फ्रांस में छपे “राफ़ेल पेपर्स’, सौदे में 10 लाख यूरो की दलाली देने का दावा!

सवाल ये है कि क्या राफ़ेल पेपर्स के प्रकाशन का क्या असर पड़ेगा। ज़ाहिर है, यह  रिपोर्ट राहुल गाँधी के मोदी सरकार पर लगाये भ्रष्टाचार के आरोपों पर मुहर लगाती है पर क्या फ्रांस सरकार इसकी जाँच को लेकर गंभीर होगी। ख़ासतौर पर जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने शुरू में ही कहा था कि अनिल अंबानी को इस सौदे में शामिल करने के लिए सीधे भारत सरकार ने दबाव डाला था।

देश में जारी विधानसभा चुनाव की धूम के बीच फ्रांस से आयी एक ख़बर ने बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। भारत में विपक्ष की तमाम घेरेबंदी के बावजूद सुप्रीम कोर्ट से राफेड डील पर मिली हरी झंडी भी इस ख़बर से मुरझा सकती है। दरअसल, फ्राँस की समाचार वेबसाइट मीडिया पार्ट ने राफ़ेल पेपर्स प्रकाशित करते हुए दावा किया है कि राफ़ेल डील में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक सौदे के लिए दलाल को दस लाख यूरो दिये गये और सरकार ने इस भ्रष्टाचार को दफ़्ना दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में सौदे पर दस्तखत हो जाने के बाद फ्रांस की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी AFA इसकी जानकारी हुई। AFA को पता चला कि राफेल बनाने वाली कंपनी दसौ एविएशन ने एक बिचौलिए को 10 लाख यूरो देने पर सहमति जतायी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2018 में फ्रांस की पब्लिक प्रोसिक्यूशन एजेंसी PNF को राफ़ेल सौदे में गड़बड़ी के लिए अलर्ट मिला। लगभग उसी समय दासौ एविएशन के ऑडिट का भी हुआ। 2017 के खातों की जाँच का दौरान ‘क्लाइंट को गिफ्ट’ के नाम पर 5,08,925 यूरो के खर्च का पता लगा जिससे शक़ हुआ।

इस पर जब स्पष्टीकरण माँगा गया तो दासौ एविएशन ने AFA को 30 मार्च 2017 का बिल मुहैया कराया जो भारत की DefSys Solutions की तरफ से दिया गया था। यह बिल राफ़ेल लड़ाकू विमान के 50 मॉडल बनाने के लिए दिए ऑर्डर का आधे काम के लिए था। इस काम के लिए प्रति मॉडल 20, 357 यूरो के हिसाब से बिल दिया गया। ऐसे में सवाल उठा कि दासौ अपने ही विमान का मॉडल किसी और से क्यों बनवायेगी और इसके लिए इतनी मोटी रक़म क्यों देगी?

ज़ाहिर है, तमाम कोशिशों के बावजूद राफ़ेल का जिन्ना बार-बार बाहर आ ही जाता है। बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाते हुए चौकीदार चोर है जैसा कड़ा नारा भी दिया था। अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा जैसे बीजेपी के पुराने नेताओं ने भी तमाम दस्तावेज़ी प्रमाण देकर राफ़ेल सौदे में भ्रष्टाचार को लेकर मोदी को घेरा था, लेकिन पुलवामा में हुए हमले ने भ्रष्टाचार के मुद्दे को पीछे कर दिया। मोदी दोबारा पीएम बन गये।

ऐसे में सवाल ये है कि क्या राफ़ेल पेपर्स के प्रकाशन का क्या असर पड़ेगा। ज़ाहिर है, यह  रिपोर्ट राहुल गाँधी के मोदी सरकार पर लगाये आरोपों पर मुहर लगाती है पर क्या फ्रांस सरकार इसकी जाँच को लेकर गंभीर होगी। ख़ासतौर पर जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने शुरू में ही कहा था कि अनिल अंबानी को इस सौदे में शामिल करने के लिए सीधे भारत सरकार ने दबाव डाला था।

रिपोर्ट को पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें–

Sale of French Rafale jet fighters to India: how a state scandal was buried

बीजेपी के लिए ऐन चुनाव के बीच इस ख़बर का आना परेशान करने वाला है। उसे इन आरोपों पर नये सिरे से जवाब देना होगा। उसकी समस्या ये है कि यह कांग्रेस पार्टी की ओर से लगाये गये आरोप भर नहीं हैं। बहुत से दस्तावेज़ फ्रांस के सरकारी सिस्टम में इस सौदे में हुए भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे हैं।

 

First Published on:
Exit mobile version