झारखंड: मेदिनीनगर सेन्ट्रल जेल में 13 सितंबर से भूख हड़ताल पर क़ैदी, पलामू में प्रदर्शन

महान क्रांतिकारी यतीन्द्र नाथ दास के शहादत दिवस यानि कि 13 सितम्बर से झारखंड के मेदिनीनगर सेन्ट्रल जेल के कैदी 5 सूत्रीय एजेंडे पर भूख-हड़ताल पर बैठे हुए हैं।

13 सितंबर से झारखंड के मेदिनीनगर सेन्ट्रल जेल में भूख-हड़ताल पर बैठे उम्र कैद की सजाप्राप्त कैदी माले नेता विश्वनाथ सिंह उर्फ बीएन सिंह के पुत्र सह माले नेता अविनाश रंजन ने बताया कि उनके पापा 13 सितंबर को जब भूख-हड़ताल पर बैठे, तो उनके साथ जेल स्थानांतरण की मांग को लेकर लाल बहादूर चौधरी और निक्की शर्मा भी भूख-हड़ताल पर बैठे थे और साथ में 30-40 कैदी भी समर्थन में भूख-हड़ताल पर थे।

14 सितंबर से क्रमिक रूप से दर्जनों कैदी भूख-हड़ताल पर बैठ रहे हैं। 17 सितंबर को जेल स्थानांतरण की मांग पर भूख-हड़ताल पर बैठे कैदी निक्की शर्मा की मांग मान ली गयी और उनका जेल स्थानांतरण भी कर दिया गया, लेकिन जेल में मुख्यतः 5 सूत्रीय एजेंडे पर भूख-हड़ताल पर बैठे कैदियों की मांगों पर जेल प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रही है।

 

मालूम हो कि राजनीतिक बंदियों के मानवीय अधिकारों की मांग पर शहीद-ए-आजम भगत सिंह व उनके साथियों द्वारा भी जेल में भूख-हड़ताल किया गया था, जिसमें 13 सितंबर, 1929 को भूख हड़ताल के 63वें दिन महान क्रांतिकारी यतीन्द्र नाथ दास की मृत्यु जेल में ही हो गयी थी। 15 अगस्त, 1947 के बाद भी हमारे देश में जेलों की स्थिति में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ है और जेल मैनुअल में अंग्रेजों के जमाने के ही कई चीजें आज भी शामिल है। पिछले कुछ सालों से देश के कई जेलों में 13 सितंबर को राजनीतिक बंदियों के मानवाधिकार के साथ-साथ जेल की समस्याओं पर भी कार्यक्रम प्रारंभ हुए हैं और ‘राजनीतिक बंदियों के साथ एकजुटता’ कार्यक्रम भी जेलों से बाहर हो रहे हैं।

कैदियों की मांग है कि..

(1) कैदी पुनर्निरीक्षण परिषद का त्रैमासिक बैठक सुनिश्चित किया जाए व 2020 के बैठक में रिहाई से वंचित 40 कैदियों को पूर्ण विचार कर कोरोना के मद्देनजर तत्काल कारामुक्त किया जाए l

(2) रिहाई से वंचित 40 कैदियों सहित आधा से अधिक सजा पूरी कर चुके कैदियों को ओपन जेल में स्थानांतरित किया जाए।

(3) सामाजिक जांच पड़ताल के बजाय कारा पदाधिकारियों के अनुशंसा पर कैदियों की रिहाई सुनिश्चित किया जाए।

(4) भोजन, वस्त्र, आवास की तरह बंदियों को नि:शुल्क टेलीफोन की सुविधा संवाद के लिए मुहैया कराया जाए व प्रति 100 बंदियों पर एक टेलीफोन बूथ दिया जाए।

(5) उत्तर प्रदेश की जेलों की तरह बंदियों को जेल गेट के भीतर बनी पार्क में परिजन से मुलाकाती कराने की व्यवस्था झारखंड के तमाम जेलों में किया जाए।

