चुनाव चर्चा: कोरोना लहर में ओली ब्रांड चुनावी ‘किंग्स गैंबिट’ चाल के ख़तरे-1

नेपाल के प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली (केपी) की सरकार की अनुशंसा पर राष्ट्रपति बिद्या देवी भण्डारी ने एक बार फिर संसद के निचले सदन, प्रतिनिधि सभा को भंग कर मध्यावधि चुनाव कराने का आदेश दे दिया है. दुर्भाग्य है कि ये मध्यावधि चुनाव कोविड काल की नई लहर के बीच होंगे. खबर है कि नेपाल में वैक्सीन की उपलब्धता खत्म हो जाने से इस महामारी की स्थिति सरकार के नियंत्रण से बाहर हो गई है. संविधान और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चुनाव कराने के राष्ट्रपति के कदम की आलोचना की है. विपक्ष के लगभग सभी दलों ने इस कदम को असंवैधानिक ही नहीं अमानवीय बताक्र कहा है कि नेपाल को ये चुनाव भारत में हालिया हरिद्वार कुम्भ मेला अनुमानित एक करोड से अधिक लोगो के गंगा स्नान तथा प्रांतीय और पंचायत आदि के अन्य चुनावो के अंत्यंत बुरे परिणाम से सबक लेकर तत्काल स्थगित कर देना चाहिये.

विपक्ष के 149 सांसदों ने राष्ट्रपति के निर्णय की संवैधानिकता को चुनौती देने के लिये सर्वोच्च न्यायालय की शरण लेने का मन बनाया है. इन सांसदो की संख्या 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 137 की बहुमत संख्या से अधिक है।

 

जटिल मामला

नेपाल चुनाव का मामला कुछ जटिल है. ओली सरकार को दिसम्बर 2017 में हुए पिछले चुनाव में प्रतिनिधि सभा में दो तिहाई बहुमत हासिल हुआ था.ओली सरकार आसानी से चल रही थी.पर ओली जी को लगा सत्ताधारी खेमे में उनके विरोधी गुट के कुछ नेता प्रधानमंत्री पद की लालसा में उनकी कुर्सी हिला सकते हैं. उन्हे अपनी सरकार को हासिल बहुमत नही टिकने की आशंका हो गई. उन्होंने सियासी बाजी में बतौर नई चाल के तहत अप्रत्याशित रूप से सदन भंग कर नया चुनाव कराने का कदम उठा लिया. यह लोकतांत्रिक नेपाल में अपनी ही सरकार को गिराने का पहला मौका था. शतरंज की भाषा में इसे *किंग्स गैंबिट* कह सकते हैं. ओली जी ने एक तरह से खुद को दांव पर लगा दिया.

ओली मंत्रिमंडल के सात मंत्रियों ने इस चाल के विरोध में इस्तीफा देकर कहा सदन भंग करना पिछले चुनाव के जनादेश के खिलाफ़ असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक कदम है. उन्होने दावा किया इससे भारत और चीन के बीच फैले नेपाल में राजनीतिक स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है.

विपक्ष ने नेपाल सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई तो उसने ओली सरकार को प्रतिनिधि सभा में विश्वास-मत हासिल करने का आदेश दिया. तब ओली सरकार ने सदन में जैसे तैसे बहुमत मैंनेज कर लिया. लेकिन ओली जी का अपने विरोधी गुटो को सियासी मात देने के लिये चुनावी ‘ किंग्स गैंबिट’ चाल चलने का इरादा बरकरार रहा.

 

आत्मघाती या जनघाती

दिसम्बर 2020 में नेपाल मामलों के विशेषज्ञ, भारतीय पत्रकार लेखक आनन्द स्वरूप वर्मा आदि ने इसे ओली जी का आत्मघाती कदम कहा लेकिन इसकी तत्काल सुसंगत व्याख्या नहीं की. उन्होंने फेसबुक पर अतिसंक्षिप्त पोस्ट में इतना ही कहा: ओली के इस आत्मघाती कदम का विश्लेषण जल्दी ही सामने आएगा. ये बात साफ है नेपाल की सियासत में भारत और चीन , दोनों का ही हित निहित है और नेपाल में दोनो के सियासी ‘ एजेंट ‘ भी हैं.

हमने वर्मा जी के विश्लेषण का इंतज़ार करने के बजाय मीडिया विजिल के इस कोलम के 29 दिसम्बर 2020 के ही अंक में लिखा था भारत समेत दुनिया भर में जो आर्थिक , राजनीतिक और सामाजिक उथल पुथल चल रहा है उसमें हमें तथ्यों से लैस होकर स्थिति की तत्काल वस्तुनिष्ठ समग्र समझ बनाने की दरकार है.

 

नेपाल के खूनी तख्तापलट के संस्मरण

हमने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 1991 के लोकसभा चुनाव के बीचोबीच तमिलनाडू के श्रीपेरुम्ब्दूर के पास चुनावी सभा में में श्रीलंका के भारत में प्रतिबंधित लिबेरेशन टाइगर्स ओफ तमिल ईलम ( लिट्टे ) के आत्मघाती आतंक्वादियो द्वारा की गई हत्या की बरसी पर 22 मई 2021 को हिंदी न्यूज पोर्टल ,जनचौक पर प्रकाशित अपने संस्मरण लिखे हैं. इस पर पाठको के बीच फेसबुक पर हुए विमर्श में हमने अपने कुछ नेपाली पत्रकार आदि मित्रों से मीडिया विजिल के इस कॉलम के आज के अंक में नेपाल में 1 जून 2001 को हुए खूनी खेल के बारे में भी अपने संस्मरण लिखने का वादा किया था.

