कोरोना नहीं था जौनपुर तबलीग़ के अमीर को, पर इलाज नहीं, मौत मिली !

जौनपुर ज़िले के तबलीग़ी जमात के अमीर (प्रमुख) नसीम अहमद की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि सिर्फ तबलीग़ से जुड़े होने के वजह से प्रशासन ने न सिर्फ उन पर बेज़ा मुकदमे लादे, बल्कि वक़्त रहते इलाज भी न होने दिया जिससे उनकी मौत हो गयी। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए मामले की न्यायिक जाँच की माँग की है।

नसीम अहमद 6 मार्च को तबलीग़ के कार्यक्र में शामिल होने के लिए दिल्ली गये थे और 11 माैर्च को वापस आ गये थे। तब तक कोरोना को लेकर सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाये गये थे। जब कोरोना की चर्चा शरू हुई और मीडिया में तबलीग़ी जमात के मरक़ज़ का मुद्दा उछला तो असर नीचे तक गया। सरकार की ओर से भी तबलीग़ को अलग से निशाना बनाया गया, लिहाज़ा प्रशासन भी सक्रिय हो उठा। जमातियों की सूचना देने पर इनाम देने की बात की जाने लगी। 2 अप्रैल को जौनपुर में नसीम अहमद के ख़िलाफ़ महामारी एक्ट जैसे कई मुकदमे दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया। कोरोना की जाँच रिपोर्ट निगेटिव आने के बावजूद उन्हें रियायत न दी गयी। 14 दिन बीत जाने के बावजूद उन्हें लगातार क्वारंटीन में रखा गया जबकि उनकी हालत बिगड़ने लगी थी।

दिल के मरीज़ बुज़ुर्ग नसीम अहमद के परिजन बार-बार डाक्टर से दिखाने की अपील करते रहे लेकिन प्रशासन ने ध्यान न दिया। हालत ज्यादा गंभीर हुई तो ज़िला अस्पताल से उन्हें वाराणसी रेफर कर दिया गया। वहाँ बीएचयू मेडिकल कालेज में दिखाया गया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि तबलीग़ से जुड़ा होने की वजह से डॉक्टर ने दूर से ही देखकर कुछ दवाइयां लिख दीं। परिजनों के गिड़गिड़ाने का भी असर नहीं पड़ा। उन्हें वापस जौनपुर लाया गया जहाँ 5 मई की रात उनका इंतकाल हो गया।

ज़ाहिर है, मीडिया के जरिये सरकार ने जिस तरीक़े से तबलीगी जमात को कोरोना का कारण बताने का अभियान छेड़ा था, उसने छोटे शहरों तक को सांप्रदायिक गिरफ्त में ले लिया है। बुज़ुर्ग नसीम अहमद को इलाज न मिलना, इसी का नतीजा है। लोगों में इसकी तीखी प्रतिक्रिया है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष फ़ैसल हसन तबरेज़ ने आरोप लगाया है कि जमात प्रमुख नसीम अहमद के इलाज में लापरवाही बरती गयी जिसकी वजह से उनकी मौत हुई। तबरेज़ ने मामले की न्यायिक जाँच की मांग की है। वहीं,समाजवादी पार्टी के नेता अमीक जामेई ने तबलीग जमात के जिला अमीर नसीम अहमद के परिवार को फोन से बात कर सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वे हाईकोर्ट जायेंगे।

नसीम अहमद के भांजे मो.कलीम ने क्या कहा, सुनिये–


जौनपुर से गुलनवाज़ अहमद की रिपोर्ट

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