अख़बारनामा: अनिल अंबानी अवमानना के दोषी, अखबारों में जुर्माने की खबर नहीं!

ख़बर ऐसी जैसे 453 करोड़ चुकाने के बदले तीन महीने जेल का विकल्प मिला हो



ख़बर ऐसी जैसे 453 करोड़ चुकाने के बदले तीन महीने जेल का विकल्प मिला हो


संजय कुमार सिंह

सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को अवमानना का दोषी माना, एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया, एरिक्सन का बकाया 453 करोड़ रुपए चुकाने के लिए चार हफ्ते की मोहलत दी। नहीं तो तीन महीने की जेल होगी। और यह सजा समूह की दो अन्य कंपनियों के चेयर पर्सन को भी भुगतना है। पर नाम सिर्फ अनिल अंबानी का आया है। मुमकिन है अन्य पाठकों को इसकी जानकारी ही न हो।

समूह की दो और कंपनियों के दो अन्य चेयरपर्सन अवमानना के दोषी ठहराए गए हैं। उनपर भी एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगा है। नहीं देने पर एक-एक महीने की जेल उन्हें भी होगी। इस स्पष्ट से मामले और आदेश को अखबारों में ऐसे छापा गया है जैसे सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया हो कि अनिल अंबानी एरिक्सन का बकाया 453 करोड़ रुपए चार हफ्ते में चुकाएं नहीं तो (सिर्फ उन्हें) तीन महीने की जेल होगी। इससे ऐसा लगता है जैसे सुप्रीम कोर्ट ने एरिक्शन के 453 करोड़ रुपए के बदले अनिल अंबानी को तीन महीने जेल का विकल्प दिया है। शीर्षक में अवमानना का दोषी तो बताया गया है पर उसकी सजा नहीं बताई गई है।

यह खबर कल सोशल मीडिया और वायर सर्विस में भी थी। मैं पूरी खबर नहीं पढ़ पाया यह समझने की कोशिश करता रहा कि अनिल अंबानी को अगर बकाया चुकाने के लिए कहा गया है और नहीं चुकाने पर जेल होगी तो अवमानना की सजा कहां है? अगर नहीं है, तो क्या सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अवमानना का दोषी माना है? आप जानते हैं कि इस मामले में अनिल अंबानी को निजी उपस्थिति से छूट देने की अपील पर सुनवाई के फैसले में एक शब्द बदलने से अर्थ बदल गया था और दो लोगों को नौकरी से निकालने की सजा हुई है। ऐसे मामले में मूल बात (शीर्षक से) नहीं समझ आ रही हो, अवमानना का मामला है और सजा नहीं दिख रही हो तो रिपोर्टिंग और संपादन की चूक साधारण नहीं है।

द हिन्दू ने इस खबर को लीड बनाया है। चार कॉलम में दो लाइन के शीर्षक का हिन्दी अनुवाद होगा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अनिल अंबानी, आर कॉम अदालत की अवमानना के दोषी”.. उपशीर्षक है, “आर कॉम चार सप्ताह में एरिक्शन को 453 करोड़ रुपए का भुगतान करे वरना अनिल अंबानी को जेल होगी”। यहां भी शीर्षक में मेरे सवाल का जवाब नहीं है। अगर अनिल अंबानी अवमानना के दोषी हैं और अदालत ने उन्हें बकाया चुकाने के लिए चार हफ्ते की मोहलत दी तो सजा नहीं दी? यह बड़ी खबर है। यह ठीक है कि अनिल अंबानी 453 करोड़ रुपए नहीं अदा कर पाएंगे तो उन्हें सजा होगी पर दे दिया तो? कुछ नहीं? क्या ऐसा है तो सामान्य है? हो सकता है? क्या शीर्षक से इतने सवाल उठने चाहिए?

ठीक है कि जवाब के लिए मुझे पूरी खबर पढ़नी चाहिए पर शीर्षक? द हिन्दू की खबर पढ़ने से पता चला कि अवमानना के दोषी अनिल अंबानी ही नहीं, उनके अधिकारी भी ठहराए गए हैं। खबर इस प्रकार है, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आर कॉम) और इसके चेयरमैन अनिल अंबानी और समूह की दो फर्मों को अदालत की अवमानना का दोषी माना और कहा कि दूरसंचार उपकरणों की स्वीडन की बड़ी कंपनी, एरिक्सन को 550 करोड़ रुपए का बकाया दिलाने में सहायता का हाथ बढ़ाने पर प्रतिवादियों ने “cavalier attitude” अपनाया। यहां cavalier का मतलब सामान्य रवैए से ही होना चाहिए। हालांकि, इसे साहसी रवैया भी माना जा सकता है।

न्यायमूर्ति रोहिनटन नरीमन और विनीत शरण की पीठ ने आर कॉम से कहा कि एरिक्सन को चार सप्ताह के अंदर 453 करोड़ रुपए का बकाया चुकाकर अवमानना को “purge” करें। यहां इसका मतलब खत्म करने से है। अदालत ने कहा है कि ये पैसे नहीं चुकाए गए तो अनिल अंबानी ही नहीं, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के चेयरपर्सन सतीश सेठ और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड (आरआईटीएल) की चेयरपर्सन छाया विरानी को भी तीन-तीन महीने की जेल होगी। अदालत ने कहा कि तीनों चेयरपर्सन ने अपनी कंपनियों की ओर से सशर्त वायदा किया था ताकि अदालत के प्रति वचनबद्धता से बच सकें। यह कहना कि 550 करोड़ रुपए की राशि परिसंपत्तियों की बिक्री के बाद दी जाएगी तीनों रिलायंस कंपनियों की जानकारी में गलत था। यह अपने आप में न्याय को लागू किए जाने को प्रभावित करता है और इसलिए अदालत की अवमानना है।

सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कंपनियों को एक करोड़ रुपए प्रत्येक का जुर्माना चार सप्ताह के अंदर अदा करने के लिए कहा है और अभी तक की खबरों से मुझे लगता है कि अवमानना की सजा यही है। अदालत ने कहा है कि जुर्माना (एक करोड़ रुपए प्रत्येक) देने में देरी करने पर प्रत्येक कंपनी के चेयरपर्सन को एक महीने की जेल होगी। इस तरह, स्पष्ट है कि अदालत ने रिलायंस कम्युनिकेशन (या अनिल अंबानी) को एरिक्शन का बकाया चुकाने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है और अवमानना मामले में एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि नहीं देने पर एक महीने की जेल और होगी। यही नहीं, एरिक्सन का बकाया चुकाने के मामले में चूंकि रिलायंस की दो औऱ कंपनियों के चेयरमैन झूठा वादा करने के कारण अवमानना के दोषी माने गए हैं इसलिए उन्हें भी एक-एक करोड़ रुपए का जुर्माना देना है और नहीं देने पर एक महीने की सजा होगी। इस तरह मामला बिल्कुल स्पष्ट है। पर शीर्षक क्यों उलझा हुआ लगाया गया है – मेरी समझ में नहीं आ रहा है।

हिन्दुस्तान टाइम्स ने इस खबर को पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में छापा है और बिजनेस पेज पर समूह के बिजनेस अखबार मिन्ट की खबर विस्तार से छापी है। वैसे भी, यह पन्ना पावर्ड बाई मिन्ट है यानी मिन्ट से शक्ति पाता है। यह खबर भी चार कॉलम में है और दो लाइन का शीर्षक तथा एक लाइन का उपशीर्षक है। पर घालमेल वैसे ही है। द टेलीग्राफ में शीर्षक भले पूरा नहीं है पर जो है वह स्पष्ट है और न भ्रम फैलाता है ना नए सवाल उठाता है। शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट अनिल से कहा, पैसे दीजिए या जेल जाइए। इंडियन एक्सप्रेस में भी इस खबर का शीर्षक वही है, सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी से कहा, 453 करोड़ रुपए दीजिए या जेल जाइए। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर है और शीर्षक तो दूसरे अंग्रेजी अंग्रेजी अखबारों की ही तरह है। हालांकि, अखबार ने इंट्रो में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने समूह की तीन फर्मों को अवमानना का दोषी ठहराया।

आइए, अब देखें हिन्दी अखबारों का क्या हाल है। दैनिक भास्कर में यह खबर पहले पन्ने पर है और बकाया नहीं चुकाने पर तीन महीने जेल की ही बात कही गई है। अवमानना कि लिए अनिल अंबानी समेत रिलायंस समूह के तीन चेयरपर्सन को एक-एक करोड़ रुपए प्रत्येक का जुर्माना देना है और नहीं देने पर तीनों को एक-एक महीने की जेल होगी यह शीर्षक में नहीं है और बकाया कुल राशि 453 करोड़ रुपए नहीं देने पर अनिल अंबानी को तीन महीने की जेल होगी यही खबर है जबकि उन्हें एक करोड़ रुपए का जुर्माना हुआ है यह शीर्षक में नहीं है जबकि यह छोटी बात नहीं है। ज्यादातर अखबारों में खबर यही है कि सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी से कहा कि 453 करोड़ दें नहीं तो जेल जाएं। पर उन्हें अवमानना मामले में एक करोड़ के जुर्माने की सजा मिली है वह शीर्षक में नहीं है।

नवभारत टाइम्स का शीर्षक है, “अनिल अंबानी से बोला कोर्ट, 453 करोड़ चुकाएं वरना जेल जाएं”। हिन्दुस्तान में यह खबर दो कॉलम में टॉप पर है। शीर्षक है, “अनिल अंबानी 453 करोड़ चुकाएं : कोर्ट”। दैनिक जागरण में भी शीर्षक वही है, “453 करोड़ दें वरना जेल जाएं अनिल।” अमर उजाला में यह खबर तीन कॉलम में टॉप बॉक्स है। शीर्षक है, “अनिल अंबानी 4 हफ्ते में 453 करोड़ चुकाएं, वरना होगी जेल- सुप्रीम कोर्ट”। उपशीर्षक है, “रिलायंस कम्युनिकेशन के चेयरमैन व दो अन्य को अवमानना का दोषी ठहराया”।

राजस्थान पत्रिका ने इस खबर को पहले पन्ने पर पांच कॉलम में प्रमुखता से छापा है। फ्लैग शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट एरिक्सन का बकाया न चुकाने पर आर कॉम के चेयरमैन अवमानना के दोषी। मुख्य शीर्षक है, अनिल को कोर्ट ने कहा, 453 करोड़ चुकाओ या जेल जाओ। अखबार ने इसके साथ एक बॉक्स छापा है – क्या है विवाद और एक दूसरा बॉक्स है, … तो एक महीने की अतिरिक्त जेल होगी। बकाया नहीं चुकाने पर अनिल अंबानी के साथ दो और चेयरपर्सन को तीन महीने जेल होगी यह इस खबर में भी प्रमुखता से नहीं है। नवोदय टाइम्स ने दो कॉलम में छोटी सी खबर छापी है, चार हफ्तों में पैसा नहीं दिया तो अनिल अंबानी को जेल।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। जनसत्ता में रहते हुए लंबे समय तक सबकी ख़बर लेते रहे और सबको ख़बर देते रहे। )

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