एबीपी ने पीताम्बर ओढ़ा, लेकिन क्या दाऊद पर कार्रवाई जैसी फ़र्ज़ी ख़बरें देना बंद करेगा ?

एबीपी न्यूज़ बदल गया है। चैनल ने पीताम्बर ओढ़ लिया है। श्वेत की जगह पीताभ पृष्ठभूमि पर नीले की जगह लाल तिकोना अब उसकी पहचान है। लेकिन पीत इस तरह हावी है कि चैनल पर चलने वाली ख़बरों की साँय-सूँय के बीच लगातार पीताम्बर लहराते रहने का भ्रम होता है गोया माघ मेले में गायत्री परिवार का जुलूस निकल रहा हो।

एबीपी ने पीले के साथ जिस लाल को जोड़ा है, वह किसी परिवर्तन या क्रांति का नहीं, ‘लाल देह लाली लसे वाला’ है। कहने की ज़रूरत नहीं कि चैनल में भक्तिरस की गंगा बह रही है।

यह संयोग नहीं कि चैनल संपादक मिलिंद खांडेकर हनुमान चालीसा का असल अर्थ जनता तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत दिखते हैं। चैनल इस काम के लिए देवदत्त पटनायक की सेवाएं ले रहा है जो इन दिनों अंग्रेज़ीदाँ लोगों को मिथकरस पिलाने वाले मैनेजमेंट गुरु के रूप में मशहूर हो रहे हैं। बहरहाल, रंग बदलना किसी का भी हक़ है, सवाल यह है कि आनंद बाज़ार पत्रिका और दि टेलीग्राफ़ से रिश्ते में बँधे इस चैनल का ढंग कब बदलेगा ?

यह सवाल यूँ ही नहीं उठा है। हाँलाकि चैनल में “सनसनी’ शीर्षक से एक कार्यक्रम अरसे से चल रहा है, लेकिन बाक़ी समय ख़बर चलाने के पहले तथ्यों की पड़ताल का रिवाज नज़र आता था जो अब बीती बात होती जा रही है। पिछले दिनों जिन्होंने दाऊद इब्राहिम की संपत्ति की दुबई में ज़ब्ती से जुड़ी ख़बर इस चैनल में देखी होगी, वे स्क्रिप्ट लिखने वाले का क़लम चूमना चाहेंगे।

क्या तो अंदाज़ था और क्या ही चुनौती ! साथ में यह बार-बार याद दिलाया जा रहा था कि नरेंद्र मोदी ने यह वादा 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले प्रचार के दौरान किया था। बार-बार वह क्लिप भी दिखाई जा रही थी। यही नहीं, चैनल के पत्रकार जगविंदर पटियाल ने जब अरविंद केजरीवाल का इंटरव्यू लिया तो उन्हें घेरने के लिए भी दाऊद पर कार्रवाई का क़िस्सा छेड़ा। जब केजरीवाल ने इस ख़बर के सही होने पर सवाल किया तो पटियाल के चेहरे पर उपहास से भरी मारक मुस्कान तैर गई थी।

ख़ैर, बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम् स्वामी की बेटी और दि हिंदू की पत्रकार सुहासिनी हैदर ने अब साफ़ कर दिया है कि यह एक फ़र्ज़ी ख़बर थी जिसका स्रोत सिर्फ़ और सिर्फ़ बीजेपी थी। बीजेपी के प्रचार विभाग से निकली ख़बर चैनल पर छा गई। यह भी देखने की ज़रूरत महसूस नहीं की गई कि अगर संयुक्त अरब अमीरात में ऐसी कोई कार्रवाई हुई होती तो वहाँ के अख़बारों में कुछ आया होता। किसी अंतरराष्ट्रीय संवाद एजेंसी ने यह ख़बर जारी की होती। भारतीय विदेश या गृहमंत्रालय ने भी अपनी पीठ ठोंकी होती। लेकिन ऐसा कुछ न होने के बावजूद चैनल ने दाऊद की संपत्ति की ज़ब्ती को लेकर लंबी-लंबी फेंकी।

वैसे, 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भी दाऊद पर कार्रवाई की फ़र्ज़ी ख़बरें मीडिया में आई थीं और अब 2017 में यूपी समेत पाँच राज्यों के चुनाव के पहले दाऊद को लेकर बीजेपी की यह मीडियाबाज़ी काफ़ी कुछ कहती है। यह फ़क़त संयोग नहीं है।

बहरहाल, यह अपराध केवल एबीपी ने नहीं किया। बड़े-बड़े अख़बारों और चैनलों का भी यही हाल था। चाहे नंबर एक ‘आज तक’ हो या फिर ‘इंडिया टीवी’, सबने यह खबर दिखाई। ज़ी न्यूज़ या न्यूज़18 जैसे चैनलों से तो ख़ैर शिकायत भी कौन करेगा।

लेकिन बात यहाँ एबीपी की इसलिए है कि वह परिवर्तन के दौर से गुज़र रहा है। उससे अपील है कि वह रंग ही नहीं ढंग भी बदले। दाऊद इब्राहिम की संपत्ति कुर्की जैसी ख़बरों को लेकर दर्शकों से माफ़ी माँगे। यह एक नई शुरुआत हो सकती है। दर्शकों को अगर हनुमान चालीसा का सही अर्थ जानने का हक़ है तो उन्हें सही ख़बर भी जानने का हक़ है, वरना एबीपी का नारा ‘आपको रखे आगे’ , संदेह पैदा करेगा।

अपने आगे रखने वाला कौन और कैसा है, यह जानना बहुत ज़रूरी है। पीछे वाले की नीयत ठीक ना हो तो , आगे पड़ जाना घाटे का सौदा हो सकता है..! पीताम्बर ओढ़ने का मतलब यह नहीं की पीत पत्रकारिता की जाए।

.बर्बरीक

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