबाजी आदि कह सकते हैं। 

संभावना यह भी है कि एक पक्ष दूसरे के पास आए और पीटपिटा कर चला जाए। इसे झड़प कहा जा सकता है लेकिन दूसरा पक्ष अगर सुरक्षित अपने ठिकाने पर चला गया तो पीट कर ही गया। कोई पिटने नहीं आता है। आता है तो तैयारी से ही आता है और उसे रोका नहीं जा सका तो अपने उद्देश्य में कामयाब रहा। अगर वह गले लगने नहीं आया था तो पीटने ही आया था और आपने भले हाथपांव चलाया हो उसके एक भी सदस्य को पकड़ नहीं सके और वो सब सशरीर भाग गए तो पिटाई करके ही गए। यहां पिटाई का मतलब हराकर जाना भी हो सकता है। पर पिटाई शब्द का प्रयोग गलत नहीं है। मुझे नहीं पता असल में क्या हुआ था और जो हालत है उसमें अखबारों की खबरों पता चल भी नहीं सकता है। राहुल गांधी ने अगर कहा है तो उनके अपने सूत्र और स्रोत होंगे। 

विदेश मंत्री अगर कह रहे हैं कि जवानों की आलोचना नहीं करनी चाहिए तो उससे असहमत होने का कोई कारण नहीं है पर विदेश मंत्री का नहीं तो सरकार और रक्षा मंत्री का काम यह सुनिश्चित करना है कि उनकी पिटाई हो और पिटाई हुई कहकर तथाकथित आलोचना की संभावना ही नहीं बने। राहुल गांधी या काग्रेस पार्टी यही कोशिश कर रही लगती है पर मीडिया में उसे महत्व नहीं मिल रहा है। कम से कम आज कांग्रेस का पक्ष मैं जो पांच अखबार देखता हूं उनमें से तीन में पहले पन्ने पर नहीं है। अकेले हिन्दू में सिंगल कॉलम में है और टलीग्राफ में है तो होना ही था। 

विदेश मंत्री, सरकार या सत्तारूढ़ दल को अगर पिटाई शब्द के प्रयोग पर एतराज है तो बताना चाहिए कि असल में क्या हुआ और वह क्यों पिटाई नहीं है। या पिटाई है कि नही। लेकिन अगर पिटाई हुई है तो किसी को पिटाई कहने से रोककर आप जो हुआ उसे छिपा तो सकते हैं पर सेना के जवानों की और बेईज्जती कर रहे हैं। एक तो वो पिट गए और आप स्वीकार भी नहीं कर रहे हैं। आवश्यक कार्रवाई तो बहुत दूर। ऐसी स्थिति में मीडिया की हालत यह है कि वह घटना से संबंधित सरकारी पक्ष को तो तूल दे रहा है लेकिन ना सच बता रहा है ना राहुल गांधी या कांग्रेस के पक्ष को ठीक से बता रहा है। 

मुद्दा यह है कि चीन के साथ लगने वाली सीमा पर जो हो रहा है उसकी खबरें ठीक से नहीं रही हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार उसपर ठीक से आवश्यक कार्रवाई नहीं कर रही है। सरकार जो नहीं कर रही है उसे तो अखबार नहीं ही बता रहे हैं, अपने बचाव में जो कह रही है या कांग्रेस के प्रति जो आक्रामकता दिखा रही है उसे मीडिया में ज्यादा महत्व मिल रहा है और इसी क्रम में में कल (20 दिसंबर 22 को) टाइम्स ऑफ इंडिया ने जयशंकर के कहे को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया था और बॉक्स में छापा था। खबर तो सभी अखबारों में थी। दूसरी ओर, आज कांग्रेस के कहे को वो प्राथमिकता तो नहीं ही मिली है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। हिन्दू में सिंगल कॉलम की खबर है और विस्तार अंदर होने की सूचना। 

मामले को समझने के लिए हिन्दू में पहले पन्ने पर छपी खबर इस प्रकार है (अनुवाद मेरा), “चीन के साथ सीमा मामले पर सरकारी कार्रवाई की आलोचना बढ़ाते हुए कांग्रेस ने मंगलवार को पूछा कि सरकार कब चीनी आक्रमण को जायज बताना छोड़ेगी और भारत के दावों पर जोर देने की बजाय समझ में अंतर की ही चर्चा करती रहेगी। उल्लेखनीय है कि आज इस विवाद के दूसरे दिन भी अखबारों में पहले पन्ने पर रक्षा मंत्री का कोई हवाला नहीं है। इस मामले में टेलीग्राफ की खबर बाकी अखबारों से अलग और बहुत कुछ बताती है। 

उसपर आने से पहले हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस को भी देख लूं। सच्चाई यह है कि चीन के साथ सीमा विवाद पर राहुल गांधी के बयान के आलोक में विदेश मंत्री की टिप्पणी को कल प्रमुखता से छापने वाले अखबारों ने आज कांग्रेस का पक्ष या स्पष्टीकरण या जवाबी आरोप उसी प्रमुखता से पहले पन्ने पर नहीं छापा है। इंडियन एक्स्रेस की कल की खबर भले संतुलित थी पर आज कांग्रेस का आरोप होना बहुत कुछ कहता है। और इसे समझने के लिए पेश है टेलीग्राफ की खबर का हिन्दी अनुवाद।  

