पिछली सरकार की योजनाओं का नाम बदलकर अपनी पीठ ठोंकती है मोदी सरकार!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल यानी 6 अगस्त को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदल कर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कर दिया। इसकी जानकारी पीएम ने ट्विट कर दी थी। सोशल मीडिया पर इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई। लोगों ने पूछा कि फिर मोदी जी ने अपने नाम पर क्रिकेट स्टेडियम का नाम क्यों रखा।

बहरहाल,  यह कोई पहली बार नही है जब बीजेपी सरकार ने किसी जगह का नाम बदला हो। इससे पहले भी बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकारें कई योंजनाओं और शहरों का नाम बदल चुकी है जो पिछली सरकारों ने शुरू की थीं। बीजेपी सरकार की नाम बदलने की नीति की काफी लंबी लिस्ट है। सत्ता में आते ही उसका सबसे ज़्यादा ज़ोर इसी पर रहा है।

गाँधी परिवार से आरएसएस और उसके संगठनों की चिढ़ जगज़ाहिर है। यही वजह है कि नाम बदलने के खेल का सबसे ज़्यादा निशाना वही बने हैं।  कांग्रेस हमेशा से मोदी सरकार पर आरोप लगाती आई है की जिन योजनाओं के नाम बदले गए हैं उनमें से कई योजनाएं यूपीए सरकार के समय की हैं। अगर योजनाओं पर नजर डालें तो कांग्रेस की बात सही भी लगती है।

जिन योजनाओं और संस्थानों के नाम बदले गए …


अब –
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
पहले –इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना

 (हिंदुस्तान टाइम्स ने 25 मई 2017 की एक रिपोर्ट के अनुसार, महिला और बाल विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि सिर्फ नाम बदल दिया गया है।)

अब –  प्रधानमंत्री आवास योजना
पहले –इंदिरा आवास योजना

(31 अगस्त 2016 को प्रस्तुत की गई एक संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस की इंदिरा आवास योजना “पुनर्नामांकन ” प्रधान मंत्री आवास योजना (ग्रामीण) थी।)

अब  –दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना
पहले –राजीव ग्रामीण विद्युतीकरण योजन

(23 जुलाई 2015 को जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, यूपीए की राजीव ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत “शामिल” कर दिया गया था ।)

अब – प्रधानमंत्री जन धन योजना  (पीएमजेडीवाई)
पहले –मूल बचत बैंक जमा खाता (बीएसबीडीए)

(28 अगस्त 2014 से पहले खोले गए सभी खाते बीएसबीडीए थे। बाद से, वे सभी पीएमजेडीवाई खाते बन गए हैं। यह केवल नामकरण का परिवर्तन है। बीएसबीडीए के विपरीत, पीएमजेडीवाई खातों में 1 लाख रुपये की क्रेडिट सीमा थी, जिसके कारण पेंशन प्रतिपूर्ति अस्वीकार हो रही थी।)

अब – बेटी बचाओ, बेटी पढाओ योजना
पहले – राष्ट्रीय बालिका विकास कार्यक्रम

( महिला और बाल विकास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और मानव संसाधन विकास मंत्रालयों के तहत जनवरी 2015 में शुरू की गई बेटी बचाओ, बेटी पढाओ योजना (बीबीबीपीवाई), यूपीए सरकार के तहत योजनाओं और मंत्रालयों में बिखरे हुए पुराने कार्यक्रमों का समेकन था। नई दिल्ली में एक शोध और वकालत संगठन सेंटर फॉर डेवलपमेंट एंड ह्यूमन राइट्स की फरवरी 2016 की रिपोर्ट के अनुसार, बीबीबीपीवाई का बालिका शिक्षा कार्यक्रम, सर्व शिक्षा अभियान जैसी पुरानी शिक्षा योजनाओं का एक रीपैकेजिंग था।)

अब – स्वच्छ भारत अभियान
पहले – निर्मल भारत अभियान

(सितंबर 2014 में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार की एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, निर्मल भारत अभियान योजना को स्वच्छ भारत अभियान में पुनर्गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी ।)

अब –  कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन
पहले – जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन

(19 मई 2014 की द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, एनडीए के शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने पद संभालने पर कहा था कि वे जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) को अपनी शहरी नवीनीकरण योजनाओं से बदल देंगे। इसके बाद, कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन (AMRUT), स्मार्ट सिटी मिशन और प्रधान मंत्री आवास योजना (शहरी) 25 जून 2015 को शुरू किए गए थे।)

पहले –राजीव आवास योजना
अब – सरदार पटेल राष्ट्रीय शहरी आवास मिशन

(पायनियर ने 10 अक्टूबर 2014 को आवास और गरीबी उन्मूलन मंत्री वेंकैया नायडू के हवाले से रिपोर्ट दी थी जिसमे कहा गया था, सरकार जल्द ही मौजूदा शहरी आवास योजनाओं का विलय और सुधार करके सरदार पटेल राष्ट्रीय आवास मिशन नामक एक व्यापक कार्यक्रम शुरू करने जा रही है।)

आदि और भी कई योजनाएं है जिनके नाम बदल कर कुछ परिवर्तन किए गए हैं। इसके अलावा जहां-जहां भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार हैं। वहां की राज्य सरकारों ने कई शहरों, कई संस्थानों, स्टेशनों और बंदरगाहों के नाम भी बदले दिए हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी राज्य के कई शहरों का नाम बदल है।

अब – दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन
पहले – मुगलसराय जंक्शन

अब – प्रयागराज
पहले –इलाहाबाद

अब –अयोध्या
पहले –फैजाबाद

अब – दीनदयाल पोर्ट
पहले – कांडला पोर्ट

अब –  नरेंद्र मोदी स्टेडियम
पहले – सरदार पटेल स्टेडियम

अब – अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान
पहले – राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान

अब – मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस
पहले –इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस

क्या नाम बदलने से देश का कुछ फायदा हुआ?

क्या सिर्फ नाम बदलने से ही योजनाओं के कामों में वृद्धि और बदलाव आए हैं। इसका जवाब पूरी तरह से नहीं में तो नही दिया जा सकता लेकिन हां की भी गुंजाइश नहीं है। नाम बदलने के साथ-साथ योजनाओं में थोड़े बहुत बदलाव भी आए लेकिन लेकिन अगर सरकार यह कहे कि नाम बदलने से योजनाएं 100 प्रतिशत बदल गई और विस्तृत हो गई तो या गलत होगा। सड़कों, संस्थानों, शहरों स्टेशनों आदि का नाम बदलना सिर्फ राजनीति की रणनीति है इससे ना तो देश का कोई फायदा है और ना ही देश वासियों का।

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