चुनाव चर्चा: अरोड़ा जी दीदी का कंठनाद रोक गये, चंद्रा जी योगी जी का भविष्य नापेंगे!

भारतीय राजस्व सेवा ( आईआरएस ) के 1980 बैच के अफसर रहे सुशील चंद्रा ने आज सुबह नई दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग का कार्यालय खुलते ही वहाँ पहुंच चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी ) की कुर्सी सम्भाल ली. इस कुर्सी पर उनसे पहले विराजे अयर इंडिया के चेयरमैन रहे पूर्व आईएएस अफसर सुनील अरोड़ा ने जाते जाते ‘खेला होबे’ बोले बिन बंगाल की मुख्यमंत्री एवम तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी का प्रचार कंठनाद 24 घंटे के लिये बंद कर दिया.

सोमवार को रिटायर होने से पहले उन्होने और कई खेल किये जिनका कुछ जायजा हम बाद में लेंगे. पहले नये सीईसी की नई चुनावी चाल की पेशकदमी समझ ले तो बेहतर होगा.

 

चंद्रा जी

चंद्रा जी 14 मई 2022 तक ‘इंडिया दैट इज भारत’ के सभी संसदीय और राज्य विधानमंडलीय चुनावों का चुनावी खेला खिलवायेंगे. इनमें सबसे बडे राज्य, उत्तर प्रदेश समेत पांच सूबों मे अगले बरस निर्धारित चुनाव शामिल हैं. उन्होने सांविधिक निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी ) पद पर केंद्र सरकार के कैबिनट बैठक की अनिवार्य मंजूरी मिलने के 24 घंटे के भीतर अपना नया पदभार सम्भाल लिया.

इस पद पर उनका कार्यकाल 14 मई 2022 तक होगा, जिस दिन वह रिटायर करने वाले हैं. रिटायर होने से पहले उनको जो चुनाव कराने हैं उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब ,गोआ और मणिपुर विधान सभा चुनाव प्रमुख हैं.

मोदी सरकार ने अब 63 बरस के हो चुके चंद्रा जी को 17वीं लोकसभा चुनाव के ऐन पहले फरवरी 2019 में चुनाव आयुक्त नियुक्त किया था. चंद्रा जी चुनाव आयुक्त नियुक्त होने से पहले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ( सीबीडीटी ) के चेयरमेन थे. वह निर्वाचन आयोग में अरोड़ा जी के मातहत के रूप में पिछले लोकसभा चुनाव के अलावा 10 राज्यों के चुनाव करा चुके हैं. उत्तर प्रदेश , राजस्थान , दिल्ली , गुजरात और महाराष्ट्र में आला सरकारी पदों पर रह चुके चंद्रा जी ने रुड़की यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के बाद देहरादून के डीएवी कॉलेज से विधि स्नातक की डिग्री हासिल कर रखी है.

अगले बरस 14 मई को उत्तर प्रदेश विधान सभा तथा उसके पहले मार्च में गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड और पंजाब विधान सभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले नये चुनाव की दरकार होगी.

 

दूसरे चुनाव आयुक्त

इस सांविधिक आयोग के तीन आयुक्त में से एक अरोड़ा जी के चले जाने से अभी रिक्त है. अभी दूसरे चुनाव आयुक्त आइएएस 1984 बैच के बिहार– झारखंड काडर के अफसर रहे राजीव कुमार हैं जिन्हे मोदी सरकार ने इस पद पर 1 सितम्बर 2020 को नियुक्त किया था. केंद्र सरकार के वित्त सचिव रह चुके राजीव कुमार अगला सीईसी भी बन सकते है. पीवी नरसिह राव सरकार ने 1990 के दशक में तत्कालीन निर्वाचन आयुक्त टी.एन.शेषन के  पर कतरने के लिए  एक कानून बनाकर निर्वाचन आयोग को एक से बढा कर तीन सदस्यीय बना दिया था.

 

सुनील अरोड़ा

पिछले पांच बरस से लगातार विवादों के घेरे में रहे सुनील अरोड़ा के खेला की एक झलक हमने चुनाव चर्चा के 2018 के एक अंक में विस्तार से चर्चा कर खुलासा किया था कैसे मोदी सरकार ने अरोड़ा जी को चुनाव आयुक्त नियुक्त करने में कायदे कानून शिथिल कर दिये थे. मोदी सरकार ने 1980 बैच के राजस्थान काडर के आईएएस अफसर अरोड़ा जी को 2 दिसम्बर 2018 को सीईसी नियुक्त किया था जिसके पहले वह एक सितम्बर 2017 से चुनाव आयुक्त थे.

बतौर सीईसी अरोड़ा जी का अंतिम आदेश बंगाल की मुख्य्मंत्री एवम आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ( टीएमसी ) प्रमुख ममता बनर्जी को कथित साम्प्रदायिक  प्रचार के लिये उन के चुनाव प्रचार पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगाना था. दीदी ने अरोडा जी के आरोप को बोगस बता सवाल किया है कि उन के क्षेत्र नंदीग्राम को ‘ मिनी पाकिस्तान’ कहने वाले भाजपा नेताओ के खिलाफ कोई कार्वाई क्यो नहीं की गई?

 

काउंटिंग और चुनाव परिणाम

बहरहाल , केरल , तमिलनाडु और पुडुचेरी की अन्य तीनो विधान सभा चुनाव के लिये एक ही चरण में 6 अप्रैल को वोटिंग हो चुकी है. असम में भी 27 मार्चतथा 1 और 6 अपैल को मतदान हो चुका है. बंगाल में मतदान 8 चरण में हैं जिनमें 27 मार्च तथा 1 , 6 , 10 अपैल की वोटिंग हो चुकी है तथा 17 , 22 ,26 और 29 अपैल की वोटिंग शेष हैं.

पांचों विधान सभा में से असम मे 126 , बंगाल मे 294 , केरल में 140 , तमिलनाडु में 234 और पुदुचेरि मे 30 सीट है. इनकी मौजूदा विधान सभा का पांच बरस का कार्यकाल इसी बरस मई – जून में समाप्त होने वाला है. दो मई को एक्साथ पूरब भारत के असम और बंगाल तथा दक्षिण भारत में दो राज्य ,केरल और तमिलनाडु के अतिरिक्त केंद्र शासित प्रदेश, पुडुचेरी की विधान सभा चुनाव के लिये अलग-अलग चरण में *वोटर वेरिफाइड पेपर औडित ट्रोल*(वीवीपीएटी) की अलग मशीन से जुडी *इलेक्ट्रौनिक वोटिंग मशीन*(ईवीएम) से कराये मतदान में दर्ज वोटो की काउंटिंग की जानी है.

देखना है चंद्रा जी के बतौर सीईसी कार्यकाल में इन चुनाव की काउंटिंग में क्या गुल खिलते हैं.

 

*मीडिया हल्कों में सीपी के नाम से मशहूर चंद्र प्रकाश झा 40 बरस से पत्रकारिता में हैं और 12 राज्यों से चुनावी खबरें, रिपोर्ट, विश्लेषण के साथ-साथ महत्वपूर्ण तस्वीरें भी जनता के सामने लाने का अनुभव रखते हैं। 

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