मदिरालय खोलने को बर्बादी बताने वाले ACP ने मोदी-योगी से माफ़ी माँग हटाया ट्वीट

 

यूपी के एक आला पुलिस अफसर को शराब की दुकाने खोलने से हो रही परेशानियों पर ट्वीट करना भारी पड़ गया। सरकार की नज़र टेढ़ी होते देख उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योग से ट्विटर पर माफ़ी मांगते हुए पुराना ट्वीट डिलीट कर दिया।

अधिकारी का नाम है अनिल कुमार। एसीपी बतौर लखनऊ के पुलिस लाइन में तैनात हैं। सोमवार को जब शराब की दुकानें खुलीं और भीड़ बेकाबू हो उठी तो अनिल कुमार को लगा कि अब तक लॉकडाउन को लेकर की गयी सारी मेहनत बेकार हो गयी। दुखी मन से उन्होंने 4 मई को दोपहर एक बजकर आठ मिनट पर ट्वीट किया-

‘शराब बिक्री पर तत्काल रोक लगायी जानी चाहिए..40 दिन की मेहनत बर्बाद हो रही है।’

 

एसीपी अनिल कुमार ने इस ट्वीट को पीएमओ, नरेंद्र मोदी, सीएमओ दफ्तर, डीजीपी यूपी और लखनऊ के पुलिस आयुक्त को भी टैग किया।

एक पुलिस अफसर का ये ट्वीट तुरंत ही वायरल हो गया। सरकार के फैसले पर यह खुली टिप्पणी थी। जाहिर है पुलिस महकमे और सरकार में खलबली मचने लगी। सरकार की भृकुटी टेढ़ी होते देख एसीपी साहब को भी समझ में आ गया कि वर्दी चाहे जितनी कड़कदार हो, अफसर को अपने से ऊपर वालों के फैसले पर कड़कने का हक़ नहीं है। पता चला है कि पुलिस के आला अफसरों ने उन्हें समझाया और हड़कगाया। क़रीब सात घंटे बाद आखिरकार रात 8 बजकर 8 मिनट पर एसीपी अनिल कुमार ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। यही नहीं, उन्होंने ट्विटर पर सफायी देते हुए लिखा–

“अनजाने में ग़लत ट्वीट हो गया। मैं क्षमा मांगता हूँ।”

इस बार उन्होने पीएमओ और सीएमओ दफ्तर को ही टैग किया। यानी माफी सीधे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांगी गयी।

वैसे, पुलिस अफसर के ट्वीट डिलीट हो जाने से हक़ीक़त तो डिलीट होती नहीं है। मीडिया में आयी तस्वीरें देखकर कोई भी बता सकता है कि शराब की दुकानें खोलने से क्या हुआ। लोगों की भारी भीड़ जिस तरह दुकानों पर उमड़ी, पुलिस ने लाठियाँ चलायीं उससे फीजिकल डिस्टैंसिंग ने करने से कोरोना फैलने की आशंका कई गुना बढ़ गयी है। इतिहास तो ये दर्ज कर ही चुका है कि रामराज का दावा करने वाले योगीराज में कोरोना काल के दौरान देवालय बंद थे, लेकिन मदिरालय खोल दिये गये थे।

 


 

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