फ़ेसबुक में नहीं रहीं अंखी दास, बीजेपी के इशारे पर नफ़रती खेल खेलने का आरोप!

अंखी दास 2011 से फ़ेसबुक में थीं। कहा जाता है कि उनका आरएसएस और बीजेपी से पुराना रिश्ता रहा है और अपने रसूख का इस्तेमाल करके उन्होंने फ़ेसबुक को बीजेपी के प्रचार का प्लेटफार्म बना दिया। विपक्षी दलों को निशाना बनाने वाली पोस्ट या फिर नफ़रत फैलाने वाली टिप्पणियों को फेसबुक में काफ़ी रीच मिलती रही जबकि मोदी सरकार या बीजेपी को निशाना बनाने वाली पोस्ट को सीमित कर दिया जाता था।

फ़ेसबुक की पॉलिसी हेड  (इंडिया, साउथ एंड सेंट्रल एशिया) अंखी दास ने कंपनी से इस्तीफ़ा दे दिया है। पिछले हफ़्ते ही संसदीय समिति ने उनसे डाटा निजता की लेकर क़रीब दो घंटे तक पूछताछ की थी। उन पर हेटस्पीच को लेकर भेदभाव बरतने और बीजेपी को राजनीतिक फ़ायदा पहुँचाने का आरोप था। उनके ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ के पत्रकार आवेश तिवारी ने एफआईआर भी दर्ज करायी थी।

पिछले दिनों अमेरिकी अख़बार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया था कि अंखी दास ने बीजेपी के एक विधायक की हेट स्पीच को हटाने से फ़ेसबुक कर्मचारियों को रोका था। इसके लिए उन्होंने बिज़नेस में नुकसान की बात कही थी। यानी हेट स्पीच के ख़िलाफ़ कार्रवाई से मोदी सरकार नाराज़ हो सकती है।

अंखी दास 2011 से फ़ेसबुक में थीं। कहा जाता है कि उनका आरएसएस और बीजेपी से पुराना रिश्ता रहा है और अपने रसूख का इस्तेमाल करके उन्होंने फ़ेसबुक को बीजेपी के प्रचार का प्लेटफार्म बना दिया। विपक्षी दलों को निशाना बनाने वाली पोस्ट या फिर नफ़रत फैलाने वाली टिप्पणियों को फेसबुक में काफ़ी रीच मिलती रही जबकि मोदी सरकार या बीजेपी को निशाना बनाने वाली पोस्ट को सीमित कर दिया जाता था।

पिछले दिनों उनकी भूमिका पर सवाल उठाने वाले आवेश तिवारी और कुछ अन्य के ख़िलाफ़ अंखी दास ने दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में  शिकायत दर्ज करायी थी। बाद में  आवेश ने रायपुर में अंखी दास के खिलाफ़ एफआईआर करा दी थी। विपक्षी दलों ने भी अंखी दास को लेकर तमाम सवाल उठाये थे। राहुल गाँधी ने सरकार पर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दबाव बनाने का आरोल लगाया था। दिल्ली विधानसभा ने भी फेसबुक के अधिकारियों से जवाब मांगा था।

फ़ेसबुक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अजित मोहन ने ख़ुद अंखी दास की विदाई की जानकारी दी है। उन्होंने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि अंखी दास ने बीते नौ सालों में कंपनी की ग्रोथ में अहम भूमिका निभायी।

अंखी दास से मोर्चा लेने वाले पत्रकार आवेश तिवारी ने इसे एक बड़ी जीत बताया है। उन्होंने फ़ेसबुक पर यह टिप्पणी लिखी-

“19 अगस्त का दिन था जब मेरे संघ से जुड़े एक मित्र ने कहा कि आवेश भाई आंखी दास भाजपा की ही नही संघ परिवार की भी बेटी है आपको छोड़ेंगे नहीं सब । मैंने उन्हें कहा कोई परवाह नही ,लड़ूंगा और जीतूंगा। मेरे फेसबुक वॉल मेरे इनबॉक्स पर मुझे भयभीत करने के लिए तमाम बातें कही गई। मेरा परिवार अज्ञात भय से संशकित था लेकिन मैं अभय था क्योंकि मेरे साथ आप सब थे।

आंखी दास मेरे लिए केवल फेसबुक की बड़ी अधिकारी भर नही थी उनके कृत्यों की वजह से देश मे लोकतंत्र, आम आदमी, अमनपसंद जनता, अल्पसंख्यक सभी के अधिकार खतरे में पड़ गए थे। इसलिये इस मामले में कदम पीछे खींचना सम्भव ही नही था।

मैं छ्त्तीसगढ़ पुलिस की सराहना करता हूँ कि वो इस मामले में लागातार फेसबुक से और मुझसे सवाल जवाब कर रहे थे। मैं दिल्ली विधानसभा की पीस कमेटी और राघव चड्ढा को भी बधाई देता हूँ जिसकी वजह से इस लड़ाई में और भी धार आ गई। मैं जनपथ,आर्टिकल 19, क्विंट, मीडियाविजिल, हिन्दी ट्रिब्यून, गार्जियन, इंडियन एक्सप्रेस, एनडीटीवी, सीपीजे को भी धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने इस मामले में निर्भीक पत्रकारिता की।”

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