मेदिनीनगर सेन्ट्रल जेल के सुपरिटेंडेंट (जेल अधीक्षक) प्रवीण कुमार से जब इस पंक्ति के लेखक ने फोन पर भूख-हड़ताल के बारे में पूछ, तो उन्होंने बताया कि सिर्फ एक कैदी बीएन सिंह ही भूख हड़ताल पर हैं और उनकी अधिकाश मांगों को मानना जेल प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, कुछ मांगें तो राज्य व केन्द्र सरकार भी पूरा नहीं कर सकती है, उसके लिए तो सुप्रीम कोर्ट में ही रिट डालना होगा। फिर भी हमने जेल आईजी को उनकी मांगों को भेज दिया है, अभी वहाँ से कोई रिप्लाई नहीं आया है। अभी उनको तरल पदार्थ दिया जा रहा है। स्थिति खराब होने पर नोजल फीडिंग भी कराएंगे और कैदी के जीवन को बचाने की भरपूर कोशिश करेंगे।

जेल में भूख हड़ताल पर बैठे कैदी बीएम सिंह (फाइल फोटो)

जब जेल सुपरिटेंडेंट से निःशुल्क फोन सुविधा और प्रति 100 बंदी पर एक टेलीफोन देने संबंधी मांग के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि हमारे जेल में अभी कुल 1162 बंदी है और 8 टेलीफोन बूथ है, इसे बढ़ाया जा सकता है। फोन का कनेक्शन ‘एयरटेल’ का है और उसे प्रत्येक महीने रिचार्ज करने पड़ता है, इसलिए शुल्क लिया जाता है। नि:शुल्क राज्य सरकार ही कर सकती है।

जेल गेट के भीतर पार्क में मुलाकाती कराने संबंधी मांग पर सुपरिटेंडेंट कहने लगे कि ऐसा कहीं भी नहीं है। जब उन्हें उत्तरप्रदेश के नैंसी सेन्ट्रल जेल के बारे में बताया गया, तो वे बोलने लगे कि हमारे जेल में ऐसी कोई जगह नहीं है और फिर जेल के माहौल में मुलाकाती करने आये महिलाओं को जेल गेट के भीतर आने देना कहीं से भी व्यावहारिक नहीं है।

इधर, मेदिनीनगर सेन्ट्रल जेल में कैदियों के भूख-हड़ताल के समर्थन में झारखंड में कई जगह विरोध-प्रदर्शन हुए हैं और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कैदियों की मांगों को पूरा करने की मांग की जा रही है। भूख-हड़ताल के समर्थन में 13 सितंबर को भाकपा (माले) ने पलामू में विरोध प्रदर्शन किया है। फिर 16 सितंबर को भाकपा (माले), भाकपा, माकपा, जद (यू) व बसपा के साथ-साथ कई जनसंगठनों ने कैदियों के समर्थन में पलामू में प्रदर्शन किया। उसके बाद 17 सितंबर को रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर कैदियों की मांगों के समर्थन में भाकपा (माले) ने प्रदर्शन किया है।

आज यानि 18 सितंबर को भाकपा (माले) के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद और बगोदर विधानसभा के भाकपा (माले) के विधायक विनोद सिंह ने रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की और भूख-हड़ताल पर बैठे कैदियों की मांगों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के बाद माले राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद ने बताया कि कैदियों की सभी मांगों पर मुख्यमंत्री ने सहमति जतायी है और सभी मांगों को एक प्रक्रिया के तहत पूरा करने का भरोसा दिलाया है।

धीरे-धीरे भूख-हड़ताल पर बैठे कैदियों की मांगों पर झारखंड में एक माहौल बनने लगा है और जेल में बंद कैदियों की अमानवीय स्थिति में आमूल-चूल परिवर्तन की मांग जोर पकड़ने लगी है। झारखंड सरकार अपने वादे के अनुसार अगर कैदियों की मांगों को आने वाले समय में पूरा नहीं करती है, तो सभी जेलों में इन मांगों के साथ-साथ अन्य जायज मांगों को जोड़ते हुए एक बड़े आंदोलन का जन्म हो सकता है।


रुपेश कुमार सिंह, स्वतंत्र पत्रकार हैं।

 


 

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