बिहार मा का बा ?…. सगरी दिल्ली बा!

जिन्हें यह सिर्फ़ व्यंग्य लगे, उन्हें बहुत बधाई। उन्हें शीघ्र ही अपने अकाउंट में 2014 से जो पंद्रह लाख पड़े हैं, उनका इस्तेमाल कर अपने लिए ज़रूर कुछ ख़रीदना चाहिए- जैसे कि धोलेरा की स्मार्ट सिटी में घर या कश्मीर में ज़मीन या बुलेट ट्रेन का टिकट। लेखक न आपके पंद्रह लाख की न आपको यह लेख सच्चा लगने की कोई भी ज़िम्मेदारी लेता है- सबका साथ और सबको अहसास मिले, यही लेखक की इच्छा है।

यह लेख एक व्यंग्य मात्र है, पर आपको किसी निजी समझ के कारण यह कड़वा और सच्चा लगे तो लेखक उसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं ले सकता है। कृपया अपनी समझदारी का ठीकरा लेखक के सर पर ना फोड़ें। और जिन्हें यह सिर्फ़ व्यंग्य लगे, उन्हें बहुत बधाई। उन्हें शीघ्र ही अपने अकाउंट में 2014 से जो पंद्रह लाख पड़े हैं, उनका इस्तेमाल कर अपने लिए ज़रूर कुछ ख़रीदना चाहिए- जैसे कि धोलेरा की स्मार्ट सिटी में घर या कश्मीर में ज़मीन या बुलेट ट्रेन का टिकट। लेखक न आपके पंद्रह लाख की न आपको यह लेख सच्चा लगने की कोई भी ज़िम्मेदारी लेता है- सबका साथ और सबको अहसास मिले, यही लेखक की इच्छा है।

चुनावी मौसम के चलते,आजकल यह नेतागण बिहार की ओर पलायन कर गए हैं। भाजपा और कांग्रेस, दोनो ने तय कर लिया है की देश में बिहार के अलावा कोई मुद्दा ही नहीं है। आज से बिहार में, न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परंतु कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी चुनावी रैलियों की शुरुआत करने जा रहे हैं। जहाँ मोदी जी की बारह रैलियों का ऐलान हो चुका है, वहीं राहुल गांधी की हर चरण से पहले दो रैली करने की सम्भावना बताई जा रही है। इससे पहले देश की दोनो बड़ी पार्टियों ने अपने स्टार प्रचारकों की फ़ेहरिस्त भी जारी कर दी थी। इस सूची में भाजपा से प्रधानमंत्री के अलावा जे.पी. नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. संतोष, बिहार यूनिट के अध्यक्ष डॉक्टर संजय जयसवाल, बिहार के उप मुख्य मंत्री सुशील मोदी, देवेंद्र फड़नवीस, उत्तरप्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ और सूचना एवं प्रसारण मंत्री रवि शंकर प्रसाद के साथ साथ और भी कई बड़े नाम शामिल हैं। इन नामों के अतिरिक्त देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कल पटना में भाजपा का घोषणा पत्र जारी करके बिहार चुनाव में अपनी हाज़िरी लगा दी है।

वैसे जब अर्थव्यवस्था की दर -23.9% पहुँच ही चुकी है, तो निर्मला जी का अर्थव्यवस्था सम्भालने पर ध्यान देना भी कहाँ तक उचित है? और हाँ देश में कोरोना के आँकडें अभी सिर्फ़ 77 लाख ही तो हैं, अभी तक पूरे एक करोड़ भी नहीं पहुँचे हैं! इन आँकड़ेम के लिए चुनावी प्रचार रोकना भी ठीक नहीं है। और अब जब भारत-चीन सीमा पर विवाद लंबा चलना ही है तो रक्षा मंत्री का यूँ उसको लेकर चिंतित रहना भी कूपमंडूक जैसी सोच कहलायेगी।और फिर आदित्यनाथ जी का सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में रहना भी ठीक नही है, बिहार में क़ानून-व्यवस्था की हालात कहाँ अच्छी है? इसलिए बिहार के चुनावों पर अपना सारा ध्यान केंद्रित करना सही निर्णय है।

कांग्रेस की क्योंकि केंद्र में सरकार नहीं है तो वो सिर्फ़ अपने राज्य सरकारों की बागडोर सम्भाले, ऐसा थोड़ी संकुचित विचारधारा वाले लोग ही चाहेंगे। इसलिए कांग्रेस  के स्टार प्रचारकों की सूची में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मीरा कुमार, ग़ुलाम नबी आज़ाद के अलावा राजस्थान के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत, सचिन पायलट, पंजाब के मुख्य मंत्री अमरिंदर सिंह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज़ बब्बर, शत्रुघन सिन्हा जैसे नाम भी शामिल हैं। वैसे, राजस्थान में आदिवासी आंदोलन और पंजाब में किसानों क आंदोलन महीनों से चल रहे हैं पर एक ही मुद्दे के पीछे पड़े रहना भी किसी मुख्यमंत्री को कहाँ शोभा देता है। यह अच्छा है कि सब लोग बिहार में एक साथ है, संसद में एक साथ देखने का मौक़ा नहीं मिलता हम सबको। लोग पूछते हैं बिहार में का बा, हमें लगता है बिहार में दिल्ली बा। 


 

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