सुशांत केस: संदीप सिंह ने 53 बार किया बीजेपी दफ़्तर फ़ोन, कांग्रेस ने पूछा-कौन बचा रहा है?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में फिल्म निर्माता संदीप सिंह को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संदीप सिंह के बीजेपी से कनेक्शन को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, कि सुशांत सिंह की मौत मामले में संदीप सिंह का नाम सामने आया है, आखिर संदीप का बीजेपी से क्या संबंध है, संदीप को कौन बचा रहा है? सिंघवी ने कहा कि ‘किसी संदिग्ध व्यक्ति का सीधा सम्बंध एक सत्तारूढ़ पार्टी से होता है, तो देश जानना चाहता है कि किससे जुड़े हैं तार, भाजपा में किससे है सम्बंध?

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “सुशांत मामले पर बीजेपी के यार एक्सपोज हो रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में संदीप सिंह ने 53 बार महाराष्ट्र बीजेपी दफ्तर में फोन किए हैं। संदीप सिंह ने ही लोकसभा चुनाव 2019 से पहले प्रधानमंत्री मोदी की बायोपिक बनाई थी। इस फिल्म के पोस्टर को उस वक्त के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रिलीज किया था।

सिंघवी ने कहा कि संदीप सिंह ने खुद कई बार दावा किया है कि वो सुशांत सिंह राजपूत के सबसे निकट मित्र थे। उसी के आधार पर मैं ये 10 प्रश्न पूछ रहा हूं। प्रश्नों में पहलू भी अंतर्निहित है, उत्तर भी अंतर्निहित है, आरोप भी अंतर्निहित है…

पहला पहलू या बिंदु ये है कि क्या ये वही संदीप सिंह हैं, जो निश्चित रुप से वही हैं, जिन्होंने 53 बार बीजेपी महाराष्ट्र ऑफिस में बार-बार टेलीफोन कॉल किए पिछले कुछ महीनों में, विशेष रुप से मैं बात कर रहा हूं ढाई महीनों के समय की। 53 बार, तो हम ये पहला प्रश्न पूछ रहे हैं कि कौन थे उनके आका, कौन थे उनके मेहरबान, जिससे वो सुरक्षा चक्र मांग रहे थे या फोन से क्या संबंध दर्शाया जाता है? कौन लेगा इस संबंध की जिम्मेदारी और कौन खुलासा करेगा इस रहस्य का?

दूसरा पहलू और आप इन सबका मिश्रण करें, किसी एक से फर्क नहीं पड़ता। लेकिन आप सबको देखें साथ में, एक होलिस्टिक तरीके से तो बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं।

नंबर दो, ये वही माननीय संदीप सिंह जी हैं, जिन्होंने माननीय प्रधानमंत्री जी की बॉयोपिक बनाई थी यानि फिल्म बनाई थी। 2019 के चुनाव से पहले ये प्रस्तावना होने वाली थी, कोइन्सिडेंस की बात है कि मैंने ही इसके विरुद्ध स्टे लिया था उस वक्त और ये फिर चुनाव के बाद ही प्रदर्शित हुई थी। तो जाहिर है कि ये एक निकटतम, आंतरिक, विशेष प्रिय पर्सनेलिटी हैं।

तीसरा, जब ये फिल्म आई थी तो उसके जो पोस्टर थे, उनको लोकार्पण करने के लिए, पोस्टर का वैसे लोकार्पण इतना महत्वपूर्ण नहीं होता फिल्म के लिए और ये सरकारी फिल्म नहीं थी, उसके लिए गए थे उस वक्त के मुख्यमंत्री फडणवीस जी, उस वक्त वो गृहमंत्री भी थे, तो ये आम आदमी नहीं है कोई, ये कोई फिल्म प्रोड्यूसर ही नहीं है सिर्फ।

चौथा, इस वक्त मीडिया में अलग-अलग जगहों पर ये खबरें छप रही हैं, आप लोगों द्वारा कि ये अब कब तक भारत में मिलेंगे, रहेंगे या कब विदेश मिलेंगे, हम कह नहीं सकते। तो इस संदर्भ में ये पूछना भी चौथा प्रश्न मेरा आवश्यक है और दस्तावेज सब सार्वजनिक रुप से मीडिया में है, हमारे पास भी है कि 29 मार्च, 2018 को इस व्यक्ति के विरुद्ध एक असोल्ट का चार्ज है मॉरिशस में। एक नाबालिग स्विस सिटीजन के विरुद्ध और उसमें सब लिखा है। ये भी लिखा है कि ये नाम है संदीप सिंह, जन्म तिथि है 2 सितंबर, 1981, मिर्जापुर, बिहार के हैं और वो उससे नाबालिग के विषय में लिखा है और फिर कहा है कि ये जो यात्रा में गए थे, ये जो दूतावास है भारत का मॉरिशस में, उसके द्वारा समर्थित हैं। ये दस्तावेज जो औपचारिक है वहाँ का, लिखा है। तो ये हुआ हमारा चौथा बिंदु।

पांचवा, जब ये सार्वजनिक रुप से आया थोड़ा मीडिया में, तो ये बात फैलाई गई कि ये केस अब शायद सैटल हो गया है या विदड्रो हो गया है। हमारे पास कोई सार्वजनिक रुप से दस्तावेज मीडिया में भी प्रोड्यूस नहीं किया गया। कहा गया, अगर हुआ भी है तो हमारा मूल उद्देश्य ये है आपके सामने रखना, ऐसे व्यक्ति की चाल, चरित्र और चेहरे की, जिससे भाजपा की निकट यारी है। अगर ये हुआ है या नहीं हुआ, हम जानते नहीं, दस्तावेज निकालने चाहिए, ये नहीं सिर्फ कि कोई कह दे।

