मार्गदर्शक मंडल में मचा खलमंडल, प्रो.जोशी ने मोदी को दिए ज़ीरो नंबर!

 

गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के पहले नरेंद्र मोदी दो बीजेपी अध्यक्षों के सारथी बतौर दिखे थे। कहते हैं कि अयोध्या यात्रा के समय लालकृष्ण आडवाणी और कश्मीर की एकता यात्रा के समय मुरली मनोहर जोशी की गाड़ियों की स्टेयरिंग उन्होंने संभाली थी। लेकिन प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने इन दोनों बुज़ुर्गवारों को मार्गदर्शक मंडल में डलवा दिया।

पार्टी संगठन में पेश की गई इस नए मंच से कोई परामर्श कभी आया हो, या लिया गया हो, इसकी ख़बर नहीं है। ख़बरें जब भी आईं तो असंतोष और अकुलाहट की। बहरहाल, आडवाणी ने तो अब तक चुप्पी नहीं तोड़ी है, लेकिन लगता है कि कानपुर के सांसद और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षक रहे प्रो.मुरली मनोहर जोशी अपने शिष्य के दाँव-पेंच को लेकर धैर्य खो रहे हैं।

हाल ही में इंदौर में जिस तरह उन्होंने मोदी सरकार के कामकाज पर टिप्पणी की है, वह सामान्य नहीं है। उनसे मोदी सरकार को नंबर देने को कहा गया तो उन्होंने साफ़ कह दिया कि कॉपी पर कुछ लिखा ही नहीं गया। इसका मतलब ये है कि प्रोफेसर साहब को अगर वाक़ई कॉपी जाँचनी हो तो ज़ीरो नंबर ही देंगे। कोरी कॉपी पर और क्या नंबर दिया जा सकता है।

यही नहीं, जोशी जी ने मोदी सरकार के भाषा ज्ञान पर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ‘नीति आयोग’ कैसे आयोग हो सकता है जबकि नीति,नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (NITI) का शब्द संक्षेप है. क्या मोदी जी इतनी भी जानकारी नहीं रखते कि संस्थान आयोग नहीं होता है ?

इस सिलसिले में पढ़िए राजस्थान पत्रिका में छपी ख़बर–

 

 

 



 

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