‘महामारी के बहाने, क्या सरकार देश बेच देगी?’- कांग्रेस का वित्त मंत्री के एलान पर तीख़ा हमला

वित्त मंत्री की प्रेस कांफ्रेंस की अंतिम किस्त के जवाब में कांग्रेस की प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा आए। वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए हो रही इस प्रेस कांफ्रेंस में रविवार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बड़े आर्थिक एलानों पर तीख़ा हमला कर के सरकार से सवाल पूछे गए। आनंद शर्मा ने सबसे पहले इस 20 लाख करोड़ के एलान को गरीब के लिए बेकार बताया. क्योंकि इसमें गरीबों के हाथ में नकदी नहीं जा रही। उन्होंने ये भी कहा कि जो व्यक्ति मुश्किल में है, उसे लोन नहीं दिया जा सकता। लोन का अर्थ किसी भी आर्थिक भाषा में राहत नहीं होता है। ये 20 लाख करोड़ का पैकेज किसी भी हाल में गरीब के भले के लिए नहीं है।

प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया विजिल की ओर से मयंक सक्सेना के, हर सेक्टर में प्राइवेट एंट्री की अनुमति से जुड़े सवाल के जवाब में, आनंद शर्मा ने कहा कि महामारी का अर्थ देश को बेच देना नहीं होता है, युवा पीढ़ी के भविष्य को दांव पर लगा देना नहीं होता है। उन्होंने इसी सवाल के उत्तर में ये भी जोड़ा, “कोरोना की वजह से लगाए लगाए गए लॉकडाउन में सरकार को ये अधिकार नहीं मिल जाता कि बिना संसद की सहमति के लिए राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर मनमर्जी से फैसले ले ले। दुनिया भर के देशों में अहम फैसलों के लिए संसद बैठ रही है। ऐसे में अगर बिना संसद की सहमति लिए, प्रेस कांफ्रेंस में फैसले हो जाएं – तो ये डेमोक्रेसी, संसद और संविधान तीनों का अपमान है।”

आगे आनंद शर्मा ने जोड़ा कि माइनिंग का फैसला राज्यों के भी अधिकार क्षेत्र में आता है। वित्त मंत्री अंतरिक्ष पर्यटन की बात कर रही हैं, जबकि लोगों के पास खाने को नहीं है।

कांग्रेस की प्रेस कांफ्रेंस में कहा गया कि प्रधानमंत्री को थोड़ी हिम्मत दिखानी थी, लेकिन वो नहीं दिखा सके। उनको वित्तीय घाटे की चिंता नहीं करनी थी और महंगाई बढ़ने की चिंता नहीं करनी थी। सरकार को इस मामले में साहस को दिखाना था और बॉंड्स के माध्यम से और पैसा उठाना था। गरीब जनता को लोन की जगह, कैश देना था और राज्यों के लिए ऋण की अवधि बढ़ा देनी थी। राज्य सरकारों को जैसी ज़रूरत हो, उसके हिसाब से तत्काल फंड्स का ट्रांसफर किया जाना चाहिए।

आनंद शर्मा ने कहा, “कांग्रेस मनरेगा में सरकार के 40 हज़ार करोड़ की अतिरिक्त धनराशि देने के फैसले का स्वागत करती है। लेकिन सरकार झूठ बोल रही है कि ये पैकेज – कुल अर्थव्यवस्था का 10 फीसदी है। बल्कि सच ये है कि ये राशि, जीडीपी का 1.6 फीसदी है। ये समय किसी राजनीति का नहीं है, लेकिन मैं चाहूंगा कि पीएम मेरी इस बात का खंडन कर दें कि ये राशि, जीडीपी का 10 फीसदी नहीं बल्कि 2 फीसदी से भी कम है।”

ज़ाहिर है कि वित्त मंत्री की प्रेस कांफ्रेंस ने विपक्ष को मौका दिया है। सरकार का 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का दावा भी सच्चा होता नहीं दिख रहा है। लोग परेशान हैं और भूख तक से मर रहे हैं। लेकिन मौके छोड़ने और अहम मुद्दों को ठीक से खड़ा न कर पाने में विपक्ष का रेकॉर्ड वही है, जो सरकार के लिए फायदेमंद रहा है तो इस बार विपक्ष और देश, दोनों के लिए बेहतर होगा कि इस मुद्दे को न छोड़े।

 

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