ज़ी न्यूज़ के सुधीर चौधरी फिर जा सकते हैं तिहाड़ ! वकीलों ने माना कि ‘उगाही वीडियो’ में आवाज़ सही !

ख़बर रोकने के एवज़ में सौ करोड़ की उगाही के आरोप में फँसे ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया की मुसीबत बढ़ सकती है। उनकी ज़मानत रद्द हो सकती है और वे फिर तिहाड़ पहुँच सकते हैं।  उनके वकीलों, विजय अग्रवाल और अमन लेखी ने आज सीबीआई अदालत में स्वीकार किया कि इस मामले से जुड़े वीडियो में उनके मुवक्किलों की ही आवाज़ है।

अदालत में सुनवाई शुरू हेने से पहले सीबीआई अदालत जज विनोद कुमार ने पूछा था कि  वीडियो में सुनाई पड़ रही आवाज़ उनके मुवक्किलों की है या नहीं।

बहरहाल, चौधरी के वकीलों ने आरोप लगाया कि जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) वीडियो में हुई बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट उन्हें मुहैया नहीं करा रहा है।  इस पर सीबीआई जज ने कहा कि जब आप मानते हैं कि आवाज़ आपके मुवक्किल की है तो फिर ट्रांस्क्रिप्ट की ज़रूरत क्या है ?

वकीलों ने आशंका जताई कि जेएसपीएल, क्राइम ब्रांच से मिलकर वीडियो में दर्ज बातचीत की ट्रांस्क्रिप्ट के साथ छेड़खानी कर सकता है। इस पर जज ने जांच एजेंसी से जवाब माँगा जिसने ऐसी किसी आशंका से साफ़ इंकार कर दिया।

जाँच एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही ट्रांस्क्रिप्ट और आवाज़ का नमूना जमा करने का निर्देश दिया है, इसलिए निचली अदालत को सुनवाई स्थगित कर देनी चाहिए। इस पर सीबीआई अदालत ने 23 अगस्त तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी। अदालत संपादकों की बेल निरस्त करने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही है।

सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया को दिसंबर 2012 में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उन्होंने जिंदल समूह के ख़िलाफ़ ख़बरें रोके के लिए सौ करोड़ रुपये माँगे। रुपये माँगने की यह बातचीत कंपनी के अधिकारियों ने रिकार्ड कर ली थी। दोनों 14 दिन तक तिहाड़ जेल में रहे। फिर उन्हें ज़मानत मिल गई।

मगर जेल से निकलने के बाद किसी शर्मिंदगी के बजाय ज़ी न्यूज़ के मालिक सुधीर चंद्रा ने चैनल की कमान वापस सुधीर चौधरी को सौंप दी। चौधरी की अगुवाई में ज़ी न्यूज़ ने बीजेपी के लिए खुलकर कैंपेनिंग की। पत्रकारीय धर्म को तार-तार करने वाले चौधरी को इसका इनाम भी मिला। मोदी सरकार ने 2015 में सुधीर चौधरी को एक्स श्रेणी की सुरक्षा मुहैया करा दी।

कुछ दिन पहले आवाज़ का नमूना देने में आनाकानी कर रहे सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया को कड़ी फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा जेल भेजने की चेतावनी दी थी। साथ ही यह भी कहा था कि वॉयस सैंपल का टेक्सट क्या होगा, ये मुलज़िम से नहीं जांच अधिकारी से तय होगा।

इस ‘उगाही कांड’ से पहले सुधीर चौधरी लाइव इंडिया चैनल में बतौर संपादक सेवाएं दे चुके हैं। उनके ही संपादकत्व में उनके रिपोर्टर प्रकाश सिंह ने 2007 में एक महिला शिक्षक उमा ख़ुराना का स्टिंग ऑपरेशन किया गया था। स्टिंग में आरोप लगाया गया था कि उमा खुराना स्कूल की बच्चियों से वेश्यावृत्ति करवाती हैं लेकिन बाद में स्टिंग फर्ज़ी पाया गया। तब सुधीर की अगुवाई में चल रहे लाइव इंडिया चैनल को ऑफ एयर होकर भारी शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी। हालांकि जांच के दौरान सुधीर चौधरी ने सारी गलतियों का ठीकरा अपने रिपोर्टर प्रकाश सिंह पर ही फोड़ दिया था।

 

 

 

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