शीर्षक है, प्रधानमंत्री का इनकार सरकार को परेशान कर रहा है। नई दिल्ली डेटलाइन से संजय के झा की बाईलाइन वाली खबर इस प्रकार है, कांग्रेस ने मंगलवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर से पूछा, 2020 में चीनी सैनिकों से लड़ते हुए गलवान में जान गंवाने वाले 20 भारतीय सैनिकों के बलिदान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कहना कि चीन ने किसी भी तरह की घुसपैठ नहीं की है, उनके सर्वोच्च बलिदान काआदर और सम्मानकरना है

कांग्रेस का यह हमला लोकसभा में जयशंकर द्वारा तवांग में हाल ही में भारतचीन संघर्ष का जिक्र करते हुए राहुल गांधी द्वारापिटाई (पिटाई)” शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताए जाने के एक दिन बाद हुआ। उन्होंने कहा था कि सरकार की आलोचना की जा सकती है लेकिन जवानों को नहीं इस तरह के भावों का इस्तेमाल करके अपमानित किया जाता है। इसपर कांग्रेस संचार प्रमुख जयराम रमेश ने कहा, “हम विदेश मंत्री से सहमत हैं जिन्होंने कहा कि हमारे जवानों का सम्मान, सम्मान और सराहना की जानी चाहिए क्योंकि वे हमारे विरोधियों के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। क्या यही सम्मान था जिसके कारण प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “ना वहाँ कोई घुसा है, ना कोई घुस आया है, ना ही घुसा हुआ है।प्रधानमंत्री ने 19 जून 2020 को हमारे 20 सैनिकों द्वारा हमारी सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने के बाद कहा था। जयराम रमेश ने कहा, “विदेश मंत्री का दावा है कि चीन के साथ संबंधसामान्यनहीं हैं। फिर हमने चीनी राजदूत को कभी क्यों नहीं बुलाया और डिमार्श जारी नहीं किया है, जैसा कि हम पाकिस्तान के उच्चायुक्त के साथ करते हैं? 2021-22 में 95 बिलियन डॉलर के आयात और 74 बिलियन डॉलर के व्यापार घाटे के साथ चीन पर हमारी व्यापार निर्भरता रिकॉर्ड उच्च स्तर पर क्यों है? हमारे सैनिकों ने सितंबर 2022 में रूस के वोस्तोक-22 में चीनी सैनिकों के साथ सैन्य अभ्यास क्यों किया?

जयशंकर ने कहा था कि सरकार चीन को एकतरफा ढंग से एलएसी में बदलाव नहीं करने देगी। इसे याद दिलाते हुए रमेश ने कहा, पिछले दो वर्षों के दौरान क्या चीनी सैनिकों ने डेपसांग में 18 किमी अंदर स्थिति में बदलाव नहीं किया है?” तथ्य यह है कि हमारे सैनिक पूर्वी लद्दाख में 1,000 वर्ग किमी क्षेत्र तक पहुंचने में असमर्थ हैं, जहां वे पहले गश्त करते थे? क्या यह इस तथ्य से नहीं बदला है कि हम बफर जोन के लिए सहमत हुए हैं जो हमारे गश्ती दल को उन क्षेत्रों में जाने से रोकते हैं जहां वे पहले जा सकते थे? कब क्या विदेश मंत्री स्पष्ट रूप से घोषणा करेंगे कि 2020 से पहले की यथास्थिति की बहाली हमारा उद्देश्य है?” रमेश ने कहा: “विदेश मंत्री ने कहाहम चीन पर दबाव बना रहे हैं। फिर हमारा पूरी तरह से प्रतिक्रियाशील रुख क्यों है? हम 2020 से पहले की यथास्थिति की पूर्ण बहाली सुनिश्चित किए बिना कैलाश रेंज में अपनी लाभप्रद स्थिति से पीछे क्यों हट गए?” “हम और अधिक आक्रामक क्यों नहीं हुए और चीनियों को पीछे हटने के लिए मजबूर करने के लिए जवाबी घुसपैठ क्यों नहीं की जैसा कि हमने 1986 और 2013 में किया था? हम अपना दावा जताने के बजायधारणा में अंतरका हवाला देकर चीनी आक्रामकता को वैध ठहराना कब बंद करेंगे? कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी ने जो कहा वह जवानों के उत्साह और हिम्मत के बारे में नहीं था बल्कि सरकार की नाकामी बारे में था।  

भारत जोड़ो यात्रा बुधवार को हरियाणा में प्रवेश करेगी। पूर्व सैनिकों के साथ यह जय जवान दिवस मनाएगी और 23 दिसंबर को भारत जोड़ो यात्रा किसानों के साथ जय किसान दिवस मनाएगी। कहने की जरूरत नहीं है कि जवानों की इज्जत करनी हो तो व्यवस्था ऐसी हो कि खराब खाने की शिकायत करने पर नौकरी से नहीं निकाला जाए और निकाल ही दिया जाए तो चुनाव लड़ने से नहीं रोका जाए और रोक ही दिया जाए एक बार उसकी बात तो हो। इसी तरह पुलवामा फिर हो इसके लिए क्या किया उसे भी बताया जा सकता है।

 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध अनुवादक हैं।

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