छठा, ये जैसा मैंने कहा कि बहुत ही विशेष आदमी हैं, क्योंकि 2019, पिछले वर्ष की बात है और ये सब जितने आप देख रहे हैं राजपूत केस में कई चीजें तहकीकात, ये सब उसी समय की हैं। इनको वाईब्रेंट गुजरात में ये सिर्फ एकमात्र फिल्म निर्माता थे, जिनके साथ करारनामा हुआ 177 करोड़ का। इनकी कंपनी का नाम है लीजेंड ग्लोबल स्टूडियो, सार्वजनिक रुप से मीडिया ने सब तस्वीरें दिखाई हैं, माननीय मुख्यमंत्री गुजरात, इनके साथ स्टेज पर हैं। ये 2019 में एकमात्र फिल्म वाले के साथ ये जो करारनामा हुआ, ये एक ऐसी कंपनी थी, जिसका 2017 में 66 लाख की हानि, लोस, प्रोफिट नहीं लोस था। 2018 में ये परिवर्तित हुआ 61 लाख के प्रोफिट का। लेकिन 2019 में वापस 4 लाख की लोस थी, तो 177 करोड़ 4 लाख की लोस मेकिंग कंपनी में कहाँ से इनवेस्ट होगा, कैसे होगा, कौन देगा, क्या जिम्मेदारी है, क्या आधार है? ये भी एक छठा प्रश्न सीधा उठता है।

इन सब को जोडें तो सातंवा प्रश्न है कि क्या इसलिए ये इतनी हलचल हो रही है कि मॉरिशस का हल कैसे निकला, बॉयोपिक कैसे दी गई, ये 53 कॉल्स क्यों हुए, ये मीडिया में क्यों चल रही है कि ये शायद अब भारत में रहेंगे नहीं? कौन है वो नेता, जैसा मैंने कहा कौन है आका? ये बताया जाए माननीय फडणवीस जी बताएं, माननीय गडकरी जी बताएं? ये रहस्य क्या है, ये बेनकाब करना जरुरी है, ये आवश्यक है।

आठवां एक पहलू है कि ड्रग्स की बात बहुत हो रही है और मैं मैरिट में बिल्कुल नहीं जाना चाहता, मैं सिर्फ एक राजनीतिक बीजेपी से संबंधित प्रेस वार्ता ले रहा हूं। मैं ना केस के बारे में हूं, ना उच्च न्यायालाय, ना उच्चतम न्यायालाय, ना सीबीआई, किसी के बारे में नहीं बोल रहा हूं। ड्रग्स की बात चल रही है तो आपको शायद ये ध्यान नहीं दिलाया जाता और मैं ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि ये ड्रग्स के विषय में जितने मुद्दे उठाए जा रहे हैं, 2018 और ज्यादातर 2017 के हैं। 2017-18, तो जरा ये भी पूछ लिया जाए कि उस वक्त फडणवीस सरकार इतने बड़े नेक्सेस इन सब चीजों पर क्या कर रही थी?  उस समय फडणवीस सरकार थी, बीजेपी सरकार थी।

नौंवा मेरा पहलू ये है कि लाज़मी रुप से उठता है कि ये जो आतुरता थी कि हम चाहते हैं कि तुंरत सीबीआई इसको ले। हम खुद ऑफर कर रहे हैं, ये आतुरता सीबीआई लेने का कारण क्या संदीप सिंह थे?

दसवां औऱ आखिरी प्रश्न ऐसे कई सारे गैर कानूनी कारनामों से निकट संबंध रखने वाले या उसमें मिले हुए लुप्त लोग बीजेपी से इतना निकट संबंध कैसे रखते हैं?

मैं आपको दो उदाहरण देना चाहता हूं – आपको याद है कि बहुत जबरदस्त विश्व का करीब-करीब सबसे महंगा सूट आया था, जिसमें सूट-बूट का एक बहुत ही उपयुक्त जुमला था। उससे जो संबंधित परिवार और व्यक्ति हैं, वो वेंटिलेटर स्कैम में बाद में पूरी तरह से गुजरात में लिप्त पाए गए। वेंटिलेटर स्कैम बहुत बड़ा हुआ कोविड़ के वक्त और उससे पहले अस्पताल की सप्लाइज के विषय में कोविड़ के भी पहले।दूसरा, जो एक एक्सिडेंटल पीएम, इधर तो संदीप सिंह ने बनाई बॉयोपिक माननीय प्रधानमंत्री की और दूसरा जो किताब लिखी गई, मैं किताब के लेखक की बात नहीं कर रहा, उस पर जो फिल्म बनाई गई या उसके विषय में डिपिक्शन हुआ, वो एक गुट्टे साहब के परिवार ने किया, उनके पुत्र गुट्टे साहब ने किया, लेकिन उनके जो पिता श्री हैं, वो एक कृषक लोन्स के बहुत बड़े स्कैम में, वो भी उतने ही लिप्त पाए गए। बल्कि जो खबरें आई हैं मीडिया में, उसके अनुसार वो जेल में भी रहे।


 

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