नई चुनौती: कोरोना के बीच निपाह, डेंगू और मलेरिया ने बढ़ाई मुश्किल, स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बेहाल!

देश कोरोना वायरस से अभी तक नही उभार पाया कि कई तरह के और खतरे मंडराने लगे हैं। देश में हर दिन ऊपर-नीचे हो रही संक्रमितों की संख्या ने कोरोना की तीसरी लहर का खतरा सिर पर खड़ा कर दिया है। इसके बचाओ के लिए टीकाकरण को तेज़ करने पर ज़ोर दिया जा रहा है, लेकिन आगे कई गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

अब तक सिर्फ कोरोना के बोझ को ही स्वास्थ व्यवस्था उठाने में नाकाम हो गई थी। अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड का आकाल पड़ गया था, पर अब केरल से लेकर उत्तर प्रदेश तक के अस्पतालों में बुखार के मरीजों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हो रही है। जिसका असर हर जगह अलग तरह देखने को मिल रहा है। कोरोना के नए-नए खतरनाक वैरिएंट, निपाह वायरस, डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार के बढ़ते मामलों से अस्पतालों में बिस्तरों का संकट पैदा हो गया है।

कई राज्यों में 95% तक अस्पताल के बेड अभी से फुल..

केरल में कोरोना के साथ ही निपाह वायरस, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में डेंगू, दिल्ली में वायरल और बिहार में मलेरिया के प्रसार के कारण बुखार के मरीजों की संख्या तेेज़ी से बढ़ रही है। अब नौबत ये है की उत्तर प्रदेश में डेंगू से बच्चों की जान तो जा ही रही हैै, लेकिन जो बच्चे इसका शिकार हो रहे है उनको अस्पतलों में जगह तक नही मिल रही है। लोग घर में इलाज करने को मजबूर है जिससे खतरा और बढ़ गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कुछ राज्यों में 95% तक अस्पताल के बेड अभी से ही भरे हुए हैं। इनमें से 60 से 70% मरीज बुखार या वायरल से संक्रमित हैं।

डेंगू वायरस का D-2 स्ट्रेन, बेहद जानलेवा..

पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की वैज्ञानिक डॉ. प्रज्ञा यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में फैले रहस्यमयी बुखार के मरीजों की जीनोम सीक्वेंसिंग में हमने पाया है डेंगू वायरस का D-2 स्ट्रेन, जो बेहद जानलेवा है। बता दें की महाराष्ट्र और यूपी के अलावा कुछ सैंपल दिल्ली से भी मंगवाए गए हैं, क्योंकि वहां लोगों को वायरल फीवर के बाद लंबे समय से खांसी और कफ की शिकायत हो रही है।

महाराष्ट्र के अस्पतालों के ब्लडबैंकों में ब्लड की कमी..

अभी तक तो चिंता की वजह कोरोना ही था लेकिन अब इसके अलावा डेंगू के चलते भी महाराष्ट्र के अस्पतालों के ब्लडबैंकों में ब्लड की कमी हो गई है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं की हालात ऐसे हो रहे हैं कि मुंबई के टाटा अस्पताल को सोशल मीडिया पर रक्तदान के लिए लोगों से अपील करनी पड़ रही है। अस्पताल की माने तो रक्त की मांग कई महीने पहले से ही अधिक थी, लेकिन अब यह मुश्किल और ज्यादा बढ़ चुका है।

इन्फ्लुएंजा का संक्रमण खासकर बच्चों में..

नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि बुखार के मरीजों की संख्या में इज़ाफा हुआ है। इन्फ्लुएंजा का संक्रमण खासकर बच्चों में देखने को मिल रहा है। स्क्रब टाइफस और लेप्टोस्पायरोसिस जैसे जीवाणु संक्रमण (bacterial infection) भी कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों में घातक साबित हो सकते हैं।

यूपी के मरीजों को भी दिल्ली एम्स रेफर किया जा रहा..

यूपी हो यह बिहार स्वास्थ व्यवस्था के हालात क्या है इससे पूरा राज्य वाकिफ हैै। सरकार जितने भी दावे करें लेकिन जब मुश्किल आती हैं तो सारे दावों की पोल खोल कर रख देती हैं। कोरोना की दूसरी तहर से किस तरह यूपी सरकार निपटी हैैैै, यह बताने की शायद ही जरूरत हैै। दावे उस वक्त भी किए जा रहे थे और अभी भी नई लहर से निपटने के लिए राज्य पर्याप्त तैयारियों के दावे कर ही रहे हैं, लेकिन अभी से ही सभी जगह अस्पताल 80 से 90% तक फुल हो चुके हैं जिसके चलते यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित कई राज्यों से मरीजों को दिल्ली एम्स रेफर किया जा रहा है। अब एम्स प्रबंधन के मुताबिक उनके पास क्षमता से ज्यादा मरीज़ो का बोझ हैं। इसलिए नए मरीजों को सफदरजंग अस्पताल भेजा जा रहा है। लेकिन सफदरजंग अस्पताल प्रबंधन ने भी अब दवा समेत कई अहम विभागों में हाउसफुल की स्थिति बता रहा है।

उत्तर प्रदेश और बिहार के अस्पतालों में हालात ज़्यादा खराब..

प्राइवेट हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के महानिदेशक डॉ. गिरधर ज्ञानी केेे मुताबिक सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए यह समय काफी चुनौतियों से घिरा है। अलग-अलग तरह के बुखार ने इतना प्रभावित किया है कि अगर अभी कोरोना की नई लहर आई तो अस्पताल इसका बोझ नहीं उठा पाएंगेे। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार के अस्पतालों में हालात ज़्यादा बदतर हैं, जहां मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है.

बुखार के कारण स्थिति बिगड़ने की चेतावनी पहले ही दी जा चुकी थी…

ऐसे नही है की बुखार के मामले अचानक से बढ़ गए और अस्पतलों पर बोझ आ गया सरकारें पहले ही इस खतरे से अवगत थी। बुखार के कारण स्थिति और बिगड़ने की चेतावनी पहले ही दी जा चुकी थी। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि बुखार के ज्यादातर मामले मच्छर जनित बीमारियों के कारण देखे जा रहे हैं। अब हमारे सामने स्थिति ऐसी हो गई है कि हमें कोरोना के अलावा इन बीमारियों से भी लड़ने के लिए तैयार रहना होगा।

 

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