‘पीड़ित के अधिकार भी, अर्णब जितने ज़रूरी’ – बॉम्बे HC ने कहा और अर्णब को ज़मानत नहीं दी!

बम्बई उच्च न्यायालय ने सोमवार को, अन्वय नायक आत्महत्या मामले में रिपब्लिक टीवी के डायरेक्टर और एंकर अर्नब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया. शनिवार को अंतरिम जमानत की याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा था. जिसे आज सुनाया है.

जमानत याचिका ख़ारिज करते हुए न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय द्वारा असाधारण क्षेत्राधिकार से बाहर का कोई मामला नहीं बनाया गया था, जब याचिकाकर्ताओं के पास दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 439 के तहत नियमित जमानत मांगने का वैकल्पिक उपाय हो. साथ ही अदालत ने बेहद अहम टिप्पणी करते हुए, ये भी कहा है कि इस मामले की जांच को दोबारा शुरू करने का फैसला किसी भी तरह से, कल्पना में भी अवैध नहीं ठहराया जा सकता है।

अदालत ने कहा कि ये दो लोगों की आत्महत्या का मामला है। इस मामले में पीड़ित परिवार के अधिकार भी उतने ही अहम हैं, जितने कि आरोपी पक्ष (अर्णब गोस्वामी) के. इसलिए इस मामले में इस आधार पर अर्णब गोस्वामी को ज़मानत नहीं दी जा सकती है कि उनको गिरफ्तारी से पहले कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई या फिर इस केस को दोबारा खोला गया.

फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा, “आरोपी सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं और संबंधित अदालत निर्दिष्ट समय सीमा यानी 4 दिन में आवेदन का फैसला करेगी.”

पीठ ने अर्नब गोस्वामी के जमानत याचिका के सुनवाई के तर्ज़ पर ही, उसके सह-अभियुक्त नीतीश सारदा और परवीन राजेश सिंह की अंतरिम जमानत अर्जी को उसी टिप्पणियों के साथ खारिज कर दिया.

कल यानी रविवार को अर्नब गोस्वामी को अलीबाग से महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले की तलोजा जेल में शिफ्ट किया गया है. उन पर आरोप है कि वो अदालती हिरासत के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहा था. इसी जेल स्थानान्तरण के दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारी पर आरोप लगाया कि शनिवार को अलीबाग के जेलर ने उनकी पिटाई की हैं. उनकी ज़िंदगी खतरे में है और उन्हें अपने वकील से बात भी नहीं करने दी जा रही है.

इसके बाद आज यानी सोमवार को महाराष्ट्र के राजपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख से बात की. राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राज्यपाल कोश्यारी ने गृह मंत्री देशमुख को अर्नब गोस्वामी की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर अपनी चिंता से अवगत कराया हैं. उन्होंने गृह मंत्री से गोस्वामी के परिवार को उन्हें देखने और उनसे बात करने की अनुमति देने के लिए भी कहा.

गौरतलब हो कि अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी अलीबाग के एक इंटीरियर डिजायनर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में की गई हैं. वर्ष 2018 में 53 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां कुमुद नाइक ने अलीबाग में आत्महत्या कर ली थी. आत्महत्या से पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट लिखा था. जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि अर्नब गोस्वामी और दो अन्य लोगों ने उन्हें 5.40 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया. जिस कारण उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई और उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा हैं.

उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद संपादक अर्नब गोस्वामी ने महाराष्ट्र के अलीबाग सेशन कोर्ट में जमानत याचिका लगाई है.

 

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