Exclusive: जागरण एग्जिट पोल कांड में सर्वेक्षण करने वाली RDI कंपनी बनी पहेली

अभिषेक श्रीवास्‍तव

अपनी अंग्रेज़ी वेबसाइट पर दैनिक जागरण द्वारा एग्जि़ट पोल छापने के मामले में क्‍या चुनाव आयोग ने पोल करने वाली एजेंसी के बजाय गलत कंपनी पर हाथ डाल दिया है? चूंकि चुनाव आयोग ने दि वायर पर छपी ख़बर का संज्ञान लेते हुए जागरण के संपादकों और प्रबंध संपादक समेत सर्वे करने वाली एजेंसी के प्रबंध निदेशक/संबद्ध अधिकारी के खिलाफ़ एफआइआर का निर्दश जिला निर्वाचन अधिकारियों को जारी किया था, ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या बिना पुष्टि किए जल्‍दबाजी में दि वायर ने एक निर्दोष कंपनी को आचार संहिता उल्‍लंघन के मामले में फंसा दिया है?

दरअसल, दि वायर की जिस ख़बर के आधार पर चुनाव आयोग ने दैनिक जागरण और पोल करने वाली फर्म के खिलाफ संज्ञान लिया है, उसमें पोल करने वाली फर्म का नाम जागरण के हवाले से ”रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल” दिया गया है। दि वायर की खबर कहती है:
”The Dainik Jagran report said that the findings came from an organisation called Resource Development International (RDI) but mentioned no further details of either the organisation or the party which commissioned the survey”.

दरअसल, आरडीआइ के नाम से जो एजेंसी चुनावी सर्वेक्षण करती है उसका पूरा नाम है रिसर्च एंड डेवलपमेंट इनीशिएटिव प्राइवेट लिमिटेड जिसके निदेशकों के नाम हैं अविनाश दीक्षित और देवेंद्र कुमार। कंपनी पंजीयक कार्यालय के मुताबिक यह कंपनी 1999 में बनी और दिल्‍ली के कालकाजी में इसका पंजीकृत कार्यालय है। इसी एजेंसी ने 2015 के दिल्‍ली विधानसभा चुनाव में सर्वेक्षण कर के भारतीय जनता पार्टी को 45 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था

इसके उलट जिस कंपनी का हवाला दि वायर की खबर और चुनाव आयोग के प्रेस नोट में दिया गया है, उसका पूरा नाम है रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड जिसके निदेशक प्रवीण गुप्‍ता और राजीव गुप्‍ता हैं। यह कंपनी मैनेजमेंट कंसल्‍टेंसी का काम करती है और इसका पंजीकृत दफ्तर दिल्‍ली के आरके पुरम इलाके में है।

मीडियाविजिल ने रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल के दफ्तर में फोन कर के कंपनी के निदेशक राजीव गुप्‍ता से बात की। उन्‍हें इस बात की हैरत थी कि उनकी कंपनी का नाम एग्जिट पोल में कहां से आ गया जबकि उसका दूर-दूर तक कोई लेना-देना इस काम से नहीं है। गुप्‍ता ने बताया, ”मुझे सुबह कुछ दोस्‍तों से पता चला कि मेरी कंपनी का नाम इस मामले में आया है। हमारा काम मैनेजमेंट कंसल्‍टेंसी का है। हमारा कोई लेना-देना राजनीति या चुनाव आदि से नहीं है। मुझे समझ में नहीं आ रहा कि क्‍या करूं और किसके पास जाऊं।”

यह पूछे जाने पर कि क्‍या एफआइआर आदि की कोई सूचना उन्‍हें है, गुप्‍ता ने बताया कि अब तक उनके पास कोई सरकारी सूचना नहीं आई है। न ही अब तक किसी पत्रकार ने उन्‍हें फोन कर के जानने की कोशिश की है कि उनकी कंपनी का नाम क्‍यों इस मामले में लिया जा रहा है। उन्‍होंने बताया, ”आपका पहला फोन है वरना हर जगह मेरी कंपनी का नाम एग्जिट पोल के मामले में लिखा हुआ है और अब तक किसी ने फोन कर के पूछा तक नहीं।”

शेखर त्रिपाठी

दैनिक जागरण की अंग्रेज़ी वेबसाइट पर उत्‍तर प्रदेश के पहले चरण के मतदान का एग्जि़ट पोल छापने के खिलाफ़ कार्रवाई करते हुए कल रात नोएडा, ग़ाजि़याबाद और कानपुर के कुछ ठिकानों पर छापा मारा गया और अखबार के ऑनलाइन संपादक शेखर त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया है। ऐसी सूचना इंडियन एक्‍सप्रेस ने दी है। आशंका ज़ाहिर की जा रही है कि आगे इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक दैनिक जागरण प्रबंधन चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है।

दि वायर के मुताबिक जागरण समूह ने आरडीआइ नामक एक कंपनी द्वारा किए गए एग्जि़ट पोल को छापा था जिसमें भाजपा को सबसे ज्‍यादा सीटें आती दिखाई गई थीं। यह पोल एक घंटे तक अखबार की वेबसाइट पर लगा रहा उसके बाद हटा लिया गया। दि वायर पर इस संबंध में ख़बर छपने के बाद निर्वाचन आयोग ने इसका संज्ञान लिया और अख़बार के 15 संस्‍करणों के संपादकों/प्रबंध संपादक समेत सर्वेक्षण करने वाली कंपनी के प्रबंध निदेशक/संबद्ध अधिकारी के खिलाफ एफआइआर करने के निर्देश जिला निर्वाचन अधिकारियों को दिए थे।

सोशल मीडिया पर मोटे तौर पर एक स्‍वर में लोग इस कार्रवाई की प्रशंसा कर रहे हैं। कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए हैं कि महज एक घंटा तक छापने और हटा लेने के बावजूद इतनी कड़ी कार्रवाई करना और संपादक को जेल भेज देना कुछ ज्यादती है। मसलन, इकनॉमिक  टाइम्‍स की रोहिणी सिंह लिखती हैं:

 

दूसरी ओर अखबार ने अपने बचाव में कहा है कि उसने ‘अनजाने में’ यह एग्जिट पोल प्रकाशित किया था। अब चूंकि आरडीआइ यानी रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक राजीव गुप्‍ता ने भी इस घटना से अज्ञानता जताते हुए अपना पल्‍ला झाड़ लिया है, तो सवाल उठता है कि क्‍या दि वायर ने तो जल्‍दबाज़ी में कहीं किसी गलत कंपनी को इस मामले में नहीं फंसा दिया।

चूंकि एग्जि़ट पोल की खबर अब वेबसाइट से नदारद है और स्‍क्रीनशॉट भी नहीं है, लिहाजा दि वायर की ख़बर के अलावा और कोई स्रोत भी नहीं है जो बता सके कि पोल किसका था। दि वायर की खबर में एग्जिट पोल का जो लिंक दिया गया है, उसे क्लिक करने से जागरण की अंग्रेज़ी वेबसाइट खुल रही है।

 

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