क्‍या NDTV ने पी. चिदंबरम का साक्षात्‍कार रोक कर ठीक किया?

 

क्‍या 6 अक्‍टूबर को एनडीटीवी ने बरखा दत्‍त द्वारा लिया गया पी. चिदंबरम का साक्षात्‍कार रोक कर ठीक किया? इस साक्षात्‍कार को न चलाए जाने पर थोड़ी देर हलचल मची थी जब दि वायर ने इसकी निंदा में अपने संपादक सिद्धार्थ वरदराजन का लेख छापा था। अब, जबकि गुबार बैठ गया है तो इस बात की समीक्षा की जानी चाहिए कि क्‍या एनडीटीवी का फैसला सही था? भले ही बहाना गलत रहा हो?



यह बात छुपी हुई नहीं है कि पी. चिदंबरम का एनडीटीवी के साथ पुराना रिश्‍ता रहा है। वह रिश्‍ता भी कोई बहुत पाक-साफ़ नहीं है, बल्कि उस पर ढेरों सवाल उठाए जा चुके हैं। ज़ाहिर है, अगर चिदंबरम का साक्षात्‍कार प्रसारित कर दिया जाता, तो यह प्रथम दृष्‍टया ”कनफ्लिक्‍ट ऑफ इंटरेस्‍ट” यानी हितों के टकराव का मामला होता, दूजे उस रिश्‍ते पर दोबारा नए सिरे सवाल खड़े होने शुरू हो जाते। एनडीटीवी के पास इससे बचने का यही तरीका था कि साक्षात्‍कार रोक दिया जाए और एक मौजूं बहाना गढ़ लिया जाए। बहाना बना ”राष्‍ट्रीय सुरक्षा” का।

पीछे मुड़कर देखें तो हम पाते हैं कि 5,500 करोड् की हेरफेर के मामले में एनडीटीवी की कहानी में कई रोचक किरदार मौजूद हैं जिनमें एक पूर्व कैबिनेट मंत्री चिदंबरम भी हैं। मोटे तौर पर यह मामला मीडिया, सत्‍ता और आवारा पूंजी के रिश्‍तों का है जिसे एक ईमानदार नौकरशाह और उसके ठोस वकीलों ने सामने लाने का काम किया था। इसकी कीमत उन्‍हें क्‍या चुकानी पड़ी, यह आइआरएस अफसर एस.के. श्रीवास्‍तव से बेहतर कोई नहीं बता सकता जिनकी जिंदगी पी. चिदंबरम के वित्‍त मंत्री और गृह मंत्री रहते हुए नरक बन गई थी।

श्रीवास्‍तव ने जब अपनी जांच में एनडीटीवी के घोटाले का परदाफाश किया, तो चैनल की ओर से उनके ऊपर काफी दबाव डाला गया। जब वे नहीं माने, तो सीधे चिदंबरम तक बात पहुंची और उन्‍होंने श्रीवास्‍तव को प्रताडि़त करना शुरू किया। एनडीटीवी और उसके निदेशकों की अनियमितताओं की जांच से श्रीवास्‍तव को दूर रखने के लिए चिदंबरम ने अपनी ताकत का इस्‍तेमाल किया। आखिर चिदंबरम को श्रीवास्‍तव की जांच से क्‍या दिक्‍कत थी?

आइए, बिंदुवार इस मामले को समझते हैं:

मामला

1. एस.के. श्रीवास्‍तव का आरोप- पी. चिदंबरम ने एनडीटीवी से 5500 करोड़ की रिश्‍वत कुछ फर्जी कंपनियों के रास्‍ते ली इसलिए चिदंबरम ने इस मामले में जांच की मंजूरी नहीं दी।

2. चिदंबरम का आरोप- श्रीवास्‍तव अनुशासनहीन हैं और उन्‍हें सरकारी सेवा से तत्‍काल हटाया जाना चाहिए। चिदंबरम के मातहत सीबीडीटी ने दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय से कहा कि श्रीवास्‍तव का ”प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है” और ”विभाग उनके काम करने के तरीके से खुश नहीं है”।

अपनी सुविधा के लिए पाठक कुछ चीजें नीचे दिए लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं:   

दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के सामने सीबीडीटी का झूठ

एस.के. श्रीवास्‍तव के वकील द्वारा आइआरएस और पूर्व आयकर प्रमुख रांची श्री एस.के. सेन को भेजा गया कानूनी नोटिस

एस.के. सेन का जवाब जिसने उच्‍च न्‍यायालय में सरकार के पक्ष का खंडन कर दिया

3. एनडीटीवी का केस- सवाल उठता है कि पहले से ही संदिग्‍ध मामलों में फंसे एनडीटीवी के निदेशकों को कांग्रेस पार्टी, खासकर पी. चिदंबरम का संरक्षण क्‍यों मिलता रहा?