नेपाल मामलों पर हम लगातार नज़र रखते हुए  1980 से लिखते रहे हैं. हर बरस वहां के विभिन्न भागों का कई दिन का चक्कर भी लगाते है. हमारे लिये नेपाल अपना देश तो नही है, पर वह हमारे अपनो का देश है. हमारी सगी छोटी बहन, भारत के मैथिली भाषी हमारे गांव से नेपाल के सीमावर्ती तराई क्षेत्र में ब्याही हैं. वह सदगृहस्थ होने के साथ ही कवि और महिला अधिकारवादी राष्ट्रीय नेता भी है. उनकी कॉलेज शिक्षा मिथिला अंचल के गढ, दरभंगा में हुई है.वह नेपाल के संसदीय चुनाव मैदान में उतरने से नही हिचकती है.

उस खूनी दिन हम नेपाल में ही थे. तब नेपाल के अंतिम राजा बीरेंद्र और रानी ऐश्वर्या समेत उनके सभी 9 परिजन की काठमांडु के 38 एकड
में फैले विशाल ‘ नारायणहिति राजमहल ‘ में बाद के राजीव गांधी हत्याकांड की ही तरह के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक षडयंत्र के तहत हत्या कर दी गई थी. हम तब, इन दिनो रिपब्लिक टीवी के महान मोदी-भक्त एंकर, अर्णव गोस्वामी (अर्गो) के बतौर सहयात्री इंडियन एयरलाइंस की नेपाल -भारत फ्लाइट से काठमांडु से नई दिल्ली लौटे थे. उस खूनी तख्तापलट का लगभग प्रत्यक्षदर्शी होने के अपने संस्मरण के कुछ अंशों कानेपाल चुनाव पर केंद्रित इस विशेष लेखमाला के अगले अंक में नज़र आना अस्वाभाविक नही होगा.

 

फर्स्ट ड्राफ्ट ओफ हिस्ट्री

पत्रकारो की रिपोर्ट ही नहीं उनके वे संस्मरण भी दुनिया भर में हड़बड़ी के इतिहास लेखन के ड्राफ्ट माने जाते हैं जो व्यक्तिगत जीवन के होते हुए भी सार्वजनिक महत्व के होते हैं. इस पर वैश्विक बहस अमेरिकी अखबार, वाशिंगटन पोस्ट के मालिक प्रकाशक, फिलिप ग्राहम ( 1915 –1963 ) के निधन के ऐन पहले अप्रैल 1963 में लंदन में उसके समुद्रपारीय संवाददाताओ की सभा में दिये ऐतिहासिक भाषण से सेटल हो गई थी. ‘ न्यूज इज ओनली फर्स्ट ड्राफ्ट ओफ हिस्ट्री ‘ के उनके कथन का समर्थन पहले भी एलन बार्थ समेत कुछ विद्वानो और सम्पादकों ने किया था.

भारत के सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बारे में महान क्रांतिकारी विचारक कार्ल मार्क्स द्वारा अमेरिकी अख्बार, न्युयार्क ट्रिब्यून को भेजे गये डिस्पैच इतिहास के प्रथम ड्राफ्ट ही थे जिसको महान विदुषी रोजा लग्जम्बर्ग द्वारा इंगित करने के उपरांत उस लड़ाई की 150 वी वर्षगांठ पर रूसी प्रकाशक ‘ प्रोग्रेस ‘ ने पुस्तक रूप दे दिया.

 

नेपाल के 2017 के पिछले चुनाव का अर्थ

नेपाल में 2017 में भी  ‘कम्युनिस्ट क्रान्ति’ नही हुई थी पर उनकी पार्टियो इंडिया दैट इज़ भारत और पीपुल्स रिपब्लिक औफ चाइना से घिरे इस
हिमालयी नवोदित सम्प्रभुता सम्पन्न लोकतांत्रिक सेक्युलर गणराज्य में चुनाव जीत दर्ज कर राजसत्ता पर काबिज होती रही हैं. उन्हें दिसम्बर 2017 के चुनाव में वहा की संसद के भारत के लोकसभा की तरह के निम्न सदन, प्रतिनिधि सभा की कुल 275 सीटों में स्पष्ट बहुमत से भी ज्यादा दो-तिहाई बहुमत मिला था. नेपाल के नये संविधान के तहत प्रतिनिधि सभा की 165 सीटों के लिए प्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं. शेष 110 के वास्ते अप्रत्यक्ष तौर पर समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली ( लिस्ट सिस्टम) से चुनाव होते हैं.

बहरहाल, नेपाल में कोविड की मौजूदा बहुत ही खराब स्थिति के कारण मध्यावधि संसदीय चुनाव से अनर्थ होने की आशंका है. चुनाव होंगे तो ओली जी और उन के विरोधी नेता भी भारत मे मोदी जी और अन्य सियासी नेताओ की तरह अपार धन खर्च कर बडी रैलिया करेंगे.

बहरहाल , देखना यह है नेपाल सुप्रीम कोर्ट ओली जी और उनके सियासी ‘किंग्स गैंबिट’ चाल में साझीदार लग रही उनके खेमा की ही पूर्व सियासतदा रही राष्ट्रपति बिद्या देवी भण्डारी के निरंकुश राजकाज पर कितनी लगाम लगाती है.

 

*मीडिया हल्कों में सीपी के नाम से मशहूर चंद्र प्रकाश झा 40 बरस से पत्रकारिता में हैं और 12 राज्यों से चुनावी खबरें, रिपोर्ट, विश्लेषण के साथ-साथ महत्वपूर्ण तस्वीरें भी जनता के सामने लाने का अनुभव रखते हैं। 

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