कांशीराम के सहयोगी रहे लालजी वर्मा और रामअचल राजभर बीएसपी से निष्कासित

मायावती ने एक बार फिर कांशीराम के समय से बीएसपी को मज़बूत करने में जुटे रहे पार्टी के दो मौजूदा विधायकों को बीएसपी से निष्कासित कर दिया। इनमें लालजी वर्मा तो पार्टी विधानमंडल दल के नेता भी थे। इसके अलावा बीएसपी के यूपी अध्यक्ष रहे रामअचल राजभर को भी निष्कासित कर दिया गया है। आरोप, पंचायत चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधि का लगा है। शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को बीएसपी विधानमंडल दल का नया नेता बनाया गया है।

ये दोनों नेता बीएसपी के दिग्गज माने जाते रहे हैं और कांशीराम के यूपी में बीएसपी को मज़बूत बनाने के शुरुआती प्रयासों में सहयोगी रहे हैं। लालजी वर्मा पहली बार 1986 में एमएलसी बने थे। बाद में वे 1991, 1996, 2002, 2007 और 2017 में बीएसपी के विधायक चुने गये। वे कटेहरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। बीएसपी के सरकार में रहते हुए कई बार मंत्री रहे और इन दिनों बीएसपी के विधानमंडल दल का नेतृत्व कर रहे थे।

उधर, अकबरपुर से मौजूदा विधायक रामअचल राजभर 1993 में पहली बार बीएसपी से विधायक बने। 1996, 2002, 2007 और 2017 में भी वे विजयी रहे। कई बार मंत्री बने और पार्टी की प्रदेश इकाई की कमान भी संभाली।

दोनों नेता मायावती के बहुत विश्वस्त माने जाते रहे हैं। ऐसे में दोनों का पार्टी से निष्कासित होना, अचरज की बात मानी जा रही है। ख़ासतौर पर जब विधानसभा चुनाव क़रीब हैं और बीएसपी अपनी पुरानी चमक खो गयी है, ऐसी चर्चा आम है।

हालाँकि मायावती उन नेताओं से लगातार छुटकारा पाने की कोशिश करती रही हैं जो कभी कांशीराम के साथ सक्रिय थे और इस बिना पर मायावती के उन दिनों के साक्षी रहे हैं जब उनकी आलाकमान जैसी हैसियत नहीं थी। इसी के तहत, बरखूराम वर्मा, आर.के.चौधरी, नसीमुद्दीन सिद्दिकी जैसे नेता पार्टी से बार किये गये। लालजी वर्मा और रामअचल राजभर उसी परंपरा की कड़ी हैं।

 

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