– एनडीटीवी ने यूके और हॉलैंड में स्थित एनडीटीवी की सहायक कंपनियों के अघोषित निवेशकों से ”प्राइवेट प्‍लेसमेंट” के रास्‍ते पैसा जुटाकर 5500 करोड् की हेरफेर की।

– इस पैसे से न केवल उसने अपना 3500 करोड़ कर्ज चुकाया बल्कि बचे हुए 2000 करोड़ को दूसरे खाते में डाल दिया।

– इस पैसे को मॉरीशस स्थित एनडीटीवी की एक सहायक कंपनी को भेज दिया गया।

– इसके बाद इसी पैसे को वहां से भारत में एनडीटीवी की कई सहायक कंपनियों में मंगवा लिया गया।

– बाद में इन भारतीय कंपनियों का विलय एनडीटीवी लिमिटेड, भारत में कर दिया गया और इस तरह मॉरीशस या यूके या हॉलैंड की कंपनियों को इसमें शेयरधारिता के स्‍वाभाविक अधिकार से वंचित कर दिया गया।

– फिर यूके, मॉरीशस और हॉलैंड की सहायक कंपनियों को आश्‍चर्यजनक तरीके से बंद कर दिया गया।

– फिलहाल डॉलर के मूल्‍य के हिसाब से देखें तो राजस्‍व विभाग को दिए जाने वाले दंड और ब्‍याज की मात्रा 5500 करोड़ को पार कर चुकी है।

– उस साल एनडीटीवी इंडिया की सालाना रिपोर्ट में यूके और हॉलैंड स्थित सहायक कंपनियों का जि़क्र तक नहीं किया गया तथा इस संबंध में न तो मंत्रालय को कोई सूचना दी गई और न ही सरकार ने कुछ पूछा।

– आयकर कानून की धारा 80 एचएचएफ के तहत एनडीटीवी ने गलत निर्यात का प्रदर्शन किया यह बात श्रीवास्‍तव द्वारा अदालत को बतायी गई है। इस कार्रवाई से कम से कम 300 करोड़ के फर्जीवाड़े को खोल दिया।

– एनडीटीवी ने गैरकानूनी तरीके से कर कटौतियों का दावा किया जबकि वास्‍तव में कुछ भी निर्यात नहीं किया गया था।

– इस कटौती को हालांकि एक महिला कर अधिकारी सुमाना सेन ने मंजूरी दे दी थी जिनका दावा था कि श्रीवास्‍तव ने उनका उत्‍पीड़न किया है। इनके पति अभिसार शर्मा एनडीटीवी के कर्मचारी थे। इस बात को उन्‍होंने अब तक छुपाए रखा था।

– इस अधिकारी ने एनडीटीवी की ओर से एक करोड़ रुपये की यूरोप की यात्रा की और आधिकारिक स्‍तर पर कंपनी के साथ अपनी संलग्‍नता को लेकर झूठी रिपोर्ट दर्ज की। उन्‍होंने विभाग को बताया कि वे इस उपहार को लेने की अधिकारी हैं जबकि राजस्‍व विभाग से यह छुपाए रखा कि उनके पति एनडीटीवी में काम करते हैं।

– उसी आकलन वर्ष में सुमाना सेन ने एनडीटीवी को 1.46 करोड़ का कर रीफंड करवाया और अपने पति अभिसार शर्मा के हाथ से चेक भिजवाया, जो कि रीफंड नियमों का घोर उल्‍लंघन था।

– श्रीवास्‍तव पर सेन के लगाए आरोप अदालत में गिर गए, लेकिन चिदंबरम ने बाद में श्रीवास्‍तव के खिलाफ एक और जांच बैठा दी थी जिस पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने रोक लगा दी और चिंदबरम का नाम इसमें आने के बाद वे अपना जवाब दाखिल नहीं कर सके।

– मार्च 2013 में एनडीटीवी को एक और कर अधिकारी ने धारा 148 के अंतर्गत 2003 करोड़ की अघोषित आय को लेकर एक नोटिस भेजा था।

सहायक सामग्री डाउनलोड करने के लिए:

पी. चिदंबरम की रिश्‍वत के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के वकील पीसी श्रीवास्‍तव द्वारा लोकसभा सांसद और संयुक्‍त संसदीय समिति के अध्‍यक्ष श्री पीसी चाको को लिखा पत्र

सांसद कैप्‍टन जयनारायण प्रसाद निषाद द्वारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा गया पत्र

एनडीटी को 2003 करोड़ वाली नोटिस

एनडीटीवी को अघोषित स्रोतों से 642.54 करोड़ की आय संबंधी आयकर विभाग का आदेश

एनडीटीवी नेटवर्क्‍स पीएलसी (यूके) के निदेशकों और शेयरधारकों की सूची

2006-07 की एसीआर का नमूना जिसमें श्रीवास्‍तव को आउटस्‍टैंडिंग बताया गया है जबकि इसी साल उन्‍हें चिदंबरम ने निलंबित किया था

एनडीटीवी के पूर्व कर्मचारी अभिसार शर्मा की आयकर केस फाइल की चोरी

पीएमओ द्वारा चिदंबरम के सिलसिले में एसके श्रीवास्‍तव से मांगी गई सामग्री

897.27 करोड़ की अघोषित आय पर एनडीटीवी पर लगा कर

एनडीटीवी को 1.46 करोड़ के कर रीफंड को आयकर विभाग ने गैर-कानूनी बताया

एनडीटीवी, प्रणय रॉय और राधिका रॉय का 539 करोड़ से ज्‍यादा बकाया कर

वकीलों के सामने एसके श्रीवास्‍तव का बयान

प्रणय रॉय का गुरुमूर्ति को भेजा ईमेल

गुरुमूर्ति का रॉय को जवाब

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स्रोत: http://pcwedsndtv.blogspot.in/ और अन्‍य

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